उत्तर प्रदेश

BJP में नए चेहरों को मौका गोरखपुर समेत जिलों में टीम गठन की तैयारी

Ratna Netam
11 Aug 2026 3:45 PM IST
BJP में नए चेहरों को मौका गोरखपुर समेत जिलों में टीम गठन की तैयारी
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उत्तर प्रदेश : अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। मिशन-2027 की तैयारियों के बीच पार्टी अब सांगठनिक जिलों की लंबित टीमों की घोषणा जल्द करने की तैयारी में है। प्रदेश में करीब आठ से नौ ऐसे संगठनात्मक जिले हैं, जहां जिलाध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है, लेकिन उनकी पूरी टीम अब तक घोषित नहीं की गई है। इनमें हाथरस, अंबेडकर नगर, देवरिया, चंदौली, गोरखपुर महानगर और वाराणसी समेत कई जिले शामिल बताए जा रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नई टीमों के गठन में हो रही देरी का असर संगठन के कामकाज पर पड़ रहा है। जिलाध्यक्षों की घोषणा होने के बावजूद जब तक उनके साथ काम करने वाली पूरी टीम नहीं बनती, तब तक पार्टी के अभियान और कार्यक्रमों को अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही है। वहीं, मौजूदा पदाधिकारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नए पदाधिकारियों की नियुक्ति संभावित होने के कारण कई मौजूदा नेता अपने कार्यों में पहले जैसी सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं।
भाजपा ने मिशन-2027 को ध्यान में रखते हुए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति बनाई है। पार्टी की योजना प्रदेश से लेकर क्षेत्र, जिला, मंडल और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की है। प्रदेश टीम की घोषणा के बाद अब क्षेत्रीय टीमों और विभिन्न मोर्चों के गठन की प्रक्रिया को भी गति दी गई है। पार्टी के स्तर पर माना जा रहा है कि आने वाले करीब 10 दिनों में संगठन के लंबित काम को काफी हद तक पूरा कर लिया जाएगा।
दरअसल, भाजपा ने पूरे उत्तर प्रदेश को 98 संगठनात्मक जिलों में बांट रखा है। पार्टी की ओर से अलग-अलग चरणों में इन जिलों के जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई थी। कई जिलों में अध्यक्षों की घोषणा अपेक्षाकृत देर से हुई। अब इन जिलाध्यक्षों को अपनी टीम का इंतजार है। हाथरस, अंबेडकर नगर, देवरिया, चंदौली और गोरखपुर महानगर के अलावा वाराणसी जिला और संतकबीर नगर जैसे संगठनात्मक जिलों में भी टीम गठन की प्रक्रिया चर्चा में है।
भाजपा का संगठनात्मक ढांचा काफी व्यवस्थित माना जाता है। पार्टी की योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रदेश स्तर से क्षेत्र, क्षेत्र से जिला, फिर मंडल और बूथ स्तर तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में किसी जिले में पूरी टीम का गठन नहीं होने से स्थानीय स्तर पर अभियान चलाने में मुश्किलें आती हैं। चुनावी तैयारियों के लिहाज से यह स्थिति पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जमीनी गतिविधियों को अभी से तेज करने की जरूरत है।
उधर, जिला टीमों में जगह पाने के लिए पार्टी के भीतर सिफारिशों का दौर भी जारी है। सूत्रों के अनुसार, कई जनप्रतिनिधि अपने पसंदीदा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को नई जिला टीम में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। अलग-अलग स्तर से नामों की सिफारिशें आने के कारण भी अंतिम सूची तैयार करने में समय लग रहा है। हालांकि पार्टी के स्तर पर इन जिला इकाइयों को लेकर काफी हद तक होमवर्क पूरा किए जाने की बात कही जा रही है।
नई टीम में शामिल होने वाले पदाधिकारियों के चयन में संगठन के प्रति सक्रियता, क्षेत्र में पकड़ और पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है। भाजपा की कोशिश है कि आगामी चुनाव से पहले संगठन में ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी जाए, जो बूथ स्तर तक पार्टी के अभियान को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ा सकें।
पार्टी के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी अहम है क्योंकि विधानसभा चुनाव में बूथ प्रबंधन और स्थानीय संगठन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। पार्टी के अभियान, सदस्यता, जनसंपर्क और विभिन्न चुनावी कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए मजबूत जिला और मंडल टीम जरूरी होती है। यही वजह है कि लंबित टीमों के गठन को जल्द पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
मिशन-2027 के तहत भाजपा अपनी सांगठनिक इकाइयों को नीचे से ऊपर तक दुरुस्त करने में जुटी है। प्रदेश टीम के बाद क्षेत्रीय टीमों और मोर्चों का गठन किया जा रहा है। अब नजर उन जिलों पर है, जहां जिलाध्यक्ष घोषित होने के बावजूद टीम का इंतजार है। यदि आने वाले दिनों में इन टीमों की घोषणा हो जाती है तो पार्टी के स्थानीय अभियान और चुनावी तैयारियों को गति मिलने की उम्मीद है। फिलहाल जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों और संगठन के स्तर पर चल रही कवायद के बीच सभी की नजर नई जिला टीमों की घोषणा पर टिकी हुई है।
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