उत्तर प्रदेश

प्रयागराज अस्पताल की अनोखी पहल, मोबाइल से दूरी की मुहिम

Saba Naaz
16 July 2026 6:12 PM IST
प्रयागराज अस्पताल की अनोखी पहल, मोबाइल से दूरी की मुहिम
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UTTARPRADESH: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन बच्चों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, मनोरंजन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कई बच्चे घंटों तक स्क्रीन से जुड़े रहते हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और व्यवहार पर भी देखने को मिल रहा है। इसी समस्या को देखते हुए प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय कॉल्विन अस्पताल के मनोरोग विभाग ने बच्चों में मोबाइल की लत कम करने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की, जिसका नाम रखा गया ‘स्क्रीन कर्फ्यू’।

इस पहल के तहत बच्चों और किशोरों को एक तय समय के बाद मोबाइल फोन से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया गया। अस्पताल के मनोरोग विभाग ने करीब 150 बच्चों पर इस प्रयोग को लागू किया। इसमें बच्चों को सूर्यास्त के बाद मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई। इस नियम का पालन बच्चों ने करीब छह महीने तक किया और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।

अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल की अधिक लत बच्चों की पढ़ाई, नींद और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित कर रही थी। कई बच्चे अपना ज्यादा समय मोबाइल गेम, वीडियो और सोशल मीडिया पर बिताने लगे थे। इससे उनकी एकाग्रता कम हो रही थी और पढ़ाई में भी रुचि घट रही थी।

‘स्क्रीन कर्फ्यू’ के तहत बच्चों को धीरे-धीरे मोबाइल से दूरी बनाने की आदत विकसित कराई गई। इसके लिए मनोरोग विशेषज्ञों ने बच्चों की काउंसलिंग की और उन्हें मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बारे में समझाया। साथ ही अभिभावकों को भी बच्चों को प्रोत्साहित करने और उनकी डिजिटल आदतों पर नजर रखने की सलाह दी गई।

इस पहल के दौरान सामने आए परिणाम काफी उत्साहजनक रहे। रिपोर्ट के अनुसार, 150 बच्चों में से करीब 90 बच्चों की पढ़ाई पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिला। इन बच्चों की एकाग्रता बढ़ी और उन्होंने पढ़ाई में पहले से बेहतर प्रदर्शन करना शुरू किया। वहीं, करीब 20 बच्चों में आंशिक सुधार देखा गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को अचानक मोबाइल से पूरी तरह दूर करना आसान नहीं होता। इसलिए उन्हें धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करने की आदत डालनी चाहिए। परिवार का सहयोग इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर माता-पिता खुद भी मोबाइल का सीमित इस्तेमाल करें, तो बच्चों पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है।

कॉल्विन अस्पताल की इस पहल से जुड़े चिकित्सकों का मानना है कि बच्चों की डिजिटल आदतों में बदलाव लाने के लिए केवल रोक लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सही दिशा और विकल्प देना भी जरूरी है। बच्चों को खेल, पढ़ाई, रचनात्मक गतिविधियों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

मोबाइल की लत अब केवल शहरों तक सीमित समस्या नहीं है। छोटे बच्चों से लेकर किशोरों तक में स्क्रीन टाइम बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने से आंखों पर असर, नींद की कमी, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

कॉल्विन अस्पताल की ‘स्क्रीन कर्फ्यू’ पहल ने यह दिखाया है कि सही मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से बच्चों की मोबाइल आदतों में बदलाव लाया जा सकता है। जिन बच्चों में सुधार आया, उनके अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की और दूसरे परिवारों को भी अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, लेकिन उसका संतुलित उपयोग सीखना जरूरी है। बच्चों के लिए मोबाइल जरूरत बन सकता है, लेकिन उसकी आदत न बने, इसके लिए समय-समय पर ऐसे प्रयास जरूरी हैं।

प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल की यह पहल अन्य संस्थानों और अभिभावकों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है। ‘स्क्रीन कर्फ्यू’ जैसे प्रयास बच्चों को मोबाइल की दुनिया से बाहर निकालकर पढ़ाई, खेल और सामाजिक गतिविधियों की ओर वापस लाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

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