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कोर्ट की राहत के बाद जौहर यूनिवर्सिटी में आंदोलन समाप्त

रामपुर : समाजवादी पार्टी नेता आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में भवन ध्वस्तीकरण के विरोध में चल रहा छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना दसवें दिन समाप्त हो गया। मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट से मिली अंतरिम राहत के बाद सोमवार देर रात छात्रों ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया और धरना स्थल पर लगाया गया पंडाल व अन्य सामान हटाकर अपने-अपने घरों की ओर रवाना हो गए। हालांकि छात्रों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय के भवनों को गिराने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई तो वे फिर से आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। सोमवार को आंदोलन का दसवां दिन था। पूरे दिन छात्र अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे रहे। इसी बीच शाम को मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए अग्रिम आदेश तक विश्वविद्यालय के भवनों को ध्वस्त करने पर रोक लगा दी।
कोर्ट के इस आदेश के बाद छात्रों में राहत की भावना नजर आई। देर रात करीब 11 बजे छात्रों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की। इसके बाद रात लगभग 12 बजे धरना स्थल से पंडाल, कुर्सियां और अन्य सामान हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। छात्र शांतिपूर्ण तरीके से वहां से चले गए। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जौहर विश्वविद्यालय की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरियर लगा दिए हैं।
मामले की अगली सुनवाई अब तीन अगस्त को होगी। कोर्ट के अगले आदेश तक विश्वविद्यालय के भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी। छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट के अंतरिम आदेश का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही भविष्य की कार्रवाई को लेकर अपनी चिंता भी जाहिर की है।
मंगलवार को जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा अपनी टीम के साथ रामपुर पहुंचीं। उन्होंने सबसे पहले मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का दौरा किया और वहां विश्वविद्यालय प्रबंधन, छात्रों तथा अभिभावकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छात्रों की समस्याओं और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
अदिति मिश्रा ने कहा कि कोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद छात्रों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन इसके बावजूद विश्वविद्यालय परिसर, गेट और एडमिशन सेल के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल और पुलिस वाहन तैनात हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी से बाहर से आने वाले छात्रों और अन्य विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों में डर का माहौल बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जेएनयू, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के छात्र भी जौहर विश्वविद्यालय के छात्रों के समर्थन में पहुंच रहे थे। अदिति मिश्रा ने आरोप लगाया कि पुलिस की तैनाती का उद्देश्य ऐसे छात्रों को रोकना और आंदोलन से दूर रखना है।
कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए अदिति मिश्रा ने कहा कि अंतरिम राहत मिलना छात्रों की आवाज सुने जाने का संकेत है। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन सरकार के पिछले रवैये को देखते हुए छात्रों को पूरी तरह आश्वस्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय या छात्रों के खिलाफ कोई दमनात्मक कार्रवाई की गई तो देशभर के छात्र एकजुट होकर विरोध करेंगे।
वहीं छात्रों ने भी कहा कि उनका आंदोलन किसी विवाद को बढ़ाने के लिए नहीं था, बल्कि अपने शैक्षणिक संस्थान और भविष्य को बचाने के लिए था। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने वाले हजारों विद्यार्थियों का भविष्य इससे जुड़ा हुआ है।
अब सभी की नजर तीन अगस्त को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है। कोर्ट के अगले आदेश के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल दस दिन से चल रहा धरना समाप्त हो चुका है और विश्वविद्यालय परिसर में सामान्य गतिविधियां बहाल होने की उम्मीद है।





