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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के कैंपियरगंज क्षेत्र से एक दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां मंगलवार, 27 अक्टूबर को लोहारपुरवा गांव के कोइरीपुरवा टोले में सड़क किनारे झाड़ियों में एक दिन की नवजात बच्ची पड़ी मिली। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीणों का ध्यान झाड़ियों की ओर गया। जब लोग आवाज सुनकर वहां पहुंचे, तो नवजात बच्ची को देखकर हैरान रह गए। ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को घटना की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को सुरक्षित निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कैंपियरगंज पहुंचाया। यहां प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के बाद बच्ची को आगे की देखभाल और संरक्षण के लिए गोरखपुर स्थित चाइल्ड केयर सेंटर भेज दिया गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मासूम को झाड़ियों में कौन और किन परिस्थितियों में छोड़कर गया था।
झाड़ियों से आ रही थी बच्ची के रोने की आवाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार को कैंपियरगंज क्षेत्र के लोहारपुरवा गांव के कोइरीपुरवा टोले में ग्रामीण अपने दैनिक कामकाज में व्यस्त थे।इसी दौरान सड़क किनारे झाड़ियों से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। पहले तो लोगों को समझ नहीं आया कि आवाज कहां से आ रही है।जब ग्रामीणों ने झाड़ियों की ओर जाकर देखा, तो वहां एक नवजात बच्ची पड़ी हुई थी।इतनी छोटी बच्ची को सुनसान स्थान पर देखकर लोग हैरान रह गए। बच्ची की उम्र महज एक दिन बताई जा रही है।ग्रामीणों ने बिना देर किए पुलिस को सूचना दी, ताकि बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
ग्रामीणों ने दिखाई तत्परता
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए।सड़क किनारे झाड़ियों में नवजात बच्ची मिलने से ग्रामीणों के बीच चिंता का माहौल बन गया।लोग यह जानने की कोशिश करने लगे कि आखिर इतनी छोटी बच्ची को यहां कौन छोड़कर गया होगा।हालांकि, इस संबंध में किसी व्यक्ति की पहचान होने की जानकारी सामने नहीं आई है।ग्रामीणों की सतर्कता इस मामले में महत्वपूर्ण रही। यदि बच्ची के रोने की आवाज पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता, तो उसे अधिक समय तक असुरक्षित परिस्थितियों में रहना पड़ सकता था।
पुलिस ने बच्ची को पहुंचाया अस्पताल
सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने बच्ची को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने की व्यवस्था की।नवजात को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैंपियरगंज ले जाया गया, जहां चिकित्सकीय जांच की गई।एक दिन की बच्ची के लिए उचित तापमान, पोषण और चिकित्सा देखभाल बेहद जरूरी होती है।ऐसे में अस्पताल पहुंचाना उसकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम था।प्राथमिक जांच के बाद बच्ची को गोरखपुर स्थित चाइल्ड केयर सेंटर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।हालांकि, बच्ची के स्वास्थ्य परीक्षण के विस्तृत परिणाम और उसे किसी विशेष उपचार की जरूरत पड़ी या नहीं, इसकी पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
चाइल्ड केयर सेंटर में होगी मासूम की देखभाल
गोरखपुर के चाइल्ड केयर सेंटर में बच्ची के संरक्षण की व्यवस्था की गई है।ऐसे केंद्रों का उद्देश्य देखभाल और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना होता है।नवजात शिशुओं को नियमित स्वास्थ्य निगरानी, उचित पोषण और साफ-सफाई की विशेष आवश्यकता होती है।यदि किसी बच्चे के माता-पिता या अभिभावक की पहचान नहीं हो पाती, तो संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।बाल संरक्षण की प्रक्रिया में बच्चे की सुरक्षा और उसके सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जाती है।इस मामले में बच्ची के भविष्य से संबंधित कोई भी निर्णय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाना चाहिए।
आखिर नवजात को झाड़ियों में किसने छोड़ा?
घटना सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल बच्ची की पहचान और उसे छोड़ने वाले व्यक्ति को लेकर है।अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बच्ची के माता-पिता कौन हैं और उसे सड़क किनारे झाड़ियों में क्यों छोड़ा गया।इसके पीछे की परिस्थितियों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।किसी पारिवारिक विवाद, आर्थिक परेशानी या बेटी होने के कारण बच्ची को छोड़े जाने जैसी संभावनाओं को बिना साक्ष्य के घटना की वजह नहीं माना जा सकता।यदि जांच में बच्ची को जानबूझकर असुरक्षित स्थान पर छोड़ने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।फिलहाल किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
नवजात बच्ची को खुले स्थान पर छोड़ना बेहद खतरनाक
चिकित्सकीय दृष्टि से जन्म के बाद शुरुआती दिन शिशु के लिए अत्यंत संवेदनशील होते हैं।इस दौरान नवजात को नियमित दूध, शरीर का उचित तापमान और संक्रमण से सुरक्षा की जरूरत होती है।खुले स्थान पर पड़े रहने से बच्चे को ठंड, गर्मी, कीड़े-मकोड़ों और अन्य बाहरी खतरों का सामना करना पड़ सकता है।इसके अलावा समय पर दूध नहीं मिलने से निर्जलीकरण और रक्त में शर्करा की कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।इसलिए किसी भी लावारिस नवजात के मिलने पर उसे तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
ग्रामीणों और पुलिस की तत्परता से बच्ची को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जाना इस दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।
बाल संरक्षण कानून के तहत होगी आगे की प्रक्रिया
भारत में देखभाल और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों के लिए किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत व्यवस्था की गई है।इसके अंतर्गत बाल कल्याण समिति बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।किसी लावारिस नवजात के मिलने पर उसकी पहचान, स्वास्थ्य और सुरक्षित संरक्षण से संबंधित प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं।यदि बच्चे के अभिभावकों का पता नहीं चलता, तो संबंधित अधिकारी निर्धारित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई करते हैं।बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया भी कानून के अनुसार ही पूरी की जा सकती है। किसी व्यक्ति को सीधे अपने स्तर पर बच्चा गोद लेने की अनुमति नहीं होती।
पहले भी गोरखपुर में सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
गोरखपुर जिले में झाड़ियों में नवजात मिलने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।इसी महीने 9 अक्टूबर को सिकरीगंज थाना क्षेत्र में लिंक एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन के पास झाड़ियों में कपड़े में लिपटी नवजात बच्ची मिली थी।उस समय धोबौली गांव निवासी अशोक कुमार साहनी ने बच्ची के रोने की आवाज सुनकर पुलिस को सूचना दी थी।बच्ची को अस्पताल पहुंचाने के बाद बाल संरक्षण केंद्र भेजा गया था।हालांकि, सिकरीगंज की वह घटना और कैंपियरगंज में मंगलवार को सामने आया मामला अलग-अलग हैं। दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
लावारिस बच्चा मिलने पर क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति को सड़क किनारे, झाड़ियों या किसी सार्वजनिक स्थान पर नवजात शिशु मिले, तो सबसे पहले उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।तत्काल पुलिस या आपातकालीन सहायता सेवा को सूचना देना जरूरी है।भारत में आपातकालीन सहायता के लिए 112 और बच्चों की सहायता के लिए 1098 हेल्पलाइन उपलब्ध है।नवजात को अनावश्यक रूप से इधर-उधर ले जाने के बजाय चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था करनी चाहिए।बच्चे की पहचान और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर अनावश्यक रूप से साझा करने से भी बचना चाहिए, ताकि उसकी गोपनीयता और सुरक्षा बनी रहे।
मासूम की पहचान और भविष्य पर सवाल
कैंपियरगंज के कोइरीपुरवा टोले में झाड़ियों में मिली बच्ची को सुरक्षित स्थान तक पहुंचा दिया गया है, लेकिन उसकी पहचान को लेकर कई सवाल अभी बाकी हैं।सबसे जरूरी है कि नवजात को लगातार उचित स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षित संरक्षण मिलता रहे।इसके साथ ही यह पता लगाना भी आवश्यक है कि उसे सड़क किनारे किसने और किन परिस्थितियों में छोड़ा था।
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