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Prayagraj प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने से जुड़े राज्य सरकार के 25 मई के अध्यादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 अगस्त की तारीख तय की है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के विधि छात्रों युधिष्ठिर वर्मा और आयुष पांडेय द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार के 25 मई के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि यह आदेश एक्ट संख्या 6 (वर्ष 2017) की धारा 12(3) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर जारी किया गया है। उनका तर्क है कि सरकार द्वारा इस शक्ति का उपयोग संविधान के अनुच्छेद 243(आई)(ई) के प्रावधानों के विपरीत है, इसलिए यह आदेश असंवैधानिक है।
याचिका में कहा गया है कि इस अध्यादेश के माध्यम से वर्तमान ग्राम प्रधानों को आगामी छह माह के लिए प्रशासक के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है। इसके चलते ग्राम पंचायत चुनावों को स्थगित किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में मामले की विस्तृत जांच की जाएगी।इस मामले को ग्रामीण शासन व्यवस्था और पंचायत चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दा माना जा रहा है, जिस पर अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।





