उत्तर प्रदेश

रोडवेज से सफर और टीनशेड का घर, आलम बदी की अनोखी पहचान

Ratna Netam
23 July 2026 3:30 PM IST
रोडवेज से सफर और टीनशेड का घर, आलम बदी की अनोखी पहचान
x

आजमगढ़ : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक आलम बदी का गुरुवार सुबह निधन हो गया। वह उत्तर प्रदेश के सबसे बुजुर्ग विधायकों में शामिल थे और अपनी सादगी, ईमानदारी और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए अलग पहचान रखते थे। आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने गए आलम बदी ने राजनीति में रहते हुए ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा हमेशा होती रहेगी।

आलम बदी का जीवन बेहद साधारण रहा। पांच बार विधायक बनने और लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद उन्होंने न तो आलीशान बंगला बनाया और न ही महंगी गाड़ियों का इस्तेमाल किया। वह आज भी आजमगढ़ के कुर्मीटोला मोहल्ले में स्थित अपने पुराने टीन शेड वाले घर में रहते थे। आम लोगों की तरह वह रोडवेज बस, साइकिल और स्कूटर से सफर करना पसंद करते थे।

राजनीतिक जीवन में उनकी ईमानदारी की मिसाल दी जाती थी। करीब छह दशक तक राजनीति में रहने के बावजूद उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ। वह हमेशा कहते थे कि राजनीति का उद्देश्य जनता की सेवा करना है, न कि सुविधाएं जुटाना।

आलम बदी को एक बार समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की सरकार में मंत्री बनने का प्रस्ताव भी मिला था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने मंत्री पद ठुकराते हुए कहा था कि मंत्री बनने के बाद जनता से दूरी बढ़ सकती है, जबकि वह हमेशा आम लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना चाहते हैं।

विधायक बनने के बाद भी उनका जीवन आम नागरिकों जैसा ही रहा। चुनाव जीतने के बाद भी वह क्षेत्र के लोगों से मिलते रहे और उनकी परेशानियों को सुनते रहे। उनका मानना था कि जनप्रतिनिधि का असली काम जनता के बीच रहना और उनकी सेवा करना है।

चुनाव में नहीं करते थे दिखावा

जहां आज के समय में चुनाव प्रचार में बड़ी रकम खर्च की जाती है, वहीं आलम बदी का तरीका बिल्कुल अलग था। वह चुनावों के दौरान बड़े-बड़े पोस्टर, बैनर और प्रचार सामग्री से दूरी बनाए रखते थे। उनका कहना था कि जनता के साथ उनका रिश्ता प्रचार से नहीं बल्कि विश्वास से बना है।

उन्होंने कभी सोशल मीडिया का सहारा भी नहीं लिया। वह सीधे लोगों से संवाद करने में विश्वास रखते थे। यही वजह थी कि क्षेत्र के लोग उन्हें एक नेता से ज्यादा अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते थे।

महात्मा गांधी को मानते थे आदर्श

आलम बदी अपनी सादगी के पीछे महात्मा गांधी के विचारों को प्रेरणा बताते थे। एक बार जब उनसे पूछा गया कि विधायक आमतौर पर बड़े घरों और गाड़ियों में रहते हैं, लेकिन वह इतने साधारण जीवन क्यों जीते हैं, तो उन्होंने कहा था कि आजादी का मतलब केवल सुविधाएं जुटाना नहीं है, बल्कि समाज और देश की सेवा करना है।

उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा था कि गांधीजी बैरिस्टर थे और उनके पास सुविधाओं की कमी नहीं थी, लेकिन उन्होंने सब कुछ छोड़कर जनता की सेवा का रास्ता चुना।

पांच बार बने विधायक

आलम बदी पहली बार वर्ष 1996 में आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी इसी सीट से जीत दर्ज की। हालांकि 2007 में बसपा की लहर के दौरान उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी मनोज यादव को 34 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था। उनका राजनीतिक सफर समाजवादी पार्टी के शुरुआती दौर से जुड़ा रहा और वह पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे।

आलम बदी का निधन समाजवादी पार्टी और आजमगढ़ की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनकी सादगी, ईमानदारी और जनता से जुड़ाव आने वाली पीढ़ियों के नेताओं के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।

Next Story