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Rampur; में जौहर यूनिवर्सिटी पर सियासत तेज, सपा ने उठाई आवाज

रामपुर : मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश को लेकर रामपुर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने इस मामले को लेकर मोर्चा खोल दिया है। पार्टी अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर विरोध की तैयारी में भी जुट गई है। इसी क्रम में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में 45 सदस्यीय सपा प्रतिनिधिमंडल रामपुर पहुंचा और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
सपा प्रतिनिधिमंडल में विधायक, सांसद, जिलाध्यक्ष और पार्टी के अन्य पदाधिकारी शामिल रहे। सभी सदस्यों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। ज्ञापन में कहा गया कि जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा मामला बेहद संवेदनशील है और इसका असर हजारों छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के भविष्य पर पड़ सकता है। पार्टी ने मांग की कि किसी भी तरह की प्रशासनिक या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने से पहले पूरी जांच और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाए।
सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी और बड़ी संख्या में छात्रों का भविष्य संकट में पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान के खिलाफ कार्रवाई करते समय सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
ज्ञापन में नियमों का दिया हवाला
सपा प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में रामपुर विकास प्राधिकरण से जुड़े नियमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 27 सितंबर 2024 को रामपुर विकास क्षेत्र में 62 नए राजस्व गांवों को शामिल किया गया था, जिसमें सिहोनिया खेड़ा गांव भी शामिल है। सपा का कहना है कि इससे पहले यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण की अधिसूचित सीमा में शामिल नहीं था, इसलिए पुराने निर्माणों पर बाद के नियम लागू नहीं किए जा सकते।
ज्ञापन में प्रशासन पर आरोप लगाया गया कि कार्रवाई से शिक्षा का माहौल प्रभावित हो रहा है और गरीब बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है। सपा नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
38 भवनों को अवैध बताकर गिराने का आदेश
बता दें कि रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बने 40 भवनों में से 38 को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। प्राधिकरण के अनुसार जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी परिसर में बने 40 भवनों में से केवल दो भवनों का नक्शा स्वीकृत था, जबकि बाकी 38 भवन बिना वैध अनुमति और स्वीकृत नक्शे के बनाए गए थे।
प्राधिकरण का कहना है कि वर्ष 2024 में क्षेत्र के विकास प्राधिकरण के दायरे में आने के बाद रिकॉर्ड की जांच की गई, जिसमें निर्माण संबंधी अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। प्रशासन के अनुसार जवाब संतोषजनक नहीं मिलने के बाद ध्वस्तीकरण का फैसला लिया गया।
सियासी टकराव बढ़ने के संकेत
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सपा और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। समाजवादी पार्टी जहां इसे शिक्षा और छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला बता रही है, वहीं प्रशासन इसे नियमों के उल्लंघन से जुड़ी कार्रवाई बता रहा है।
फिलहाल सपा ने ज्ञापन देकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रोकने की मांग की है। अब आगे की कार्रवाई प्रशासनिक निर्णय और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। इस मामले को लेकर आने वाले दिनों में रामपुर की राजनीति और गरमा सकती है।





