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उत्तर प्रदेश
Prayagraj:माघ मेला 2026 के लिए योगी सरकार की ग्रैंड तैयारी
Sarita
11 Dec 2025 9:22 AM IST

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Prayagraj: महाकुंभ-2025 के शानदार और ऐतिहासिक आयोजन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार अब माघ मेला-2026 को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं और मेले की तैयारियां अब आखिरी चरण में पहुंच चुकी हैं। हाल ही में मुख्य सचिव के सामने माघ मेले का आधिकारिक प्रतीक चिन्ह लॉन्च किया गया, साथ ही सेक्टरवार रंग योजना और आधारभूत ढांचे को अपग्रेड करने को लेकर विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई। इस बार अनुमान है कि प्रयागराज का संगम तट 12 से 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का स्वागत करेगा, जिनमें प्रतिदिन आने वाले हजारों कल्पवासियों की संख्या भी शामिल है।
मेला क्षेत्र को इस बार रंगों के सामंजस्य पर आधारित विशेष थीम में सजाया जा रहा है। प्रत्येक सेक्टर को "सात ऊर्जा चक्रों" के अनुरूप अलग-अलग रंगों की पहचान दी जाएगी। इससे न केवल मेले में एकरूपता दिखाई देगी, बल्कि श्रद्धालुओं को दिशा और व्यवस्था समझने में भी आसानी होगी। हर सेक्टर की परिधि पर लगभग 3 फुट चौड़ी एक रंगीन पट्टी बनाई जाएगी, जिससे पूरा क्षेत्र देखने में सुव्यवस्थित और सौंदर्यपूर्ण लगेगा। सभी सेक्टर्स में उत्तर प्रदेश सरकार और माघ मेला-2026 का लोगो प्रमुख रूप से अंकित होगा।
संगम और अन्य घाटों पर बनाए जाने वाले चेंजिंग रूम भी इस वर्ष पूरी तरह बदलने जा रहे हैं। इन्हें सेक्टरवार लागू रंग योजना के मुताबिक तैयार किया जाएगा। पहले की तुलना में इनकी क्षमता दोगुनी होगी—जहां पहले एक यूनिट में 2 लोग बदल सकते थे, वहीं अब 4 लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकेंगे। इससे भीड़ को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा मिलेगी।
मेले के सातों पॉन्टून पुल इस बार सात रंगों की थीम पर इंद्रधनुषी अंदाज़ में सजाए जाएंगे। पुलों पर लगाए जाने वाले प्रकाश स्तंभों पर धार्मिक प्रतीकों से सुसज्जित एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी, जो रात के समय मेले की रौनक और बढ़ा देंगी। हर पुल पर उसके थीम रंग के झंडे लगाए जाएंगे। इसके अलावा यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए पुलों पर कैनोपी भी बनाई जाएगी ताकि आवागमन सुरक्षित और सुचारू रहे।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिए हैं कि माघ मेला-2026 केवल धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन भर नहीं होना चाहिए, बल्कि स्वच्छता, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के मामले में देशभर के मेलों के लिए एक मिसाल बनना चाहिए। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मेला प्रशासन यह सुनिश्चित करने में लगा है कि हर श्रद्धालु यहां एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभव का आनंद ले सके।
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