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यूपी में बारिश से बिजली की मांग में रिकॉर्ड गिरावट, 13699 मेगावाट तक पहुंची

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में पिछले तीन दिनों से हो रही झमाझम बारिश का असर अब बिजली की मांग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण प्रदेश में बिजली की मांग लगातार दूसरे दिन भी तेजी से नीचे गिर गई। बीते 24 घंटों में बिजली की मांग में करीब 7,500 मेगावाट की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, तीन दिन पहले की तुलना में प्रदेश की बिजली मांग में कुल 13,699 मेगावाट की गिरावट सामने आई है। इसे इस साल बिजली की मांग में दर्ज की गई सबसे बड़ी गिरावट बताया जा रहा है।
प्रदेश के अधिकांश जिलों में लगातार बारिश होने से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। पिछले तीन दिनों से कई इलाकों में झमाझम बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। इसका सीधा असर तापमान पर भी पड़ा है। तापमान में तेजी से गिरावट आने के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली है और बिजली की खपत भी कम हुई है।
बताया जा रहा है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय गहरे डिप्रेशन की वजह से उत्तर प्रदेश में मौसम में यह बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इसके प्रभाव से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पिछले तीन दिनों से भारी बारिश और तेज हवाओं का असर बना हुआ है। लगातार बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम में आए इस बदलाव ने बिजली की मांग को भी प्रभावित किया है।
बारिश से पहले प्रदेश में बिजली की मांग काफी अधिक बनी हुई थी। गर्मी और उमस के कारण घरों तथा अन्य स्थानों पर बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा हुआ था। लेकिन पिछले तीन दिनों में मौसम बदलने के बाद बिजली की खपत में अचानक कमी आ गई। बारिश के साथ तापमान गिरने से बिजली की मांग में भी लगातार गिरावट देखने को मिली।
बीते 24 घंटों के दौरान बिजली की मांग करीब 7,500 मेगावाट तक नीचे आ गई। यह गिरावट एक दिन में ही मांग में हुए बड़े बदलाव को दर्शाती है। इसके साथ ही तीन दिन पहले की स्थिति से तुलना करने पर कुल 13,699 मेगावाट की गिरावट दर्ज हुई है। इस साल अब तक बिजली की मांग में इतनी बड़ी गिरावट सामने नहीं आई थी।
मौसम में अचानक हुए बदलाव का असर प्रदेश के बिजली तंत्र पर भी दिखाई दे रहा है। जिन दिनों में तापमान अधिक था, उस दौरान बिजली की मांग बढ़ी हुई थी। बारिश और तेज हवाओं के कारण तापमान गिरने के बाद बिजली की खपत कम हो गई। यही वजह है कि लगातार दूसरे दिन भी बिजली की मांग में गिरावट का सिलसिला जारी रहा।
प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है। कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने से तापमान में तेजी से कमी आई है। मौसम में बदलाव के कारण लोगों की बिजली पर निर्भरता भी पहले की तुलना में कम हुई है। इसका सीधा असर बिजली की कुल मांग पर पड़ा है।
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय गहरे डिप्रेशन के कारण मौसम में आए बदलाव को बिजली की मांग में इस बड़ी गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है। बारिश और तेज हवाओं के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई। तापमान नीचे आने के बाद बिजली की खपत में कमी आई और प्रदेश की कुल मांग तेजी से गिर गई।
तीन दिनों में बिजली की मांग में आई 13,699 मेगावाट की गिरावट इस साल का महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे पहले बिजली की मांग में मौसम के कारण इतनी बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली थी। लगातार दूसरे दिन मांग में कमी आने से यह साफ है कि बारिश का असर बिजली की खपत पर लगातार बना हुआ है।
बारिश का असर केवल तापमान तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इससे बिजली की जरूरत भी कम हुई है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में मौसम सुहावना और ठंडा हुआ है। गर्मी कम होने के कारण बिजली की खपत में भी कमी आई है। यही कारण है कि बिजली की मांग में अचानक इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
मौसम में यह बदलाव बिजली की मांग के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। गर्मी के दिनों में तापमान बढ़ने के साथ बिजली की खपत बढ़ जाती है, लेकिन बारिश और ठंडी हवाओं के कारण स्थिति बदल गई है। पिछले तीन दिनों के आंकड़े इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं।
प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने के कारण आने वाले समय में भी बिजली की मांग पर इसका असर बना रह सकता है। हालांकि मांग में आगे कितना बदलाव होगा, यह मौसम की स्थिति और तापमान पर निर्भर करेगा। फिलहाल पिछले 24 घंटों में करीब 7,500 मेगावाट और तीन दिन पहले की तुलना में 13,699 मेगावाट की गिरावट दर्ज की गई है।
उत्तर प्रदेश में इस साल बिजली की मांग में दर्ज यह सबसे बड़ी गिरावट बताई जा रही है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय गहरे डिप्रेशन के प्रभाव से हुई बारिश, तेज हवाओं और तापमान में आई कमी ने प्रदेश की बिजली खपत को तेजी से नीचे ला दिया है। लगातार दूसरे दिन बिजली की मांग में गिरावट का सिलसिला जारी रहने से मौसम और बिजली की खपत के बीच सीधा असर एक बार फिर सामने आया है।





