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Bulandshahr, में सुश्रुत जयंती पर आयोजन, 50 बच्चों को कराया गया स्वर्णप्राशन

Bulandshahr बुलंदशहर : नगर के यमुनापुरम स्थित समता आयुर्वेदिक सेंटर में बुधवार को पुष्य नक्षत्र के शुभ अवसर पर आचार्य सुश्रुत जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर निशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों को आयुर्वेदिक विधि से स्वर्णप्राशन कराया गया। साथ ही चिकित्सकों के लिए विचार गोष्ठी आयोजित कर आचार्य सुश्रुत के चिकित्सा क्षेत्र में योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में क्षारसूत्र एवं पंचकर्म चिकित्सा विशेषज्ञ तथा अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के केंद्रीय संगठन मंत्री वैद्य हितेश कौशिक ने आचार्य सुश्रुत के जीवन और उनके चिकित्सा योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आचार्य सुश्रुत को शल्य चिकित्सा और प्लास्टिक सर्जरी का जनक माना जाता है। आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा का अत्यंत विस्तृत वर्णन मिलता है और आचार्य सुश्रुत ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथों में सर्जरी की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का उल्लेख किया है।
वैद्य हितेश कौशिक ने बताया कि आचार्य सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा को आठ प्रमुख भागों में विभाजित किया था। इनमें छेद्य (Excision), भेद्य (Incision), लेख्य (Scraping), वेध्य (Puncturing), ऐष्य (Probing), आहार्य (Extraction), विस्राव्य (Draining) और सीव्य (Suturing) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हजारों वर्ष पहले आचार्य सुश्रुत ने जिन शल्य प्रक्रियाओं का वर्णन किया था, वे आज भी चिकित्सा विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
उन्होंने बताया कि आचार्य सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा में उपयोग किए जाने वाले 120 से अधिक उपकरणों का भी वर्णन किया था। इसके अलावा उन्होंने गुदा रोगों के उपचार में क्षारसूत्र चिकित्सा का उल्लेख किया, जो वर्तमान समय में भी आयुर्वेद की महत्वपूर्ण चिकित्सा पद्धतियों में शामिल है।
वैद्य हितेश कौशिक ने कहा कि आचार्य सुश्रुत के योगदान को भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सम्मान मिला है। एडिनबर्ग में उन्हें प्लास्टिक सर्जरी के जनक के रूप में सम्मानित किया गया है और उनकी प्रतिमा भी स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक समय में भी बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित निशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर में जन्म से लेकर 16 वर्ष तक की आयु के 50 बच्चों को स्वर्णप्राशन कराया गया। चिकित्सकों ने अभिभावकों को स्वर्णप्राशन के महत्व और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दी। साथ ही बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के उपाय भी बताए गए।
गोष्ठी में मौजूद चिकित्सकों ने आचार्य सुश्रुत को श्रद्धांजलि देते हुए आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार और इसके वैज्ञानिक महत्व को लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का आधार भी है।
कार्यक्रम में डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ. सतीश शर्मा, डॉ. एससी पालीवाल, डॉ. अन्तरिक्ष, डॉ. कुबेर दत्त शर्मा, दक्ष कौशिक, सारंग सहित कई चिकित्सक और गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी चिकित्सकों और सहयोगियों का विशेष योगदान रहा।





