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दिल्ली के असुरक्षित भवनों की जानकारी मिले जनता को, पार्षदों ने उठाई आवाज
nidhi
13 Oct 2026 10:58 AM IST

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मकान गिरने के हादसों के बीच सवाल
पूर्वी दिल्ली : दिल्ली में मकान गिरने की घटनाओं के बीच खतरनाक और जर्जर इमारतों की पहचान तथा उनकी सूची सार्वजनिक करने का मुद्दा उठ गया है। यमुनापार के पार्षदों ने मांग की है कि दिल्ली नगर निगम सर्वे में चिह्नित खतरनाक मकानों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराए। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों को पता होना चाहिए कि उनके क्षेत्र में कौन-सी इमारतें असुरक्षित घोषित की गई हैं। सीमापुरी में हाल में हुए भवन हादसे के बाद इस मांग ने जोर पकड़ा है।
पार्षद रीना माहेश्वरी ने सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि निगम जर्जर मकानों की पहचान के लिए सर्वे करता है तो उसकी सूची सार्वजनिक करने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए। पार्षद नीता बिष्ट ने भी खतरनाक भवनों की पहचान और समय रहते कार्रवाई का मुद्दा उठाया। निगम के उत्तर पूर्वी जोन के चेयरमैन पंकज लूथरा ने ऐसी व्यवस्था कराने की बात कही है, जिससे सर्वे रिपोर्ट सभी पार्षदों को उपलब्ध हो सके। हालांकि, सूची वेबसाइट पर अपलोड करने की निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।
असुरक्षित भवनों की स्थिति को लेकर सितंबर में प्रकाशित एक जमीनी रिपोर्ट में भी जानकारी सार्वजनिक नहीं होने का उल्लेख किया गया था। उस रिपोर्ट के मुताबिक, निगम ने इस वर्ष मानसून से पहले लगभग 30.7 लाख इमारतों का सर्वे किया और 62 को खतरनाक घोषित किया। इनमें सबसे अधिक इमारतें करोल बाग क्षेत्र में थीं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि खतरनाक घोषित किए गए भवनों की सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी।
इसी रिपोर्ट में जंगपुरा स्थित निगम की एक पॉलीक्लिनिक का उदाहरण दिया गया। भवन को पहले असुरक्षित घोषित किए जाने के बावजूद वहां स्वास्थ्य सेवाएं चल रही थीं। करोल बाग के गफ्फार मार्केट में भी संरचनात्मक सुरक्षा पर सवाल वाली इमारत में कारोबारी गतिविधियां जारी होने की जानकारी सामने आई। ये उदाहरण बताते हैं कि खतरनाक घोषित करने और भवन का इस्तेमाल बंद कराने के बीच अंतर बना रह सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ असुरक्षित इमारतों में लोग काम करने के साथ रह भी रहे थे।
सत्य निकेतन में भवन गिरने की घटना के बाद निगम ने सभी 12 जोन में असुरक्षित और जर्जर इमारतों का समयबद्ध सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। दस सितंबर को स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अधिक जोखिम वाले भवनों को प्राथमिकता देने को कहा गया। पुराने बाजारों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों और सड़कों तथा सार्वजनिक स्थानों के पास स्थित इमारतों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश थे।
अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी। इसमें सर्वे किए गए भवनों, जारी नोटिस, सील की गई संपत्तियों, ध्वस्तीकरण और लंबित मामलों की जानकारी शामिल होनी थी। बैठक में पहले से असुरक्षित घोषित भवनों को नियमों के अनुसार खाली कराने, सील करने या गिराने पर जोर दिया गया। निर्देशों में केवल आंकड़े जुटाने के बजाय संभावित दुर्घटनाओं को समय रहते रोकने की बात कही गई थी।
इस बीच, निगम की कार्रवाई के आंकड़े भी सामने आए हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार, छह सितंबर से दस अक्टूबर के बीच राजधानी में 1,046 संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इनमें 282 संपत्तियां सील की गईं और 47 खतरनाक इमारतें गिराई गईं। अभियान निगम के सभी 12 जोन में चलाया गया। सत्य निकेतन हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अवैध निर्माण और असुरक्षित भवनों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
सरकार के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य भवन नियमों का पालन सुनिश्चित करना और संरचनात्मक खतरे वाली संपत्तियों पर कार्रवाई करना है। सीमापुरी में भी एक असुरक्षित भवन गिराया गया, जबकि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड ने तीन अन्य मकानों को नोटिस जारी किए। अब पार्षदों की मांग है कि सर्वे से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि क्षेत्र की खतरनाक इमारतों की स्थिति जनता और जनप्रतिनिधियों के सामने स्पष्ट रहे।
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