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उत्तर प्रदेश
भाजपा छोड़ सपा में लौटे राम आसरे कुशवाहा पुरानी सियासी कहानी फिर चर्चा में
Ratna Netam
17 Sept 2026 5:05 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में दल बदल और पुराने नेताओं की वापसी का सिलसिला एक बार फिर चर्चा में है। वरिष्ठ नेता **राम आसरे कुशवाहा** के समाजवादी पार्टी (सपा) में लौटने के बाद उनके पुराने राजनीतिक सफर की भी चर्चा शुरू हो गई है। कभी समाजवादी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे कुशवाहा ने लंबे राजनीतिक अनुभव के बाद एक बार फिर सपा का रुख किया है।उनकी वापसी ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं। राम आसरे कुशवाहा का नाम सपा के पुराने नेताओं में लिया जाता रहा है और उनका राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है।
सपा के पुराने नेताओं में रही पहचान
राम आसरे कुशवाहा ने समाजवादी पार्टी के शुरुआती दौर में संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे और संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।समाजवादी राजनीति में उनकी पहचान पिछड़े वर्ग के प्रभावशाली नेताओं के तौर पर भी रही है। पार्टी संगठन में उनकी भूमिका को लेकर लंबे समय तक चर्चा होती रही।
महासचिव पद से हटाए जाने का मामला
राम आसरे कुशवाहा के राजनीतिक सफर में एक समय ऐसा भी आया जब तत्कालीन सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उन्हें पार्टी के महासचिव पद से हटा दिया था।इस घटनाक्रम को उस समय पार्टी के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देखा गया था। हालांकि किसी भी राजनीतिक संगठन में पदों में बदलाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है और इसके पीछे कई संगठनात्मक कारण हो सकते हैं।मुलायम सिंह यादव के दौर में सपा में कई बार संगठनात्मक बदलाव हुए और नेताओं की भूमिकाएं बदली गईं।
भाजपा में भी रहे सक्रिय
सपा से जुड़े रहने के बाद राम आसरे कुशवाहा ने बाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का रुख किया। भाजपा में रहते हुए उन्होंने पार्टी के साथ राजनीतिक गतिविधियों में भाग लिया।अब चुनावी माहौल के बीच उन्होंने भाजपा छोड़कर फिर से समाजवादी पार्टी में वापसी की है।
चुनाव से पहले नेताओं की वापसी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले नेताओं का दल बदलना कोई नई बात नहीं है। नेता अपने राजनीतिक भविष्य, संगठनात्मक भूमिका और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए अलग-अलग दलों में जाते रहे हैं।राजनीतिक दल भी चुनाव से पहले अपने संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने के लिए अनुभवी नेताओं को जोड़ने की कोशिश करते हैं।
सपा के लिए क्या मायने रखती है वापसी?
राम आसरे कुशवाहा की सपा में वापसी को पार्टी के सामाजिक समीकरणों के लिहाज से देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़ा वर्ग एक महत्वपूर्ण राजनीतिक समूह माना जाता है।अनुभवी नेताओं की मौजूदगी से किसी भी पार्टी को संगठन मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भाजपा से सपा तक का राजनीतिक सफर
राम आसरे कुशवाहा का राजनीतिक सफर कई दलों और अलग-अलग जिम्मेदारियों से होकर गुजरा है। भारतीय राजनीति में कई ऐसे उदाहरण रहे हैं, जहां नेता समय और परिस्थितियों के अनुसार राजनीतिक दल बदलते रहे हैं।उनकी सपा में वापसी ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में पुराने नेताओं की भूमिका और चुनावी रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी है।
आगे की भूमिका पर नजर
अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी में राम आसरे कुशवाहा को कौन-सी जिम्मेदारी दी जाती है और चुनावी अभियान में उनकी भूमिका क्या होगी।उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को पार्टी किस तरह इस्तेमाल करती है, इस पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।
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