उत्तर प्रदेश

काशी में दिखेगा ओडिशा का रंग, 3 दिन तक संस्कृति और परंपरा का भव्य उत्सव

Gulabi Jagat
23 Aug 2026 6:53 PM IST
काशी में दिखेगा ओडिशा का रंग, 3 दिन तक संस्कृति और परंपरा का भव्य उत्सव
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वाराणसी। उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते पर्यटन और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब अलग-अलग राज्य भी यूपी के लोगों को अपने पर्यटन स्थलों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में धर्म और आध्यात्म की नगरी वाराणसी में पहली बार ओडिशा परब का आयोजन किया गया है। तीन दिवसीय इस भव्य महोत्सव के जरिए उत्तर प्रदेश के लोगों को ओडिशा की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, कला, खान-पान और पर्यटन स्थलों की झलक दिखाई जा रही है।

शनिवार से शुरू हुए इस आयोजन का उद्देश्य ओडिशा और उत्तर प्रदेश के बीच सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों को मजबूत करना है। उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से ओडिशा सरकार और फिक्की (FICCI) की ओर से आयोजित इस महोत्सव में ओडिशा की लोक संस्कृति और विरासत को वाराणसी के लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। यह आयोजन 22 से 24 अगस्त 2026 तक पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल, बड़ा लालपुर में किया जा रहा है।

ओडिशा की संस्कृति से रूबरू हो रहे लोग

ओडिशा परब में पहुंचने वाले लोगों को यहां ओडिशा के पारंपरिक लोक रंग, हस्तशिल्प, व्यंजन और कला की अनोखी झलक देखने को मिल रही है। इस महोत्सव में ओडिशा की प्राचीन सभ्यता और आधुनिक शिल्प कौशल को एक साथ प्रदर्शित किया गया है।

कार्यक्रम का उद्घाटन ओडिशा के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने किया। वहीं शाम के कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी शामिल हुए। रविवार को ओडिशा की दूसरी उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।

आयोजकों के मुताबिक, वाराणसी में ओडिशा परब का आयोजन विशेष महत्व रखता है क्योंकि काशी और ओडिशा दोनों ही भारत की आध्यात्मिक विरासत के बड़े केंद्र हैं। जहां वाराणसी भगवान शिव की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है, वहीं ओडिशा भगवान जगन्नाथ की भूमि के रूप में पूरी दुनिया में पहचान रखता है।

32 स्टॉल में दिख रही ओडिशा की झलक

ओडिशा परब में कुल 32 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें 22 स्टॉल हस्तशिल्प से जुड़े हैं, जबकि 10 स्टॉल पर ओडिशा के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लोगों को मिल रहा है।

हस्तशिल्प प्रदर्शनी में ओडिशा की प्रसिद्ध कलाओं को प्रदर्शित किया गया है। इनमें पट्टाचित्र कला, ताड़ के पत्तों पर नक्काशी, धोकरा कला, चांदी की बारीक कारीगरी, हथकरघा वस्त्र, कोटपैड कपड़े, पीतल और कांसे के उत्पाद, जूट से बनी वस्तुएं और कई अन्य पारंपरिक सामान शामिल हैं।

इन कलाओं को देखने के साथ-साथ लोग कलाकारों से सीधे बातचीत भी कर रहे हैं। कई कारीगर लाइव डेमो के जरिए बता रहे हैं कि किस तरह महीनों की मेहनत के बाद ये खूबसूरत कलाकृतियां तैयार होती हैं।

ओडिशी नृत्य और लोक कला का प्रदर्शन

महोत्सव में ओडिशा के प्रसिद्ध ओडिशी नृत्य के अलावा कई लोक और पारंपरिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जा रही हैं। कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के जरिए ओडिशा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा को दर्शा रहे हैं।

ओडिशा की पहचान केवल मंदिरों और धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की कला, संगीत, नृत्य और हस्तशिल्प भी देशभर में प्रसिद्ध हैं। इसी विरासत को वाराणसी के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास इस आयोजन के माध्यम से किया जा रहा है।

पर्यटन स्थलों की भी दिखाई जा रही झलक

ओडिशा परब में राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को भी प्रदर्शित किया जा रहा है। इसमें भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी, विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर, रत्नागिरी, उदयगिरि और ललितगिरि के बौद्ध विरासत स्थल शामिल हैं।

इसके अलावा चिल्का झील, भीतर्कनिका राष्ट्रीय उद्यान और सिमिलिपाल जैसे प्राकृतिक और वन्यजीव पर्यटन स्थलों की जानकारी भी लोगों को दी जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान रोड-शो के माध्यम से ओडिशा के पर्यटन उत्पादों और नए पर्यटन अवसरों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे उत्तर प्रदेश के पर्यटकों को ओडिशा घूमने के लिए प्रेरित करने की योजना है।

पर्यावरण से जुड़ी अनोखी कला बनी आकर्षण का केंद्र

ओडिशा से आईं शिल्पी उसीतीर्थ ने बताया कि वहां की कला और संस्कृति प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है। ओडिशा में तैयार होने वाले कई उत्पाद प्राकृतिक संसाधनों से बनाए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि तालाबों के किनारे उगने वाली गोल्डन ग्रास, सवाई ग्रास और कौना ग्रास से कई तरह के खूबसूरत और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनसे बने घरेलू सामान, सजावटी वस्तुएं और उपयोगी उत्पाद लोगों को काफी पसंद आते हैं।

उन्होंने कहा कि वाराणसी में पहली बार आयोजित ओडिशा परब में इन प्राकृतिक उत्पादों को लेकर आई हैं, जिन्हें यहां आने वाले लोग काफी पसंद कर रहे हैं।

महिलाओं और ग्रामीण कारीगरों को मिल रहा मंच

ओडिशा परब में महिला समूहों और ग्रामीण कारीगरों के बनाए उत्पादों को भी विशेष स्थान दिया गया है। शिल्पी उसीतीर्थ ने बताया कि गांव की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए विशेष कपड़ों से बनी राखियां भी प्रदर्शनी में रखी गई हैं।

इन राखियों की खासियत यह है कि ये पर्यावरण के अनुकूल हैं और इन्हें इस्तेमाल के बाद फेंकने की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा कपड़े से बने सजावटी सामान और अन्य उपयोगी वस्तुएं भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने की पहल

ओडिशा टूरिज्म के एडिशनल डायरेक्टर विश्व जीत राउत राय ने कहा कि ओडिशा परब केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह ओडिशा की कहानी और उसकी आत्मा को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने की पहल है।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन के जरिए लोगों को ओडिशा की परंपराओं, व्यंजनों, शिल्प कौशल और पर्यटन क्षमता को करीब से जानने का मौका मिल रहा है।

इससे पहले गुवाहाटी, बेंगलुरु और अहमदाबाद में ओडिशा परब का आयोजन किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश में पहली बार वाराणसी में आयोजित यह महोत्सव ओडिशा और यूपी के बीच सांस्कृतिक साझेदारी को नई दिशा देने का काम कर रहा है। तीन दिनों तक चलने वाला यह उत्सव काशी में ओडिशा की संस्कृति, कला और परंपरा का जीवंत अनुभव करा रहा है।

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