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उत्तर प्रदेश
धान खरीद की शुरुआत फीकी बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें
Ratna Netam
13 Oct 2026 2:14 PM IST

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बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में सरकारी धान खरीद की शुरुआत पहले ही दिन फीकी रही। धान खरीद के लिए बनाए गए क्रय केंद्रों पर पहले दिन बोहनी तक नहीं हो सकी। बारिश और अधूरे इंतजामों के कारण खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई है। ऐसे में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए करीब 15 दिन तक इंतजार करना पड़ सकता है। धान खरीद का समय शुरू होने के बावजूद केंद्रों पर खरीदारी नहीं होने से सरकारी खरीद व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।
धान खरीद के लिए बनाए गए केंद्रों पर पहले ही दिन सन्नाटा रहने की स्थिति सामने आई है। एक ओर मौसम की मार ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, वहीं दूसरी ओर खरीद केंद्रों पर जरूरी व्यवस्थाएं पूरी नहीं होने से परेशानी और बढ़ सकती है। किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी तैयार फसल को सुरक्षित रखना और उचित समय पर उसे बेचने की है।
धान की सरकारी खरीद किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने से किसानों को तय कीमत मिलने का अवसर मिलता है। हालांकि इसके लिए क्रय केंद्रों का समय पर खुलना, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और खरीद की प्रक्रिया सुचारू होना जरूरी है। बदायूं में पहले दिन खरीद शुरू नहीं हो पाने से किसानों को इंतजार करना पड़ सकता है।
बारिश धान की कटाई और खरीद प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है। खेतों में नमी अधिक होने से फसल की कटाई में देरी हो सकती है। इसके अलावा कटाई के बाद धान को सुखाना भी जरूरी होता है। अधिक नमी वाला धान खरीद के निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर सकता। ऐसे में किसानों को फसल तैयार होने के बाद भी उसे सरकारी क्रय केंद्र तक पहुंचाने में समय लग सकता है।
धान की खरीद में नमी की मात्रा का विशेष महत्व होता है। सरकारी खरीद के दौरान फसल की गुणवत्ता और नमी की जांच की जाती है। यदि धान में निर्धारित सीमा से अधिक नमी होती है, तो किसानों को उसे सुखाने की आवश्यकता पड़ सकती है। बारिश के मौसम में धान को सुखाने के लिए पर्याप्त धूप नहीं मिलने से यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ने की आशंका रहती है।
दूसरी ओर खरीद केंद्रों पर अधूरे इंतजाम भी एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं। किसी भी धान क्रय केंद्र पर खरीद प्रक्रिया शुरू करने के लिए तौल व्यवस्था, उपज की जांच, सुरक्षित भंडारण और संबंधित दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है। इन व्यवस्थाओं में कमी रहने पर किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी हो सकती है। बदायूं में खरीद की शुरुआत के दौरान सामने आई स्थिति ने समय पर तैयारियां पूरी करने की जरूरत को सामने रखा है।
किसानों के लिए धान की कटाई के बाद उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण होता है। यदि फसल में नमी बनी रहती है तो उसके खराब होने की आशंका बढ़ सकती है। साथ ही उपज को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान और मौसम से बचाव की व्यवस्था चाहिए। छोटे किसानों के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उनके पास भंडारण के संसाधन सीमित हो सकते हैं।
धान की बिक्री में देरी का असर किसानों की आर्थिक जरूरतों पर भी पड़ सकता है। खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च होता है। फसल तैयार होने के बाद किसान उसकी बिक्री से होने वाली आमदनी का इंतजार करते हैं। यदि सरकारी खरीद में देरी होती है, तो उनकी आर्थिक योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
सरकारी खरीद केंद्रों की व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसान अपनी उपज उचित मूल्य पर बेच सकें। इसके लिए जरूरी है कि खरीद शुरू होने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी हों और किसानों को प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए। खरीद केंद्रों पर तौल और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था सुचारू रहने से किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता है।
बदायूं में धान खरीद की शुरुआत का पहला दिन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। बारिश और अधूरी तैयारियों ने खरीद की रफ्तार पर असर डाला है। अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि खरीद केंद्रों पर सभी इंतजाम कब तक पूरे होते हैं और धान की नियमित खरीद कब शुरू होती है। फिलहाल करीब 15 दिन के संभावित इंतजार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। समय पर व्यवस्थाएं दुरुस्त होने और मौसम अनुकूल रहने पर ही खरीद प्रक्रिया को रफ्तार मिल सकेगी।
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