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नई दिल्ली। उत्तर भारत में लंबे समय से चली आ रही जल संकट की समस्या को दूर करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश ने ‘किशाऊ मल्टी-पर्पस प्रोजेक्ट’ (किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना) को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस परियोजना को देश की सबसे बड़ी नदी जल बंटवारा योजनाओं में से एक माना जा रहा है। इसका उद्देश्य छह राज्यों की पेयजल, सिंचाई और बिजली जरूरतों को पूरा करना है।
टोंस नदी पर बनेगी परियोजना
▪️In the presence of Union Ministers @AmitShah and @CRPaatil, Chief Ministers of Uttar Pradesh @myogiadityanath, Uttarakhand @pushkardhami, Himachal Pradesh @SukhuSukhvinder, Rajasthan @BhajanlalBjp, Delhi @gupta_rekha, and Haryana @NayabSainiBJP signed the Kishau Project… pic.twitter.com/3R05jTNjq6
— PIB India (@PIB_India) September 15, 2026
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का निर्माण टोंस नदी पर किया जाएगा। यह नदी उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा से होकर बहती है।
परियोजना के तहत बांध और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा, जिससे पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।
सरकार का उद्देश्य जल संसाधनों का उपयोग कर विभिन्न राज्यों की जरूरतों को पूरा करना है।
दिल्ली को मिलेगा पेयजल
इस परियोजना से सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत राजधानी दिल्ली को हर साल करीब 617 मिलियन क्यूबिक मीटर पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
दिल्ली में बढ़ती आबादी और पानी की मांग को देखते हुए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके जरिए राजधानी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
लगभग एक लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई
किशाऊ परियोजना से हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की कृषि भूमि को भी लाभ मिलेगा।
परियोजना के माध्यम से करीब 97 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इससे किसानों को पानी की बेहतर उपलब्धता मिलेगी और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
660 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य
जल संसाधन के उपयोग के साथ-साथ यह परियोजना बिजली उत्पादन में भी योगदान देगी।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से करीब 660 मेगावाट बिजली उत्पादन की योजना है।
इससे संबंधित राज्यों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।
यमुना नदी के पुनर्जीवन में मदद
परियोजना को यमुना नदी के पुनर्जीवन से भी जोड़ा जा रहा है।
सरकार का मानना है कि बेहतर जल प्रबंधन और नदी प्रवाह में सुधार से यमुना की स्थिति को सुधारने में सहायता मिल सकती है।
प्रदूषण और घटते जल प्रवाह की समस्या से जूझ रही यमुना के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
छह राज्यों के बीच हुआ समझौता
इस परियोजना को लेकर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच सहमति बनी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुए समझौते को राज्यों के बीच जल संसाधन सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।
जल विवाद समाधान की दिशा में पहल
भारत में नदी जल बंटवारे को लेकर कई राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद रहे हैं।
किशाऊ परियोजना के लिए छह राज्यों के बीच सहमति बनने को जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में अहम पहल माना जा रहा है।
इससे राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है।
किसानों और आम लोगों को लाभ
परियोजना पूरी होने के बाद किसानों को सिंचाई के लिए अधिक पानी उपलब्ध हो सकेगा।
वहीं, शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी बहुउद्देशीय परियोजनाएं जल, ऊर्जा और कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
आगे की प्रक्रिया
समझौते के बाद अब परियोजना से जुड़े तकनीकी, वित्तीय और निर्माण संबंधी कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को पूरा करने के लिए संबंधित राज्य और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर काम करेंगी।
सरकार का लक्ष्य है कि इस परियोजना के माध्यम से उत्तर भारत में जल उपलब्धता और ऊर्जा जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।





