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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने छात्रों और Gen Z युवाओं से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस से दूरी बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दल युवाओं और छात्रों के आंदोलनों को उनके वास्तविक मुद्दों से भटकाकर अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
मायावती ने कहा कि छात्रों के रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और शिक्षा से जुड़े सवाल किसी राजनीतिक दल के हित से बड़े हैं। उनके मुताबिक, युवाओं को अपने मुद्दों को लेकर स्वतंत्र रूप से आवाज उठानी चाहिए और किसी भी राजनीतिक पार्टी को अपने आंदोलन की दिशा तय करने का मौका नहीं देना चाहिए।
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब कथित NEET पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र और युवा आंदोलन कर रहे हैं। दिल्ली में अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन ने भी युवाओं के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। हाल के महीनों में यह आंदोलन NEET और परीक्षा व्यवस्था में कथित खामियों के खिलाफ प्रमुख युवा अभियानों में बदल गया।
BJP और कांग्रेस पर लगाया आंदोलन हाईजैक करने का आरोप
मायावती ने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलनों को लेकर BJP और कांग्रेस दोनों अपने-अपने राजनीतिक फायदे की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष जहां अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करता है, वहीं विपक्षी दल भी युवाओं की समस्याओं को राजनीतिक मुद्दा बनाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहते हैं।
उन्होंने NEET पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआत में यह आंदोलन छात्रों और युवाओं की ओर से उठाए गए सवालों पर केंद्रित था। उनके अनुसार, अभिजीत दीपके के नेतृत्व में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आंदोलन शुरू किए जाने के कुछ ही दिनों बाद कांग्रेस ने इसे अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक CJP का NEET आंदोलन लंबे समय तक स्वतंत्र युवा आंदोलन के रूप में चला और इसमें विपक्षी दलों का समर्थन बाद के चरणों में दिखाई दिया। इंडियन एक्सप्रेस ने जून में रिपोर्ट किया था कि CJP के आंदोलन को कांग्रेस को छोड़कर कई विपक्षी दलों ने समर्थन दिया था, जबकि कांग्रेस उस समय अपेक्षाकृत सतर्क रुख अपना रही थी।
CJP आंदोलन से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा
अभिजीत दीपके के नेतृत्व में उभरा CJP आंदोलन सोशल मीडिया से शुरू होकर परीक्षा व्यवस्था और युवाओं की समस्याओं से जुड़े बड़े अभियान में बदल गया। NEET 2026 में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की मांग को लेकर CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।
आंदोलन के दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग प्रमुख रही। जुलाई में लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद से हटने की घटना ने आंदोलन को और चर्चा में ला दिया। CJP ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया था।
इस आंदोलन की खासियत यह रही कि इसमें युवाओं ने सोशल मीडिया, मीम्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया। कई रिपोर्टों में इसे Gen Z की नई तरह की राजनीतिक सक्रियता के उदाहरण के तौर पर भी देखा गया है।
झारखंड के छात्र आंदोलन का भी किया जिक्र
मायावती ने झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां भी छात्र अपनी समस्याओं और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे, लेकिन बाद में BJP और उसके सहयोगियों ने आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की।
झारखंड में हाल के दिनों में JPSC और JSSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के प्रदर्शन तेज हुए हैं। जुलाई के अंत में छात्रों ने रांची में मार्च निकालकर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई थी।
अगस्त में भी झारखंड में छात्र और युवा प्रदर्शन जारी रहे। 10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। इस घटना के बाद BJP ने राज्य सरकार के खिलाफ बंद का आह्वान किया।
BSP को बताया युवाओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशील
मायावती ने कहा कि BSP ही ऐसी पार्टी है जो युवाओं की समस्याओं को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ उठाने का लक्ष्य रखती है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे राजनीतिक दलों के पीछे चलने के बजाय अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहें।
उनका कहना है कि बेरोजगारी, परीक्षा में पारदर्शिता, पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और रोजगार के अवसर युवाओं के वास्तविक मुद्दे हैं। इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों से सवाल किया जाना जरूरी है, लेकिन छात्रों के आंदोलनों को किसी पार्टी के राजनीतिक अभियान का हिस्सा नहीं बनना चाहिए।
मायावती की यह अपील BSP के लिए युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले Gen Z मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखी जा सकती है। Gen Z की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने देश की पार्टियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालिया युवा आंदोलनों ने दिखाया है कि सोशल मीडिया से जुड़े छात्र और युवा पारंपरिक राजनीतिक संगठनों से अलग तरीके से भी बड़े आंदोलन खड़े कर सकते हैं।
युवाओं को राजनीतिक विकल्प चुनने की अपील
मायावती के बयान का मूल संदेश यह है कि युवा अपने आंदोलनों की स्वतंत्रता बनाए रखें और BJP तथा कांग्रेस सहित किसी भी राजनीतिक दल को अपने मुद्दों पर हावी न होने दें। उन्होंने युवाओं के सामने BSP को एक वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश भी की।
हालांकि, छात्रों के आंदोलनों में राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है। एक तरफ राजनीतिक समर्थन से किसी आंदोलन को व्यापक मंच और संसाधन मिल सकते हैं, वहीं दूसरी ओर इससे आंदोलन के मूल मुद्दों के राजनीतिकरण का खतरा भी रहता है।
NEET और झारखंड की भर्ती परीक्षाओं से जुड़े हालिया आंदोलनों ने यह साफ कर दिया है कि परीक्षा व्यवस्था, रोजगार और भविष्य को लेकर युवाओं में असंतोष गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। अब मायावती की अपील के बाद यह बहस और तेज हो सकती है कि Gen Z अपने आंदोलनों को राजनीतिक दलों से स्वतंत्र रखे या विभिन्न दलों के समर्थन को अपने मुद्दों के लिए इस्तेमाल करे।





