- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- पुलिस महकमे में बदलाव...
उत्तर प्रदेश
पुलिस महकमे में बदलाव निलंबित दरोगा की नई तैनाती बनी चर्चा का विषय
Ratna Netam
4 Sept 2026 8:16 PM IST

x
गोंडा : उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। जिले की कानून व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक (SP) ने **31 उपनिरीक्षकों (दरोगाओं)** की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। वहीं, रिश्वत लेने के आरोपों में निलंबित किए गए दरोगा **उत्कर्ष पांडेय** को एसपी ने अपना **जनसंपर्क अधिकारी (PRO)** नियुक्त किया है। इस नियुक्ति को लेकर पुलिस महकमे में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
एसपी की ओर से जारी आदेश में कई दरोगाओं को अलग-अलग थानों और महत्वपूर्ण शाखाओं में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव पुलिस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए किया गया है।
31 दरोगाओं को मिली नई तैनाती
गोंडा पुलिस अधीक्षक अभिषेक ने पुलिस लाइन में तैनात उपनिरीक्षकों को जिले के अलग-अलग थानों में भेजा है। इसमें कई दरोगाओं को वरिष्ठ उपनिरीक्षक और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी दी गई है।
तबादला सूची में कई थानों के लिए नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि बेहतर पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण के लिए समय-समय पर इस तरह के बदलाव किए जाते हैं।
उत्कर्ष पांडेय को बनाया गया SP का PRO
इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा उपनिरीक्षक उत्कर्ष पांडेय की नियुक्ति को लेकर हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, रिश्वत लेने के आरोपों में निलंबित किए गए उत्कर्ष पांडेय को अब एसपी का पीआरओ बनाया गया है।
इस फैसले को लेकर पुलिस विभाग और स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि अधिकारियों की ओर से नियुक्ति को लेकर कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
रिश्वत के आरोपों के बाद हुए थे सस्पेंड
उत्कर्ष पांडेय पर रिश्वत लेने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें निलंबित किया गया था। पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अक्सर विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाती है।
अब पीआरओ पद पर उनकी तैनाती के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि निलंबन के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई। हालांकि विभागीय स्तर पर इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
पुलिस प्रशासन ने क्या कहा?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तैनाती और जिम्मेदारी में बदलाव प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। अधिकारियों की क्षमता, जरूरत और विभागीय कार्यों को देखते हुए जिम्मेदारियां तय की जाती हैं।
वहीं, किसी भी अधिकारी के खिलाफ लगे आरोपों और जांच की प्रक्रिया अलग होती है।
थानों में बदली जिम्मेदारियां
नई सूची के अनुसार कई दरोगाओं को अलग-अलग थाना क्षेत्रों में भेजा गया है। इनमें वरिष्ठ उपनिरीक्षक, थाना प्रभारी और अन्य शाखाओं की जिम्मेदारियां शामिल हैं।
पुलिस विभाग का उद्देश्य अपराध नियंत्रण, शिकायतों के निस्तारण और आम जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है।
विभाग में चर्चा का विषय बना फैसला
उत्कर्ष पांडेय को पीआरओ बनाए जाने का फैसला पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे प्रशासनिक निर्णय बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि गंभीर आरोपों के बाद ऐसी जिम्मेदारी क्यों दी गई।
हालांकि किसी भी अधिकारी की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय विभागीय नियमों और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के अनुसार होता है।
आगे जांच पर रहेगी नजर
अब सभी की नजर इस बात पर है कि उत्कर्ष पांडेय से जुड़े मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। यदि जांच में कोई नई बात सामने आती है तो विभाग आगे निर्णय ले सकता है।
पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती होती है।
Next Story





