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खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगा बढ़ावा, 9 महीने बाद कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर में उत्पादन शुरू

बरेली। खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार द्वारा स्थापित कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर में उत्पादन शुरू हो गया है। लोकार्पण के करीब नौ महीने बाद सेंटर की मशीनों से खाद्य उत्पाद तैयार होने लगे हैं। शुरुआती चरण में बेकरी उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। आने वाले समय में दूध और टमाटर की प्रोसेसिंग शुरू करने की भी योजना है, लेकिन इसके लिए आवश्यक लैब की स्थापना अभी नहीं हो सकी है।
सरकार की इस पहल से खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काम करने के इच्छुक युवाओं, स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्यमियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सेंटर में प्रशिक्षण के साथ न्यूनतम शुल्क पर कच्चे माल की प्रोसेसिंग की सुविधा देने की तैयारी की जा रही है, ताकि कम पूंजी वाले युवा भी अपना कारोबार शुरू कर सकें।
लोकार्पण के नौ महीने बाद शुरू हुआ उत्पादन
कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर का निर्माण खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। इसके लोकार्पण के बाद लंबे समय तक उत्पादन शुरू नहीं हो पाने से सेंटर का पूरा लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा था।
अब करीब नौ महीने बाद सेंटर में बेकरी उत्पादों का निर्माण शुरू हो गया है। इससे खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमियों के लिए नई संभावनाएं बनी हैं।
फिलहाल उत्पादन सीमित स्तर पर हो रहा है। सेंटर की अन्य प्रसंस्करण इकाइयों को भी शुरू करने की तैयारी है। सभी सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद इसका दायरा बढ़ सकता है।
अभी सिर्फ बेकरी उत्पाद तैयार हो रहे
सेंटर में वर्तमान समय में बेकरी से जुड़े खाद्य पदार्थों का उत्पादन शुरू किया गया है। बेकरी उद्योग कम निवेश में कारोबार शुरू करने वाले उद्यमियों के लिए एक विकल्प माना जाता है।
बिस्कुट, ब्रेड, केक, रस्क और अन्य बेकरी उत्पादों की बाजार में नियमित मांग रहती है। हालांकि, सेंटर में इनमें से किन-किन उत्पादों का व्यावसायिक उत्पादन किया जा रहा है, इसकी विस्तृत सूची अभी स्पष्ट नहीं है।
सेंटर में उपलब्ध मशीनों और प्रशिक्षण सुविधाओं का लाभ मिलने से युवा खाद्य उत्पाद तैयार करने की तकनीक समझ सकेंगे। इससे उन्हें अपना छोटा कारोबार स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
लैब के अभाव में दूध और टमाटर की प्रोसेसिंग अटकी
कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर में दूध और टमाटर की प्रोसेसिंग शुरू करने की भी योजना बनाई गई है। हालांकि, प्रयोगशाला स्थापित नहीं होने के कारण इन दोनों क्षेत्रों में फिलहाल उत्पादन शुरू नहीं किया जा सका है।
दूध और टमाटर जैसे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों की प्रोसेसिंग में गुणवत्ता परीक्षण, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन बेहद आवश्यक है।
दूध से पनीर, दही और अन्य डेयरी उत्पाद, जबकि टमाटर से सॉस, प्यूरी और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। ये संभावित उत्पाद हैं, जिनका निर्माण संबंधित तकनीकी सुविधाओं और आवश्यक स्वीकृतियों के बाद ही संभव होगा।
लैब स्थापित होने से कच्चे माल और तैयार उत्पादों की गुणवत्ता की जांच करने में मदद मिलेगी। इसके बाद दूध और टमाटर प्रसंस्करण इकाइयों को संचालित करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
3.01 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित हुआ सेंटर
बरेली के सौ फुटा रोड पर स्थित कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत विकसित किया गया है। पहले प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना पर करीब 3.01 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसमें दूध, बेकरी और टमाटर प्रसंस्करण के लिए तीन अलग-अलग इकाइयां स्थापित की गई हैं।
सेंटर का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि छोटे कारोबारियों को महंगी मशीनें खरीदने की आवश्यकता कम पड़े। इससे विशेष रूप से उन युवाओं को लाभ मिल सकता है, जो सीमित संसाधनों के साथ खाद्य उद्योग में कदम रखना चाहते हैं।
स्वयं सहायता समूहों और संस्थाओं को दिया जाएगा प्रशिक्षण
सेंटर में स्वयंसेवी संस्थाओं और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े लोगों को खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को मशीनों के संचालन, खाद्य उत्पादों के निर्माण, स्वच्छता, पैकेजिंग और गुणवत्ता बनाए रखने की जानकारी दी जा सकेगी।
प्रशिक्षण का उद्देश्य लोगों को केवल उत्पाद बनाना सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए तैयार करना भी है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह स्थानीय बाजारों की मांग को ध्यान में रखकर अपने उत्पाद तैयार कर सकेंगे।
विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए इस प्रकार की सुविधा आय बढ़ाने का माध्यम बन सकती है।
न्यूनतम शुल्क पर मिलेगी प्रोसेसिंग की सुविधा
सेंटर की प्रमुख विशेषता यह होगी कि स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक युवा अपना कच्चा माल लाकर यहां उपलब्ध मशीनों से उसकी प्रोसेसिंग करा सकेंगे।
इस सुविधा के लिए न्यूनतम शुल्क लेने की योजना है। इससे कारोबार शुरू करने के लिए बड़ी पूंजी लगाने की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि, प्रोसेसिंग के लिए अलग-अलग उत्पादों का वास्तविक शुल्क कितना होगा, इसकी अंतिम जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
शुल्क तय होने और सुविधाएं शुरू होने के बाद किसान, लघु उद्यमी और खाद्य कारोबार से जुड़े नए लोग इसका लाभ उठा सकेंगे।
किसानों को भी मिल सकता है सीधा फायदा
खाद्य प्रसंस्करण की सुविधाएं बढ़ने से किसानों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। किसान अपनी उपज को सीधे बेचने के अलावा उससे तैयार उत्पाद बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
उदाहरण के लिए, टमाटर से सॉस और प्यूरी जैसे उत्पाद तैयार किए जाने पर उसकी उपयोगिता बढ़ सकती है। इसी तरह दूध से विभिन्न डेयरी उत्पाद तैयार कर अतिरिक्त मूल्य प्राप्त करने की संभावना रहती है।
हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिल सकेगा, जब संबंधित प्रसंस्करण इकाइयां पूरी तरह संचालित हों और उत्पादों की बिक्री के लिए उचित बाजार उपलब्ध हो।
अब लैब की स्थापना और बाकी यूनिटों के संचालन पर नजर
कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर में बेकरी उत्पादों का उत्पादन शुरू होना महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन परियोजना का पूरा उद्देश्य हासिल करने के लिए दूध और टमाटर प्रसंस्करण इकाइयों को भी चालू करना होगा।
पूर्व में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, यहां करीब 25 लाख रुपये की लागत से फूड टेस्टिंग लैब स्थापित करने का प्रावधान है।
अब प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत, लैब की स्थापना और न्यूनतम शुल्क पर प्रोसेसिंग सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
सेंटर की सभी इकाइयां सुचारू रूप से संचालित होने के बाद स्थानीय युवाओं, किसानों और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। इससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।





