उत्तर प्रदेश

तीन बच्चों की मौत से गुस्सा, नगर पालिका पर लापरवाही का आरोप लगाकर प्रदर्शन

Ratna Netam
3 Aug 2026 3:17 PM IST
तीन बच्चों की मौत से गुस्सा, नगर पालिका पर लापरवाही का आरोप लगाकर प्रदर्शन
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उत्तर प्रदेश : महराजगंज जिले के सिसवा नगर क्षेत्र में निर्माणाधीन अमृत सरोवर में डूबने से तीन किशोरों की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। रविवार को हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद सोमवार सुबह मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने जिम्मेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अंतिम संस्कार रोक दिया। लोगों ने शवों को घर के दरवाजे पर रखकर प्रदर्शन किया और मांग की कि हादसे के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

मामला सिसवा नगर पालिका क्षेत्र के मीराबाई नगर का है, जहां करोड़ों रुपये की लागत से अमृत सरोवर का निर्माण कार्य चल रहा था। आरोप है कि निर्माणाधीन सरोवर में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। इसी लापरवाही के कारण तीन किशोरों की जान चली गई। हादसे के बाद लोगों में नगर पालिका प्रशासन और निर्माण कार्य से जुड़े जिम्मेदारों के खिलाफ भारी नाराजगी देखने को मिली।

मृतकों के परिजनों का आरोप था कि केवल कार्यदायी संस्था दीपक कंस्ट्रक्शन के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ), जेई और चेयरमैन समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने की मांग की। परिजनों का कहना था कि यदि निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था होती तो तीन परिवारों के चिराग नहीं बुझते।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। कोठीभार थाना प्रभारी अखिलेश कुमार वर्मा, तहसीलदार अमित कुमार सिंह समेत कई अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बताया कि कार्यदायी संस्था के खिलाफ पहले ही मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। साथ ही जांच के दौरान यदि किसी अन्य अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके नाम भी मुकदमे में शामिल किए जाएंगे।

प्रशासन ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि निर्माणाधीन अमृत सरोवर की गुणवत्ता और निर्माण कार्य की जांच पहले से चल रही है। जिलाधिकारी भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं।

काफी देर तक चली बातचीत और अधिकारियों के आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। इसके बाद भारी पुलिस सुरक्षा के बीच तीनों किशोरों का अंतिम संस्कार किया गया। खेखड़ा घाट पर एक साथ तीन चिताएं जलने का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई थानों की पुलिस और पीएसी बल भी तैनात किया गया था।

बताया जा रहा है कि रविवार दोपहर करीब एक बजे मीराबाई नगर के पोखरा टोला निवासी चार किशोर अमृत सरोवर में नहाने गए थे। इनमें राजवीर (13), नीतीश यादव (12), रोहन (13) और कृष्णा रौनियार (15) शामिल थे। नहाने के दौरान रोहन, नीतीश और कृष्णा गहरे पानी और दलदल में फंस गए और डूबने लगे। राजवीर किसी तरह बाहर निकल आया और उसने रस्सी के सहारे अपने दोस्तों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो सका।

इसके बाद राजवीर ने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया, लेकिन जब तक लोग मौके पर पहुंचे तब तक काफी देर हो चुकी थी। ग्रामीणों ने तीनों किशोरों को बाहर निकाला, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। मृतकों में नीतीश कक्षा 6, रोहन कक्षा 7 और कृष्णा कक्षा 9 के छात्र थे।

इस हादसे ने तीन परिवारों को गहरा सदमा दिया है। कृष्णा और रोहन अपने-अपने परिवारों के इकलौते बेटे थे। कृष्णा के पिता सब्जी का व्यवसाय करते हैं, जबकि रोहन के पिता मेडिकल स्टोर पर काम करते हैं। वहीं नीतीश के पिता खेती-किसानी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मांग की है कि निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निर्माणाधीन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य की जानी चाहिए। प्रशासन के आश्वासन के बाद भले ही अंतिम संस्कार हो गया, लेकिन लोगों में अब भी जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नाराजगी बनी हुई है।

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