- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- गो आधारित कारोबार को...
उत्तर प्रदेश
गो आधारित कारोबार को बढ़ावा, 75 जिलों तक पहुंचेंगे पंचगव्य आउटलेट
nidhi
13 Oct 2026 11:04 AM IST

x
गोबर-गोमूत्र उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में गो आधारित उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए सभी 75 जिलों में पंचगव्य आउटलेट खोलने की योजना तैयार की गई है। इन केंद्रों के माध्यम से दूध, दही और घी के साथ गोबर तथा गोमूत्र से तैयार उत्पादों को भी बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का उद्देश्य गोपालकों, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को अपने उत्पाद बेचने का नया माध्यम देना है। इससे गोवंश आधारित कारोबार में विभिन्न उत्पादों को शामिल करने की तैयारी है।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि आउटलेट पर अलग-अलग श्रेणियों के गो आधारित उत्पाद उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें पूजा-पाठ की सामग्री, घरेलू इस्तेमाल की वस्तुएं और पंचगव्य आधारित दैनिक जरूरत के उत्पाद शामिल होंगे। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में तैयार होने वाली वस्तुओं को इन बिक्री केंद्रों से जोड़ने की योजना है। इसके जरिए स्थानीय निर्माताओं को अपने उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाने का माध्यम मिलेगा। हिन्दुस्थान समाचार
पूजा सामग्री की श्रेणी में गोबर के उपले, हवन कप, धूपबत्ती, अगरबत्ती और दीये रखे जाएंगे। इसके अलावा गोबर से तैयार हवन सामग्री भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है। योजना में इन वस्तुओं के निर्माण और बिक्री दोनों को शामिल किया गया है। आयोग के अनुसार, गो आधारित कच्चे माल से तैयार उत्पादों को अलग-अलग श्रेणियों में रखकर ग्राहकों तक पहुंचाया जाएगा।
घरेलू उपयोग की वस्तुओं में गोबर से बने गमले, सजावटी सामान और हस्तशिल्प शामिल होंगे। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल गो आधारित वस्तुओं के निर्माण को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। आउटलेट पर केवल डेयरी उत्पादों की बिक्री तक व्यवस्था सीमित नहीं रहेगी। गोबर और गोमूत्र से तैयार विभिन्न वस्तुओं को भी जगह मिलेगी। इससे पशुपालन के साथ जुड़े अन्य उत्पादों के व्यावसायिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। हिन्दुस्थान समाचार
कृषि उपयोग के लिए गोबर से बनी जैविक खाद को भी योजना में शामिल किया गया है। इस प्रकार बिक्री केंद्रों पर डेयरी उत्पाद, पूजा सामग्री, घरेलू वस्तुएं और खेती में उपयोग होने वाले उत्पाद उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकार की योजना गोवंश से प्राप्त संसाधनों के विविध इस्तेमाल को बाजार से जोड़ने की है। दूध उत्पादन के साथ अन्य उपयोगी वस्तुओं के निर्माण और विपणन के लिए भी व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इस कारोबार में गोपालकों और किसानों के साथ स्थानीय उद्यमियों की भागीदारी का भी लक्ष्य है। किसान तथा गोपालक दूध और गोबर जैसी सामग्री उपलब्ध कराएंगे। वहीं, स्थानीय उत्पाद निर्माता इन संसाधनों से वस्तुएं तैयार करने, उनकी पैकेजिंग और बिक्री के काम से जुड़ सकेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के स्वयं सहायता समूहों और छोटे निर्माताओं के लिए भी अवसर विकसित करने की बात कही गई है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से इन समूहों को अपने सामान की बिक्री का व्यवस्थित माध्यम मिल सकेगा।
Next Story





