उत्तर प्रदेश

UP चुनाव से पहले BJP में बड़े बदलाव की तैयारी, 100 से ज्यादा विधायकों के टिकट पर संकट

Kavita2
3 Oct 2026 11:45 AM IST
UP चुनाव से पहले BJP में बड़े बदलाव की तैयारी, 100 से ज्यादा विधायकों के टिकट पर संकट
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों को लेकर जमीनी स्तर पर आकलन तेज कर दिया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी के आंतरिक आकलन में 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी रुझान और संगठन से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में इनमें से बड़ी संख्या में विधायकों को दोबारा टिकट नहीं मिलने की संभावना पर पार्टी के भीतर विचार किया जा रहा है। हालांकि उम्मीदवारों की अंतिम सूची अभी तय नहीं हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश विधानसभा में BJP के कब्जे वाली 255 सीटों पर पार्टी ने जमीनी स्तर से फीडबैक जुटाया है। इस आकलन में विधायकों की जनता के बीच स्वीकार्यता, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और क्षेत्र में उनके प्रदर्शन जैसे पहलुओं को देखा जा रहा है। करीब 100 विधायकों के बारे में मिले फीडबैक ने पार्टी नेतृत्व का ध्यान खींचा है।

इस बार टिकट वितरण में सबसे महत्वपूर्ण पैमाना उम्मीदवार की जीत की संभावना यानी ‘विनेबिलिटी’ को माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार किसी नेता की वरिष्ठता, राजनीतिक कद या वह कितनी बार चुनाव जीत चुका है, इन बातों के मुकाबले जमीनी सर्वे और मतदाताओं के बीच उसकी स्थिति को ज्यादा महत्व दिया जा सकता है।

स्थानीय संगठन के साथ किसी विधायक का लगातार विवाद या तनाव भी उसके टिकट की दावेदारी को प्रभावित कर सकता है। आंतरिक आकलन में पार्टी पदाधिकारियों और विधायकों के बीच समन्वय की स्थिति को भी देखा जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी मौजूदा विधायकों की उम्मीदवारी को लेकर फीडबैक लिए जाने की खबर है।

BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबे समय से सरकार में रहने के कारण पैदा होने वाले स्थानीय असंतोष से निपटने की है। यही कारण है कि पार्टी उम्मीदवारों के चयन में बड़े बदलाव से पीछे नहीं हटना चाहती। जिन सीटों पर मौजूदा विधायक के खिलाफ ज्यादा नाराजगी सामने आएगी, वहां नए चेहरे को मौका दिए जाने पर विचार हो सकता है।

कुछ रिपोर्टों में संभावित बदलाव का आंकड़ा 100 से भी अधिक बताया गया है। सितंबर में सामने आई एक अन्य रिपोर्ट में करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर एंटी इनकंबेंसी के संकेत मिलने का दावा किया गया था। अलग-अलग आकलनों में संख्या अलग है, इसलिए अभी यह तय नहीं माना जा सकता कि वास्तव में कितने विधायकों का टिकट कटेगा। अंतिम फैसला उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

पार्टी की रणनीति में नए चेहरों के साथ युवाओं और महिलाओं को अधिक अवसर देने की संभावना भी बताई जा रही है। लंबे समय से चुनाव लड़ रहे विधायकों के प्रदर्शन की विशेष रूप से समीक्षा की जा सकती है। इसका उद्देश्य स्थानीय असंतोष को कम करने के साथ अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत उम्मीदवार उतारना बताया जा रहा है।

BJP के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव भी उम्मीदवार चयन की रणनीति में महत्वपूर्ण संदर्भ बना हुआ है। उत्तर प्रदेश में उस चुनाव में BJP को अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं मिले थे। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी ने जिन 49 मौजूदा सांसदों को फिर से उम्मीदवार बनाया था, उनमें 27 चुनाव हार गए थे। ऐसे में विधानसभा चुनाव में मौजूदा जनप्रतिनिधि होने मात्र को टिकट की गारंटी नहीं माना जा रहा है।

पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर अलग-अलग स्तरों से फीडबैक जुटाने की व्यवस्था की गई है। क्षेत्रीय संगठन, स्थानीय पदाधिकारी, केंद्रीय नेतृत्व के आकलन और जमीनी सर्वे के आधार पर संभावित उम्मीदवारों की स्थिति देखी जा रही है। सितंबर में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार उम्मीदवार चयन के लिए बहुस्तरीय सर्वे की रणनीति तैयार की गई है, जिसमें संगठन और जनता दोनों के फीडबैक को शामिल किया जा रहा है।

यही वजह है कि मौजूदा विधायकों के बीच टिकट को लेकर हलचल बढ़ना स्वाभाविक है। जिन विधायकों की अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ है और स्थानीय संगठन के साथ बेहतर तालमेल है, उनकी दावेदारी मजबूत रह सकती है। इसके उलट जिनके खिलाफ जनता की नाराजगी, कार्यकर्ताओं की शिकायतें या संगठन के साथ टकराव की स्थिति सामने आती है, उनकी उम्मीदवारी पर पुनर्विचार हो सकता है।

पार्टी सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपनी चुनावी स्थिति का आकलन कर रही है। जुलाई में भी ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी कि BJP राज्य की सभी सीटों पर सर्वे के जरिए मौजूदा विधायकों के साथ उन सीटों का भी अध्ययन कर रही है, जहां पिछले चुनाव में उसे हार मिली थी। इसका इस्तेमाल संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय चुनावी समीकरणों को समझने के लिए किया जाना है।

उत्तर प्रदेश में दूसरी ओर विपक्षी दलों ने भी 2027 की तैयारियां तेज कर दी हैं। कांग्रेस ने हाल में अपने प्रदेश संगठन में बदलाव किए हैं और आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष तथा इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। यह संगठनात्मक बदलाव विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच किया गया है।

समाजवादी पार्टी भी अपनी रणनीति तैयार कर रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में प्रत्याशी चयन, गठबंधन और सीटों के सामाजिक समीकरण उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहने वाले हैं। BJP के लिए टिकट वितरण का फैसला इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों को बदलने पर नए उम्मीदवारों को स्थापित करने की चुनौती होगी, जबकि पुराने चेहरों को बरकरार रखने पर स्थानीय एंटी इनकंबेंसी से निपटना पड़ सकता है।

फिलहाल 100 या उससे ज्यादा विधायकों के टिकट कटने की कोई आधिकारिक अंतिम सूची सामने नहीं आई है। उपलब्ध रिपोर्टें पार्टी के आंतरिक आकलन और सूत्रों पर आधारित हैं। इतना जरूर है कि BJP की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में मौजूदा विधायक होना अकेले पर्याप्त आधार नहीं माना जा रहा है और जमीनी फीडबैक तथा जीत की संभावना को प्रमुख कसौटी बनाया जा रहा है।

2027 के विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ यह तस्वीर और स्पष्ट होगी कि पार्टी कितने मौजूदा विधायकों पर दोबारा भरोसा करती है और कितनी सीटों पर नए चेहरे उतारती है। फिलहाल आंतरिक सर्वे से सामने आए संकेतों ने उन विधायकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है, जिनके खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी या संगठन से टकराव की रिपोर्ट मिल रही है।

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