उत्तर प्रदेश

रेरा ने वसूले करोड़ों 470 खरीदारों से मांगी बैंक डिटेल

Ratna Netam
11 Aug 2026 4:23 PM IST
रेरा ने वसूले करोड़ों 470 खरीदारों से मांगी बैंक डिटेल
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उत्तर प्रदेश : घर और फ्लैट खरीदने वाले लोगों की शिकायतों पर बिल्डरों से करोड़ों रुपये की वसूली करने के बाद अब उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) के सामने एक अलग तरह की समस्या खड़ी हो गई है। प्राधिकरण के पास करीब 20 करोड़ रुपये की धनराशि मौजूद है, जिसे 470 शिकायतकर्ताओं को वापस किया जाना है, लेकिन खरीदारों की ओर से बैंक खाते की अपडेटेड और सत्यापित जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के कारण भुगतान अटका हुआ है। रेरा ने ऐसे सभी शिकायतकर्ताओं से जल्द संपर्क कर जरूरी दस्तावेज जमा कराने की अपील की है, ताकि उनकी रकम उनके बैंक खातों में भेजी जा सके।
यूपी रेरा के अनुसार, विभिन्न मामलों में बिल्डरों और प्रमोटरों से वसूली गई धनराशि संबंधित शिकायतकर्ताओं को लौटाई जानी है। इन मामलों में प्राधिकरण की ओर से वसूली की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है, लेकिन भुगतान के लिए आवश्यक बैंक विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण रकम ट्रांसफर नहीं हो पा रही है। करीब 20 करोड़ रुपये की राशि फिलहाल प्राधिकरण के पास ही पड़ी हुई है।
बताया गया है कि कुल 470 ऐसे मामले हैं, जिनमें शिकायतकर्ताओं को धनराशि वापस की जानी है। रेरा की ओर से संबंधित लोगों को उनके पंजीकृत ई-मेल पते पर कई बार सूचना भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में शिकायतकर्ताओं ने अभी तक अपने बैंक खाते की अपडेटेड जानकारी और जरूरी शपथ पत्र जमा नहीं कराया है। इसके चलते रिफंड की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
रेरा अधिकारियों के मुताबिक, शिकायतकर्ताओं को अपने बैंक खाते का सत्यापित और अपडेटेड विवरण उपलब्ध कराना होगा। इसके लिए 10 रुपये के स्टांप पेपर पर नोटरीकृत शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र में बैंक खाते से जुड़ी आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी, ताकि प्राधिकरण भुगतान से पहले बैंक विवरण का सत्यापन कर सके।
शिकायतकर्ता यह शपथ पत्र स्पीड पोस्ट के माध्यम से संबंधित कार्यालय में भेज सकते हैं। इसके अलावा वे स्वयं कार्यालय पहुंचकर भी दस्तावेज जमा करा सकते हैं। रेरा ने लोगों से अपील की है कि वह इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करें, जिससे लंबे समय से लंबित उनकी धनराशि का भुगतान किया जा सके।
यूपी रेरा ने शिकायतकर्ताओं की सुविधा के लिए क्षेत्र के हिसाब से दस्तावेज जमा करने की व्यवस्था भी तय की है। एनसीआर क्षेत्र के जिलों से संबंधित शिकायतकर्ताओं को अपना नोटरीकृत शपथ पत्र गौतमबुद्ध नगर स्थित रेरा के क्षेत्रीय कार्यालय में जमा कराना होगा। वहीं, उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से जुड़े शिकायतकर्ताओं को यह दस्तावेज लखनऊ स्थित रेरा कार्यालय में उपलब्ध कराने होंगे।
प्राधिकरण का कहना है कि बैंक खाते की सही और सत्यापित जानकारी मिलते ही भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा। गलत या पुराने बैंक खाते की जानकारी के कारण रकम गलत खाते में जाने या भुगतान प्रक्रिया में अन्य तकनीकी समस्या उत्पन्न होने की आशंका रहती है। इसलिए रेरा की ओर से अपडेटेड बैंक विवरण के साथ शपथ पत्र मांगा जा रहा है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट से जुड़े विवादों में खरीदारों की शिकायतों के समाधान और उन्हें आर्थिक राहत दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। कई मामलों में खरीदारों ने बिल्डरों से समय पर घर या फ्लैट नहीं मिलने, परियोजनाओं में देरी और अन्य समस्याओं को लेकर रेरा का दरवाजा खटखटाया है। ऐसे मामलों में आदेश के बाद बिल्डरों और प्रमोटरों से धनराशि की वसूली की जाती है।
अब समस्या यह है कि वसूली के बाद रकम संबंधित खरीदारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया बैंक विवरण के अभाव में अटक रही है। प्राधिकरण के पास करोड़ों रुपये उपलब्ध होने के बावजूद लाभार्थी शिकायतकर्ताओं की ओर से जरूरी दस्तावेज नहीं मिलने से भुगतान नहीं हो पा रहा है।
रेरा अधिकारियों के अनुसार, 470 मामलों के शिकायतकर्ताओं को कई बार ई-मेल के जरिए सूचना दी जा चुकी है। इसके बावजूद जिन लोगों ने अभी तक बैंक खाते का शपथ पत्र जमा नहीं किया है, उनसे जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि शिकायतकर्ता समय रहते सही दस्तावेज उपलब्ध करा देते हैं तो उनके पक्ष में वसूली गई रकम को बैंक खाते में स्थानांतरित करने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।
ऐसे में जिन खरीदारों की रकम यूपी रेरा के पास वसूली के बाद जमा है, उनके लिए अब सबसे जरूरी है कि वे अपना बैंक विवरण अपडेट कर निर्धारित प्रारूप में नोटरीकृत शपथ पत्र जमा करें। एनसीआर क्षेत्र के लोग गौतमबुद्ध नगर कार्यालय और अन्य जिलों के शिकायतकर्ता लखनऊ कार्यालय में दस्तावेज जमा कर सकते हैं। रेरा ने शिकायतकर्ताओं से अनावश्यक देरी न करने की अपील की है, ताकि उनके हक की करीब 20 करोड़ रुपये की राशि जल्द उनके खातों तक पहुंचाई जा सके।
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