मध्य प्रदेश

औद्योगिक उपयोग के लिए मिले राशन का गलत इस्तेमाल होने का शक

Saba Naaz
12 July 2026 5:40 PM IST
औद्योगिक उपयोग के लिए मिले राशन का गलत इस्तेमाल होने का शक
x

जबलपुर। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित किए गए सरकारी चावल की हेराफेरी का एक बेहद गंभीर और बड़ा मामला सामने आया है। इस बड़े गड़बड़झाले का खुलासा होने के बाद जिला प्रशासन और भारतीय खाद्य निगम (FCI) दोनों पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गए हैं और जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है। बालाघाट के कलेक्टर मृणाल मीणा ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए एफसीआई भोपाल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक को एक आधिकारिक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने भी अपनी एथेनॉल नीति में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोका जा सके।

कलेक्टर मृणाल मीणा द्वारा लिखे गए पत्र में यह साफ कहा गया है कि एथेनॉल नीति के तहत सिर्फ संदिग्ध मिलों या प्लांटों की ही नहीं, बल्कि एफसीआई के अन्य सभी संबंधित गोदामों से जारी किए गए चावल का भी व्यापक स्तर पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज चावल की मात्रा और गोदामों में वास्तव में उपलब्ध स्टॉक में कोई विसंगति तो नहीं है। इस पत्र के सामने आने के बाद से उन राइस मिलर्स और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है, जो इस पूरे खेल में शामिल थे।

इस बड़े खुलासे के बाद भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने भी अपने स्तर पर आंतरिक जांच को काफी तेज कर दिया है। एफसीआई के उच्च अधिकारियों ने पिछले दो वर्षों के दौरान एथेनॉल प्लांटों को आवंटित किए गए चावल के तमाम रिकॉर्ड और दस्तावेजों की स्क्रूटनी (जांच-पड़ताल) शुरू कर दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छिंदवाड़ा के बारेगांव स्थित एवीजे एग्रीको प्राइवेट लिमिटेड (AVJ Agrico Pvt. Ltd.) के एथेनॉल प्लांट और वारासिवनी की संचेती राइस मिल (Sancheti Rice Mill) के साथ होने वाले सभी व्यावसायिक लेन-देन और चावल के आवंटन पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी है। जब तक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक इन दोनों फर्मों को किसी भी प्रकार का सरकारी राशन जारी नहीं किया जाएगा।

जांच टीमों का मुख्य ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि औद्योगिक उपयोग और एथेनॉल उत्पादन के नाम पर जो सस्ता सरकारी चावल एफसीआई के गोदामों से जारी किया गया था, उसे वास्तव में प्लांट तक पहुँचाया गया या फिर उसे खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर काली कमाई की गई। शुरुआती जांच में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि परिवहन के दौरान ही राशन के ट्रकों को गायब किया गया या फिर कागजों में हेरफेर कर चावल को ठिकाने लगाया गया।

इस बीच, कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन भी इस मामले में सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। पुलिस विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जांच में अब तक कई अहम सुराग और संदिग्ध दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिसके आधार पर पुलिस विभाग इस पूरे घोटाले से जुड़े 13 मुख्य संदिग्धों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इन संदिग्धों में कुछ राइस मिलर्स, परिवहनकर्ता (Transporters) और कुछ विभागीय कर्मचारियों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है, जिनकी मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर हेराफेरी संभव नहीं थी।

राज्य सरकार भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है और एथेनॉल नीति में बदलाव कर यह संदेश दे दिया है कि भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, बालाघाट प्रशासन और एफसीआई की संयुक्त टीमें रिकॉर्ड को खंगालने में जुटी हुई हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में जांच की आंच कुछ बड़े सफेदपोशों और रसूखदार अधिकारियों तक भी पहुँच सकती है। जिला प्रशासन का कहना है कि जैसे ही भौतिक सत्यापन और वित्तीय ऑडिट (Financial Audit) की रिपोर्ट सामने आएगी, दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

Next Story