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हिसाब मांग रही जनता: पिछड़ों और दलितों के साथ पुराने कार्यकाल में हुए व्यवहार पर घेरा।

मेरठ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। राज्य में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने समाजवादी पार्टी (सपा) के सबसे बड़े और बहुचर्चित चुनावी फॉर्मूले 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। भाजपा के नवनियुक्त ओबीसी (OBC) और अनुसूचित जाति (SC) मोर्चे के प्रदेश अध्यक्षों ने मेरठ में आयोजित एक संगठनात्मक बैठक के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव को खुली चुनौती दी है। भाजपा नेताओं ने सपा के पीडीए नारे को महज एक राजनीतिक छलावा और जनता को गुमराह करने के लिए बदनाम हो चुकी पार्टी की एक नई ब्रांडिंग करार दिया है।
रणनीतिक बैठक को संबोधित करते हुए भाजपा नेताओं ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव आज पिछड़ों और दलितों के हक की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पहले उत्तर प्रदेश की जनता को यह हिसाब देना चाहिए कि सपा के अपने चार अलग-अलग कार्यकालों के दौरान उनकी सरकार ने इन वर्गों के साथ कैसा व्यवहार किया था। भाजपा ने आरोप लगाया कि सपा का इतिहास हमेशा से पिछड़ों और दलितों के हक को मारने और उनका शोषण करने का रहा है।
सपा के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को जनता के सामने रखते हुए भाजपा नेताओं ने साल 2012 का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि 2012 में जब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी, तब उनकी पहली कैबिनेट में पिछड़ों के नाम पर केवल एक विशेष वर्ग (यादवों) को ही तरजीह दी गई थी। उस समय अन्य अत्यंत पिछड़े और पिछड़े समाज के लोग जैसे जाट, गुर्जर, पाल, सैनी, कश्यप, प्रजापति और मौर्य समाज के नेताओं को कैबिनेट में कोई तवज्जो या जगह नहीं दी गई थी। भाजपा के अनुसार, सपा के शासनकाल में केवल एक जाति विशेष का विकास हुआ और बाकी के पिछड़े वर्ग हाशिए पर धकेल दिए गए।
इसके अलावा, भाजपा ने नौकरियों में धांधली और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए सपा को घेरा। नेताओं ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान जब भी सरकारी नौकरियों की भर्तियां निकलती थीं, तब योग्यता को दरकिनार कर केवल सैफई कुनबे और एक खास वर्ग के युवाओं को ही नौकरियां बांटी जाती थीं, जिससे दलित और अन्य पिछड़े वर्ग के मेधावी छात्रों का हक मारा जाता था। साथ ही, सपा पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मान्यवर कांशीराम जैसे दलित समाज के महान महापुरुषों के अपमान और उनके नाम पर बनी योजनाओं व जिलों के नाम बदलने का भी गंभीर आरोप लगाया गया।
इस संगठनात्मक बैठक के दौरान पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल और अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक रावत का फूल-मालाओं और स्मृति चिह्न देकर भव्य स्वागत किया। मंच से दोनों मोर्चा अध्यक्षों ने कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंकते हुए दावा किया कि दलित और पिछड़ा वर्ग अब सपा के बहकावे में आने वाला नहीं है। उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही उनका वास्तविक विकास और सम्मान सुरक्षित है।
बैठक के अंत में भाजपा नेताओं ने हुंकार भरते हुए दावा किया कि इस बार विपक्ष के सारे जातिवादी और झूठे नारे पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएंगे। भाजपा का ओबीसी और अनुसूचित जाति मोर्चा मिलकर जमीनी स्तर पर जाकर सपा के इन काले कारनामों को जनता के बीच उजागर करेगा। नेताओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा सर्वसमाज के समर्थन के साथ एक बार फिर प्रचंड बहुमत की सरकार बनाने जा रही है, और विपक्ष का 'पीडीए' का गुब्बारा पूरी तरह फुस्स हो जाएगा।





