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उत्तर प्रदेश
Noida: मानसिक दबाव में आई छात्रा ने की आत्महत्या, विश्वविद्यालय प्रशासन पर उठे सवाल
Tara Tandi
19 July 2025 6:22 PM IST

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Greater Noida ग्रेटर नोएडाः ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क क्षेत्र में स्थित शारदा विश्वविद्यालय में बीडीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा ज्योति ने मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। उसने विश्वविद्यालय के मंडेला गर्ल्स हॉस्टल में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी। इस घटना ने पूरे परिसर में सनसनी मचा दी और छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ज्योति का एक सुसाइड नोट भी सामने आया है।
सुसाइड नोट में गंभीर आरोप
पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें छात्रा ने दो शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। नोट में ज्योति ने लिखा कि पीसीपी और डेंटल मटेरियल विभाग के दो प्रोफेसर लंबे समय से उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। इसके अलावा, उसे फर्जी हस्ताक्षर के झूठे मामले में फंसाया गया, जिसके कारण वह गहरे तनाव में थी।
पुलिस और फॉरेंसिक जांच
घटना की सूचना मिलते ही नॉलेज पार्क थाने की पुलिस, फॉरेंसिक टीम और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया और मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई। सुसाइड नोट और परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नामजद शिक्षकों को हिरासत में ले लिया है।
छात्रों का प्रशासन पर आरोप
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दबाव के साथ-साथ कुछ शिक्षक छात्रों पर अनुचित मानसिक दबाव डालते हैं। ज्योति भी इस दबाव का शिकार हुई और अवसाद में चली गई, जिसके परिणामस्वरूप उसने यह कठोर कदम उठाया। परिजनों और सहपाठियों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है।
विश्वविद्यालय में सुरक्षा बढ़ाई गई
ग्रेटर नोएडा के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त सुधीर कुमार ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और कानूनी कार्रवाई की जा रही है। छात्रों के आक्रोश को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। पुलिस ने छात्रों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया है।
शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल
यह घटना न केवल विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा को भी उजागर करती है। इस मामले ने शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और समर्थन की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
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