उत्तर प्रदेश

E20 से इंजन नुकसान का सबूत नहीं: IIT कानपुर

Kavita2
14 July 2026 5:30 PM IST
E20 से इंजन नुकसान का सबूत नहीं: IIT कानपुर
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कानपुर : देशभर में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल को लेकर जारी बहस के बीच IIT कानपुर के शोधकर्ताओं ने बड़ा दावा किया है। संस्थान के रिसर्चर्स के अनुसार, उनकी स्टडी में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से फ्यूल एफिशिएंसी में कोई महत्वपूर्ण गिरावट नहीं पाई गई है। इसके अलावा रिसर्च में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल सामान्य वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचाता है।

E20 पेट्रोल के रोलआउट को लेकर पिछले कुछ समय से वाहन मालिकों और विशेषज्ञों के बीच कई तरह की चिंताएं सामने आ रही थीं। कुछ लोगों ने दावा किया था कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज कम हो सकता है और लंबे समय में इंजन पर असर पड़ सकता है। इसी बीच IIT कानपुर की स्टडी ने इन चिंताओं को लेकर अलग तस्वीर पेश की है।

E20 को लेकर क्यों उठे सवाल

भारत सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति को बढ़ावा दिया है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना और कार्बन उत्सर्जन को घटाना है।

हालांकि, E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण होने के कारण कुछ वाहन चालकों ने माइलेज और इंजन की क्षमता को लेकर सवाल उठाए। इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है, इसलिए आशंका जताई गई थी कि इससे वाहनों की ईंधन दक्षता प्रभावित हो सकती है।

IIT कानपुर की रिसर्च में क्या सामने आया

IIT कानपुर के शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी के आधार पर कहा कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से फ्यूल एफिशिएंसी में कोई बड़ी गिरावट नहीं देखी गई। रिसर्चर्स के मुताबिक, जिन वाहनों में E20 के अनुरूप तकनीकी बदलाव किए गए हैं, उनमें प्रदर्शन सामान्य बना रहता है।

स्टडी में यह भी कहा गया कि E20 के इस्तेमाल से इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। शोधकर्ताओं ने वाहन संचालन, ईंधन प्रदर्शन और इंजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया।

सरकार पहले ही दे चुकी है सफाई

IIT कानपुर की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब पिछले सप्ताह ऑयल मिनिस्ट्री ने E20 पेट्रोल को लेकर स्थिति स्पष्ट की थी। मंत्रालय ने कहा था कि कुछ वाहनों में E20 के कारण माइलेज में लगभग 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

हालांकि, मंत्रालय ने यह भी कहा था कि E20 के फायदे इसके संभावित प्रभावों से अधिक हैं। सरकार के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण से लाइफसाइकल कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलती है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग के पीछे सरकार का उद्देश्य

भारत लंबे समय से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर बड़ी राशि खर्च करता है। ऐसे में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।

इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा और देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

ऑटो इंडस्ट्री में भी तैयारी

E20 पेट्रोल के लिए वाहन निर्माताओं ने भी अपनी नई गाड़ियों में जरूरी तकनीकी बदलाव किए हैं। कई कंपनियां ऐसे इंजन तैयार कर रही हैं, जो इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने वाहनों में E20 के प्रभाव को लेकर अलग-अलग अनुभव हो सकते हैं, लेकिन नए वाहनों को इस ईंधन के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है।

पर्यावरण के लिहाज से फायदे

इथेनॉल मिश्रण का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण से जुड़ा बताया जा रहा है। सरकार और विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले इथेनॉल के कारण पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता भी कम हो सकती है।

आगे भी जारी रहेगा अध्ययन

E20 पेट्रोल को लेकर तकनीकी और उपभोक्ता स्तर पर अध्ययन आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे अधिक वाहन E20 के साथ इस्तेमाल किए जाएंगे, वैसे-वैसे इसके लंबे समय के प्रभावों को लेकर और जानकारी सामने आएगी।

फिलहाल IIT कानपुर की स्टडी ने E20 को लेकर उठ रही कई चिंताओं पर नई चर्चा शुरू कर दी है। रिसर्चर्स का दावा है कि मौजूदा आंकड़ों के आधार पर E20 पेट्रोल से बड़े पैमाने पर इंजन नुकसान या ईंधन दक्षता में भारी गिरावट की पुष्टि नहीं होती।

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