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कानपुर। उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी परियोजना आगे बढ़ रही है। कानपुर से झांसी के बीच मौजूदा चार लेन हाईवे को छह लेन में बदलने की तैयारी तेज हो गई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI ने कानपुर देहात के बारा जोड़ से उरई तक के हिस्से को छह लेन करने की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी DPR तैयार कर ली है। रिपोर्ट को मंजूरी के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया की दिशा में काम आगे बढ़ सकेगा।
परियोजना पूरी होने के बाद कानपुर से झांसी के बीच यात्रा करने वाले हजारों वाहन चालकों को फायदा मिलने की उम्मीद है। हाईवे पर वाहनों का लगातार बढ़ता दबाव कम होगा और कई स्थानों पर लगने वाले जाम से राहत मिल सकती है। इसके अलावा बुंदेलखंड की कानपुर, ग्वालियर और भोपाल की तरफ सड़क कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
फिलहाल परियोजना को अलग-अलग हिस्सों में आगे बढ़ाया जा रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक बारा से उरई तक लगभग 62.67 किलोमीटर हिस्से की DPR तैयार है। उरई से झांसी तक के हिस्से के लिए भी सर्वे और परियोजना संबंधी प्रक्रिया चल रही है।
चार से छह लेन का होगा मौजूदा हाईवे
कानपुर-झांसी हाईवे अभी मुख्य रूप से चार लेन का है। आने वाले समय में इसी मौजूदा कॉरिडोर को चौड़ा करके छह लेन किया जाना प्रस्तावित है।
NHAI के मुताबिक यह ब्राउनफील्ड परियोजना होगी। इसका अर्थ है कि पूरी तरह अलग नया रास्ता बनाने के बजाय मौजूदा हाईवे का ही विस्तार किया जाएगा।
वर्तमान सड़क की चौड़ाई करीब 21.5 मीटर है। इसे बढ़ाकर लगभग 32.5 मीटर करने का प्रस्ताव है। इससे दोनों दिशाओं में वाहनों के लिए अतिरिक्त लेन उपलब्ध होगी और यातायात की क्षमता बढ़ेगी।
पहले हिस्से पर खर्च होंगे करीब 3825 करोड़
बारा से उरई तक 62.67 किलोमीटर हाईवे के छह लेन चौड़ीकरण पर करीब **3824.77 करोड़ रुपये** खर्च होने का अनुमान है।
यह आंकड़ा DPR में प्रस्तावित लागत से जुड़ा है। मंत्रालय की मंजूरी और आगे की निविदा प्रक्रिया के दौरान अंतिम परियोजना लागत में बदलाव संभव है।
NHAI के पास हाईवे के किनारे ज्यादातर हिस्सों में पहले से जमीन उपलब्ध होने की बात कही गई है। इससे बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता सीमित हो सकती है।
हालांकि कुछ स्थानों पर अतिरिक्त जमीन की जरूरत पड़ेगी।
उरई के करीब 10 गांवों में जमीन की जरूरत
बारा से उरई के बीच हाईवे चौड़ा करने के दौरान उरई क्षेत्र के करीब 10 गांवों में भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक हाईवे के किनारे करीब दो से चार मीटर तक अतिरिक्त जमीन कुछ स्थानों पर ली जा सकती है।
क्योंकि मौजूदा हाईवे के आसपास NHAI के पास पहले से काफी जमीन उपलब्ध है, इसलिए परियोजना में पूरी सड़क के लिए नए सिरे से जमीन लेने जैसी स्थिति नहीं होगी।
भूमि अधिग्रहण की वास्तविक सीमा अंतिम डिजाइन और सरकारी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
कालपी में बनेगा नया ओवरब्रिज
इस परियोजना में केवल सड़क चौड़ी करना ही शामिल नहीं है। ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए कई नई संरचनाओं का भी प्रस्ताव है।
कालपी में एक नया ओवरब्रिज बनाए जाने की योजना है। प्रस्तावित नया ओवरब्रिज मौजूदा पुराने ओवरब्रिज से जोड़ा जाएगा।
कालपी इस हाईवे का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां यातायात का दबाव अधिक रहता है। नया ढांचा तैयार होने से वाहनों की आवाजाही आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा घनी आबादी वाले इलाकों में वाहनों और स्थानीय लोगों की सुरक्षित आवाजाही का भी ध्यान रखा जा रहा है।
चार जगह बनेंगे अंडरपास
बारा-उरई हिस्से की योजना में घनी आबादी वाले चार स्थानों पर अंडरपास प्रस्तावित किए गए हैं।
हाईवे चौड़ा होने के बाद तेज गति से चलने वाले वाहनों और स्थानीय यातायात के बीच टकराव का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में अंडरपास स्थानीय लोगों, छोटे वाहनों और जरूरत के अनुसार दूसरी आवाजाही को मुख्य हाईवे से अलग रखने में मदद करते हैं।
इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होने के साथ मुख्य हाईवे पर वाहनों को बार-बार रुकने की जरूरत भी कम हो सकती है।
क्यों जरूरी हुआ छह लेन करना?
कानपुर-झांसी हाईवे पर पिछले कुछ वर्षों में वाहनों का दबाव तेजी से बढ़ा है। इसके आसपास आबादी और व्यावसायिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।
NHAI के मुताबिक कानपुर-आगरा हाईवे से गुजरने वाले वाहनों का एक बड़ा हिस्सा झांसी की तरफ मुड़ता है। यह मार्ग झांसी और ललितपुर से आगे मध्य प्रदेश की ओर जाने वाले यातायात के लिए भी महत्वपूर्ण है।
झांसी से शिवपुरी और ग्वालियर की कनेक्टिविटी होने के साथ भोपाल की तरफ जाने वाले वाहनों के लिए भी यह महत्वपूर्ण सड़क मार्ग है।
इसी कारण भविष्य के ट्रैफिक लोड को देखते हुए मौजूदा चार लेन सड़क की क्षमता बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई है।
हजारों वाहन रोज करते हैं सफर
कानपुर और झांसी के बीच यह हाईवे यात्री वाहनों के साथ मालवाहक ट्रकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
पुराने सर्वे के मुताबिक पूरे कॉरिडोर पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। भारी वाहनों के कारण कई हिस्सों में ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है।
छह लेन होने से वाहनों के लिए ज्यादा जगह उपलब्ध होगी। खासकर भारी ट्रकों और यात्री वाहनों के बीच गति के अंतर के कारण पैदा होने वाली ट्रैफिक समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है।
हालांकि वास्तविक यात्रा समय कितना घटेगा, इसका आधिकारिक आंकड़ा परियोजना पूरी होने और संचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
बुंदेलखंड को मिलेगा बड़ा फायदा
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा बुंदेलखंड क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है।
झांसी और आसपास के क्षेत्र उत्तर प्रदेश को मध्य प्रदेश से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण प्रवेश मार्ग हैं। सड़क क्षमता बढ़ने से औद्योगिक और व्यापारिक यातायात को फायदा मिल सकता है।
उरई, झांसी और आसपास के शहरों से कानपुर की ओर आने-जाने वाले लोगों का सफर भी अधिक सुगम हो सकता है।
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का फायदा केवल यात्रियों को नहीं बल्कि स्थानीय उद्योग, कृषि उत्पादों की ढुलाई और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी मिलता है।
मालवाहक वाहनों का समय कम होने और ट्रैफिक बाधाएं घटने से परिवहन व्यवस्था ज्यादा कुशल हो सकती है।
औद्योगिक कॉरिडोर की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
कानपुर से बुंदेलखंड की तरफ सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दूसरी बड़ी परियोजनाओं पर भी काम हो रहा है।
केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में **117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबरई एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे** को मंजूरी दी थी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 7,145.14 करोड़ रुपये है। इसे भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
कानपुर-कबरई कॉरिडोर और कानपुर-झांसी मार्ग की बेहतर क्षमता मिलकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को और मजबूत कर सकती है।
केंद्र के मुताबिक कानपुर-कबरई परियोजना से औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि उत्पादक इलाकों और खनिज संपदा वाले बुंदेलखंड को बड़े बाजारों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
सड़क सुरक्षा पर भी रहेगा फोकस
कानपुर-झांसी हाईवे को छह लेन करने के पीछे केवल ट्रैफिक क्षमता बढ़ाना उद्देश्य नहीं है। सड़क सुरक्षा भी महत्वपूर्ण वजह है।
हाईवे के किनारे कई स्थानों पर आबादी बढ़ने के कारण स्थानीय और लंबी दूरी के यातायात का मिश्रण होता है। इससे दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
अंडरपास, ओवरब्रिज और दूसरी संरचनाओं के जरिए मुख्य हाईवे के यातायात को स्थानीय आवागमन से अलग करने की कोशिश होगी।
छह लेन सड़क पर बेहतर लेन प्रबंधन भी भारी और हल्के वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है।
उरई से झांसी तक भी चल रही प्रक्रिया
पूरी परियोजना को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी सभी हिस्सों की प्रक्रिया एक ही चरण में नहीं है।
बारा से उरई के बीच DPR तैयार कर मंत्रालय को भेजी जा चुकी है। वहीं उरई से झांसी की तरफ भी सर्वे और DPR संबंधी प्रक्रिया अलग परियोजना इकाई के स्तर पर आगे बढ़ रही है।
इससे पहले झांसी से उरई के बीच मिट्टी की जांच और भौतिक परीक्षण भी किए गए थे। NHAI ने इस हिस्से के लिए कंसलटेंसी एजेंसी के जरिए सर्वे कराया है।
इसलिए यह कहना कि पूरे कानपुर से झांसी तक छह लेन हाईवे का निर्माण तुरंत शुरू होने जा रहा है, अभी जल्दबाजी होगी।
मंजूरी के बाद शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया
बारा से उरई तक की DPR अब केंद्रीय मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है।
NHAI के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल के मुताबिक मौजूदा हाईवे को ही चौड़ा करने का प्रस्ताव है और ज्यादातर स्थानों पर आवश्यक जमीन उपलब्ध है। मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके बाद निर्माण एजेंसी का चयन और दूसरी औपचारिकताएं पूरी होंगी।
यानी DPR तैयार होना परियोजना का महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर है, लेकिन वास्तविक निर्माण शुरू होने से पहले अभी मंत्रालय की मंजूरी और टेंडर जैसी प्रक्रियाएं बाकी हैं।
कानपुर से झांसी का सफर होगा बेहतर
परियोजना पूरी होने के बाद कानपुर से उरई और झांसी की ओर जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
छह लेन सड़क से हाईवे की वाहन क्षमता बढ़ेगी। जाम वाले स्थानों पर नए अंडरपास और ओवरब्रिज यातायात को व्यवस्थित करने में मदद कर सकते हैं।
इसका फायदा निजी वाहन चालकों के साथ बस, ट्रक और दूसरे व्यावसायिक वाहनों को भी मिलेगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह हाईवे बुंदेलखंड को कानपुर और आगे उत्तर प्रदेश के दूसरे बड़े शहरों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है।
फिलहाल **बारा से उरई तक 62.67 किलोमीटर हिस्से की DPR तैयार है और इसे मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा गया है।** मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके साथ उरई से झांसी तक के हिस्से की प्रक्रिया भी चल रही है।
अगर योजना तय रूप में आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में कानपुर-झांसी कॉरिडोर की तस्वीर बदल सकती है और हजारों यात्रियों के साथ व्यापार तथा माल परिवहन को भी इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
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