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उत्तर प्रदेश
UP के इस जिले में बढ़ी प्रॉपर्टी की कीमतें रजिस्ट्री पर पड़ेगा असर
Ratna Netam
5 Sept 2026 8:25 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जमीन, मकान और प्लॉट खरीदने वालों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्य के एक जिले में नए सर्किल रेट लागू होने के बाद अब जमीन और संपत्ति की खरीद-बिक्री महंगी हो गई है। प्रशासन ने लंबे समय बाद संपत्तियों के बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए सर्किल रेट में संशोधन किया है। नई दरों के लागू होने से रजिस्ट्री कराने वालों को पहले की तुलना में ज्यादा स्टांप शुल्क और अन्य खर्च उठाना पड़ेगा।
नए सर्किल रेट में कई इलाकों में जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। कुछ क्षेत्रों में यह वृद्धि करीब **12 प्रतिशत तक** पहुंच गई है। प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव क्षेत्र में तेजी से बढ़ती जमीन की मांग, विकास कार्यों और मौजूदा बाजार दरों को ध्यान में रखकर किया गया है।
क्या होता है सर्किल रेट?
सर्किल रेट वह न्यूनतम सरकारी दर होती है, जिसके आधार पर किसी संपत्ति की रजिस्ट्री की जाती है।
जब कोई व्यक्ति जमीन, मकान या प्लॉट खरीदता है तो उसकी रजिस्ट्री के लिए स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क का निर्धारण सर्किल रेट के आधार पर किया जाता है।
अगर सर्किल रेट बढ़ जाता है तो संपत्ति की सरकारी कीमत बढ़ जाती है और इसका सीधा असर खरीददार के खर्च पर पड़ता है।
हालांकि कई बार वास्तविक बाजार कीमत और सरकारी सर्किल रेट में अंतर होता है।
जिले में क्यों बढ़ाई गई दरें?
प्रशासन के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कई क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में तेजी से बदलाव आया है। नए आवासीय प्रोजेक्ट, सड़क निर्माण, औद्योगिक गतिविधियों और शहरी विस्तार के कारण जमीन की मांग बढ़ी है।
इसी को देखते हुए प्रशासन ने पुराने सर्किल रेट की समीक्षा की और नई दरें तय कीं।
अधिकारियों का कहना है कि संशोधित दरें वास्तविक बाजार स्थिति के करीब लाने का प्रयास हैं।
किन संपत्तियों पर पड़ेगा असर?
नई सर्किल रेट व्यवस्था का असर कई तरह की संपत्तियों पर पड़ेगा।
खेत की जमीन
खेती की जमीन खरीदने वालों को अब अधिक खर्च करना पड़ सकता है। खासकर उन इलाकों में जहां तेजी से शहरीकरण हो रहा है और कृषि भूमि का उपयोग भविष्य में आवासीय या व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
मकान और फ्लैट
आवासीय क्षेत्रों में मकान और फ्लैट खरीदने वालों को भी नई दरों के कारण अधिक स्टांप शुल्क देना पड़ सकता है।
प्लॉट
प्लॉट खरीदने वाले लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा क्योंकि जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने से रजिस्ट्री का खर्च भी बढ़ जाएगा।
12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का असर
जिन इलाकों में सर्किल रेट में 12 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है, वहां संपत्ति खरीदने वालों का बजट प्रभावित हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी जमीन की सरकारी कीमत पहले 50 लाख रुपये थी और उसमें 12 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो नई सरकारी कीमत करीब 56 लाख रुपये हो जाएगी।
इस बढ़ी हुई कीमत के आधार पर स्टांप शुल्क और रजिस्ट्री से जुड़े खर्च भी बढ़ सकते हैं।
प्रॉपर्टी बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
सर्किल रेट बढ़ने से प्रॉपर्टी बाजार पर मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है।
एक तरफ इससे सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी, क्योंकि स्टांप शुल्क अधिक मिलेगा।
वहीं दूसरी ओर कुछ खरीदारों के लिए संपत्ति खरीदना महंगा हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन इलाकों में मांग ज्यादा है, वहां कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन कम मांग वाले क्षेत्रों में खरीदारों की संख्या प्रभावित हो सकती है।
रियल एस्टेट कारोबारियों की प्रतिक्रिया
रियल एस्टेट से जुड़े लोगों का कहना है कि सर्किल रेट बढ़ाने से बाजार की वास्तविक स्थिति को दर्शाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि उनका यह भी कहना है कि दरों में बहुत ज्यादा वृद्धि होने पर मध्यम वर्ग के खरीदारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
डेवलपर्स और प्रॉपर्टी कारोबारियों के अनुसार जमीन की लागत बढ़ने से भविष्य में निर्माण लागत पर भी असर पड़ सकता है।
घर खरीदने वालों को क्या करना चाहिए?
अगर कोई व्यक्ति जल्द ही जमीन या मकान खरीदने की योजना बना रहा है तो उसे नई दरों के हिसाब से अपना बजट तैयार करना चाहिए।
खरीदारी से पहले इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है—
* संपत्ति का सरकारी मूल्य जरूर जांचें
* रजिस्ट्री खर्च का अनुमान पहले लगाएं
* जमीन के दस्तावेजों की जांच करें
* बाजार कीमत और सर्किल रेट की तुलना करें
* जल्दबाजी में फैसला लेने से बचें
सर्किल रेट बढ़ने से सरकार को फायदा
सर्किल रेट में संशोधन का एक उद्देश्य सरकारी राजस्व बढ़ाना भी होता है।
जब संपत्ति की सरकारी कीमत बढ़ती है तो स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क से मिलने वाली आय में वृद्धि होती है।
इसके अलावा इससे संपत्तियों के मूल्यांकन में पारदर्शिता लाने में भी मदद मिलती है।
ग्रामीण इलाकों में भी असर
सर्किल रेट बढ़ोतरी का असर केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में जहां जमीन की मांग बढ़ रही है, वहां कृषि भूमि के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं।
खासकर हाईवे, औद्योगिक क्षेत्रों और शहरों के आसपास के गांवों में जमीन की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है।
युवाओं और निवेशकों पर प्रभाव
आज के समय में बड़ी संख्या में युवा जमीन और प्लॉट को निवेश के विकल्प के रूप में देखते हैं।
ऐसे में सर्किल रेट बढ़ने से निवेश की शुरुआती लागत बढ़ सकती है।
हालांकि लंबे समय में अच्छी लोकेशन वाली संपत्ति में निवेश को अब भी सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
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