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रूस में फंसे तीन छात्रों की वापसी की गुहार, राजनाथ सिंह से मिले परिजन; मदद का मिला भरोसा

शामली। रूस में फंसे शामली और मुजफ्फरनगर के तीन भारतीय युवकों की सुरक्षित वापसी के लिए उनके परिजनों की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसी क्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश राणा तीनों के परिजनों को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके आवास पर मिले। परिजनों ने रक्षा मंत्री के सामने पूरी स्थिति रखते हुए युवकों की सुरक्षित भारत वापसी के लिए केंद्र सरकार से मदद मांगी।
तीनों युवकों की पहचान शामली के आशु कुमार और मुजफ्फरनगर के हिमांशु शर्मा व शक्ति पुंडीर के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार तीनों पढ़ाई के लिए रूस गए थे और मॉस्को में रह रहे थे। जुलाई के बाद से उनका परिवार से संपर्क नहीं हो पाया है।
तीनों परिवार लंबे समय से अपने बच्चों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उनसे संपर्क नहीं होने के बाद परिजनों ने स्थानीय प्रशासन और केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद मामला लगातार प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर उठाया जा रहा है।
परिजनों की परेशानी को देखते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा ने मामले में पहल की। वह परिवार के सदस्यों को साथ लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पहुंचे और उनसे मुलाकात की। इस दौरान परिजनों ने रूस जाने से लेकर आखिरी बार हुई बातचीत तक की जानकारी रक्षा मंत्री के सामने रखी।
परिजनों ने बताया कि लंबे समय से तीनों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार लगातार फोन और दूसरे माध्यमों से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिलने के कारण उनकी चिंता बढ़ती जा रही है।
मुलाकात के दौरान सुरेश राणा और परिजनों ने रक्षा मंत्री से मामले में केंद्र सरकार के स्तर पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। उनकी प्रमुख मांग तीनों युवकों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने की है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आवश्यक सहायता का भरोसा दिया। सामने आई जानकारी के अनुसार इस संबंध में विदेश मंत्रालय और रूस स्थित भारतीय दूतावास के स्तर पर संपर्क और सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
परिजनों के अनुसार तीनों युवक अलग-अलग समय पर रूस पहुंचे थे, लेकिन वहां एक साथ रह रहे थे। आशु कुमार शामली जिले का रहने वाला है, जबकि हिमांशु शर्मा और शक्ति पुंडीर मुजफ्फरनगर जिले से हैं। परिवारों का कहना है कि तीनों स्टडी वीजा पर रूस गए थे।
परिजनों ने दावा किया है कि आखिरी बातचीत के दौरान युवकों ने अपने पासपोर्ट जब्त किए जाने और रूसी सेना में शामिल किए जाने की बात कही थी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं परिस्थितियों को लेकर परिवारों ने भारतीय अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
शामली निवासी आशु कुमार के मामले में स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। हाल में तहसीलदार ने उसके परिजनों से मुलाकात कर दस्तावेजों और पासपोर्ट से संबंधित जानकारी ली थी। जिला प्रशासन की ओर से मामले की रिपोर्ट शासन के माध्यम से विदेश मंत्रालय को भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
आशु के परिवार का कहना है कि 30 जुलाई के बाद उससे संपर्क नहीं हो पाया। लगातार फोन बंद मिलने के बाद परिवार की चिंता बढ़ी और उन्होंने प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से मदद मांगी।
इसी तरह मुजफ्फरनगर निवासी हिमांशु और शक्ति के परिवार भी लगातार अपने बच्चों की जानकारी हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। तीनों परिवार चाहते हैं कि भारतीय दूतावास रूस में उनके ठिकाने और मौजूदा स्थिति की पुष्टि करे और सुरक्षित वापसी की व्यवस्था कराए।
परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन्हें अपने बच्चों की वर्तमान स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। लंबे समय से संपर्क नहीं होने के कारण परिजन लगातार अलग-अलग स्तरों पर आवेदन और मुलाकात कर रहे हैं।
रक्षा मंत्री से हुई मुलाकात के बाद परिवारों में मदद मिलने की उम्मीद बढ़ी है। उन्हें भरोसा है कि केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास की पहल से जल्द तीनों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
सुरेश राणा ने परिजनों की ओर से मामला रक्षा मंत्री के सामने रखते हुए युवकों की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया। उन्होंने परिवारों को हरसंभव सहयोग दिलाने की पहल की है।
तीनों युवकों का मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी उनकी सुरक्षित वापसी की मांग तेज हुई है। परिवारों के परिचित और क्षेत्र के लोग भी केंद्र सरकार से जल्द कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
विदेश में किसी भारतीय नागरिक के फंसने की स्थिति में विदेश मंत्रालय और संबंधित देश में स्थित भारतीय दूतावास की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में नागरिक की पहचान, वीजा और पासपोर्ट की स्थिति के साथ स्थानीय अधिकारियों से संपर्क कर वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जाती है।
परिजनों को उम्मीद है कि रूस स्थित भारतीय दूतावास की मदद से तीनों युवकों के बारे में ठोस जानकारी जल्द सामने आएगी। इसके बाद उनकी सुरक्षित भारत वापसी का रास्ता तैयार हो सकेगा।
फिलहाल तीनों परिवार अपने बच्चों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। परिवारों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता केवल यही है कि तीनों सुरक्षित हों और जल्द से जल्द अपने घर लौटें।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद मामला एक बार फिर केंद्र सरकार के स्तर पर पहुंचा है। अब परिजनों की नजर विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर है।
तीनों युवकों से संपर्क स्थापित होने और उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे की तस्वीर साफ हो सकेगी। तब तक परिवारों की चिंता बनी हुई है और वे लगातार सरकारी स्तर पर मदद की कोशिश कर रहे हैं।





