उत्तर प्रदेश

2027 चुनाव से पहले यूपी में सियासी हलचल तेज

Ratna Netam
27 Oct 2026 6:45 PM IST
2027 चुनाव से पहले यूपी में सियासी हलचल तेज
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लखनऊ : 27 अक्टूबर 2026। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर चुनावी धांधली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मंगलवार को दावा किया कि बीजेपी, चुनाव आयोग और प्रशासन मिलकर तीन स्तरों पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का काम कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने बीजेपी को 'चुनावी सिंडिकेट' बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची में हेरफेर, मतदान के दौरान फर्जी वोटिंग और मतगणना में गड़बड़ी के जरिए चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। हालांकि, ये अखिलेश यादव के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच से पुष्टि नहीं हुई है।
अखिलेश यादव ने बताया चुनावी धांधली का तीन स्तरीय तरीका
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बीजेपी, चुनाव आयोग और प्रशासन पर निशाना साधा।उन्होंने आरोप लगाया कि इन तीनों की कथित मिलीभगत से चुनावी धांधली का तीन स्तरीय तरीका तैयार किया गया है।अखिलेश के अनुसार, पहला स्तर चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित हेरफेर करना है। दूसरे स्तर पर मतदान के दौरान फर्जी वोट डलवाना और विपक्षी समर्थकों को मतदान से रोकना शामिल है।उन्होंने तीसरे स्तर पर मतगणना और चुनाव परिणामों में कथित गड़बड़ी करने का आरोप लगाया।अखिलेश यादव ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता लोकतंत्र के लिए आवश्यक है और किसी भी प्रकार की अनियमितता मतदाताओं के विश्वास को प्रभावित कर सकती है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर उठाए सवाल
अखिलेश यादव लंबे समय से उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।उनका आरोप है कि मतदाता सूचियों में पात्र लोगों के नाम हटाने और गलत प्रविष्टियां शामिल करने जैसी अनियमितताएं हो रही हैं।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।इससे पहले 26 अक्टूबर को अखिलेश यादव ने मतदाता सूची को आधार से जोड़ने और मतदान केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था लागू करने की मांग की थी।उन्होंने दावा किया था कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से दोहरी प्रविष्टियों और कथित फर्जी मतदान की समस्याओं को कम किया जा सकता है।
मतदान के दौरान विपक्षी मतदाताओं को रोकने का आरोप
अखिलेश यादव ने चुनाव के दौरान विपक्षी दलों के समर्थकों को मतदान करने से रोकने का भी आरोप लगाया।उन्होंने दावा किया कि कई बार मतदाताओं को डराने-धमकाने और मतदाता सूची में नाम का मिलान नहीं होने जैसे कारणों का हवाला देकर मतदान से वंचित किया जाता है।सपा प्रमुख का आरोप है कि कुछ प्रशासनिक अधिकारी निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय सत्ताधारी दल के पक्ष में काम करते हैं।हालांकि, किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में इन आरोपों के सत्यापित होने संबंधी साक्ष्य मंगलवार के बयान के साथ सार्वजनिक नहीं किए गए।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और प्रशासन के कुछ अधिकारियों का रवैया विपक्षी दलों के प्रति निष्पक्ष नहीं है।इससे पहले 12 अक्टूबर को भी अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग और नौकरशाही बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे हैं।उन्होंने मांग की थी कि आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
राहुल गांधी ने भी उठाया वोट चोरी का मुद्दा
चुनावी प्रक्रिया को लेकर समाजवादी पार्टी के अलावा कांग्रेस भी लगातार सवाल उठा रही है।मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली के त्रिलोकपुरी में आयोजित 'वोट अधिकार, जीने का अधिकार' जनसुनवाई कार्यक्रम में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया।उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका की आलोचना करते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।कांग्रेस ने 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सार्वजनिक स्तर पर विरोध कार्यक्रम और एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में सभा आयोजित करने की योजना भी बनाई है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।समाजवादी पार्टी चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में उठा रही है।वहीं, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।फिलहाल अखिलेश यादव के ताजा आरोपों पर बीजेपी, चुनाव आयोग या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की विशिष्ट प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आई है।चुनावी धांधली के आरोपों का अंतिम आकलन संबंधित शिकायतों, दस्तावेजों, आधिकारिक जांच और न्यायिक निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकता है।
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