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India लिकटेंस्टीन संबंधों में बड़ा कदम, वित्तीय सेवाओं और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा
Ratna Netam
27 Oct 2026 8:33 PM IST

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नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। भारत और यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। भारत की राजकीय यात्रा पर आए लिकटेंस्टीन के हेरेडिटरी प्रिंस एलॉइस के साथ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी की मुलाकात कार्यक्रम में शामिल है। इस उच्चस्तरीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी नवाचार, वित्तीय सेवाओं और कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंगलवार को नई दिल्ली में प्रिंस एलॉइस के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
भारत दौरे पर लिकटेंस्टीन के हेरेडिटरी प्रिंस एलॉइस
लिकटेंस्टीन के कार्यवाहक राष्ट्राध्यक्ष हेरेडिटरी प्रिंस एलॉइस 25 से 28 अक्टूबर तक भारत की चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर हैं।उनके साथ उनकी पत्नी प्रिंसेस सोफी, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और प्रमुख उद्योगपतियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।प्रिंस एलॉइस ने अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई से की। इसके बाद उन्होंने गुजरात के वडोदरा का दौरा किया और सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे।दिल्ली हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है।
निर्मला सीतारमण के साथ वित्तीय सहयोग पर विशेष ध्यान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रिंस एलॉइस की निर्धारित मुलाकात को भारत और लिकटेंस्टीन के आर्थिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।लिकटेंस्टीन यूरोप का एक छोटा लेकिन आर्थिक रूप से विकसित देश है, जिसकी पहचान वित्तीय सेवाओं, आधुनिक विनिर्माण और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में है।भारत के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ने से दोनों देशों की कंपनियों को नए निवेश और व्यापारिक अवसर मिल सकते हैं।विशेष रूप से वित्तीय सेवाओं, औद्योगिक प्रौद्योगिकी और नवाचार आधारित उद्यमों में सहयोग की संभावनाएं हैं।हालांकि, इस मुलाकात में किसी विशिष्ट निवेश समझौते पर हस्ताक्षर होने की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
जयंत चौधरी ने सहयोग बढ़ाने की जताई उम्मीद
केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने प्रिंस एलॉइस के भारत आगमन का स्वागत किया।उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि दावोस में हुई पिछली मुलाकात के बाद वे भारत और लिकटेंस्टीन के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने के इच्छुक हैं।कौशल विकास और उद्यमिता दोनों देशों के लिए सहयोग के संभावित क्षेत्र हैं।लिकटेंस्टीन के उद्योगों में आधुनिक तकनीक और कुशल श्रमशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यावसायिक प्रशिक्षण, औद्योगिक कौशल और तकनीकी शिक्षा में साझेदारी की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।
राष्ट्रपति भवन में हुआ औपचारिक स्वागत
मंगलवार सुबह राष्ट्रपति भवन में प्रिंस एलॉइस का औपचारिक स्वागत किया गया।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद रहे।प्रिंस एलॉइस ने भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह यात्रा भारत के साथ संबंधों को लिकटेंस्टीन द्वारा दिए जा रहे महत्व को दर्शाती है।उन्होंने व्यापार, नवाचार, उन्नत विनिर्माण, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं का उल्लेख किया।
पीएम मोदी और प्रिंस एलॉइस के बीच द्विपक्षीय वार्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हैदराबाद हाउस में प्रिंस एलॉइस के साथ द्विपक्षीय बैठक की।इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार एवं निवेश, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा की।इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया।विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर विकसित करने में सहायक हो सकती है।
भारत-EFTA व्यापार समझौते से मिलेगी नई गति
भारत और लिकटेंस्टीन के आर्थिक संबंधों में भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते की महत्वपूर्ण भूमिका है।इस समझौते में लिकटेंस्टीन के अलावा स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और आइसलैंड शामिल हैं।वर्ष 2025 में समझौता लागू होने के बाद भारत और इन यूरोपीय देशों के बीच व्यापार एवं निवेश के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम शुरू हुआ।प्रिंस एलॉइस ने भी इस समझौते को भारत-लिकटेंस्टीन संबंधों में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश अपनी आर्थिक क्षमताओं का उपयोग करके दीर्घकालिक साझेदारी विकसित कर सकते हैं।
भारत-लिकटेंस्टीन संबंधों को मिलेगी मजबूती
यह वर्ष 2026 में प्रिंस एलॉइस की दूसरी भारत यात्रा है। इससे पहले उन्होंने फरवरी में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में भाग लिया था।वे वर्ष 2010 और 2018 में भी भारत आ चुके हैं।राजकीय यात्रा के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी को राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित की और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की।दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे उच्चस्तरीय संपर्क से व्यापार, निवेश, शिक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में नए सहयोग की संभावनाएं बन रही हैं।
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