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First rain में ही बदहाल व्यवस्था, सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में भरा पानी

Meerut मेरठ : पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में पहली ही तेज बारिश ने प्रशासनिक तैयारियों और करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की पोल खोल दी। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए आधुनिक सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में भारी जलभराव हो गया। बारिश के बाद अस्पताल परिसर के कई हिस्से पानी में डूब गए, जिससे मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
लगातार हुई मूसलाधार बारिश के कारण मेडिकल कॉलेज का सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक चारों तरफ से पानी से घिर गया। अस्पताल के प्रवेश मार्ग, गलियारों और आसपास के क्षेत्रों में घुटनों तक पानी भर गया। हालात ऐसे हो गए कि मरीजों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक ले जाने में भी परेशानी होने लगी। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के सहारे मरीजों को ले जाना मुश्किल हो गया।
अस्पताल पहुंचे कई मरीजों और उनके परिजनों को मजबूरी में गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। कई तीमारदारों ने बताया कि जलभराव के कारण अस्पताल तक पहुंचना और मरीजों को अंदर ले जाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। बारिश के पानी से अस्पताल परिसर में अव्यवस्था का माहौल बन गया।
मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान में जलभराव होने के बाद व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में यदि पहली ही तेज बारिश में पानी भर जाता है तो निर्माण गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था की जांच जरूरी है।
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि बारिश से पहले जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई, जिसका खामियाजा अब मरीजों और कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में जलभराव से संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है, जो पहले से इलाज करा रहे मरीजों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
बताया जा रहा है कि बारिश के बाद अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए। जल निकासी के लिए कर्मचारियों को लगाया गया और प्रभावित क्षेत्रों से पानी निकालने की कोशिश की गई। हालांकि, लंबे समय तक जलभराव रहने से अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित रहीं।
गौरतलब है कि सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के उद्देश्य से तैयार किया गया था, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। लेकिन पहली ही बड़ी बारिश में यहां जलभराव की स्थिति सामने आने से परियोजना की कार्यप्रणाली और रखरखाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
अब सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जल निकासी जैसी बुनियादी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।





