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New Delhi: पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में कमी

नई दिल्ली: पंजाब और हरियाणा में इस साल पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे दिल्ली-NCR में आसमान अपेक्षाकृत साफ रहा है और वायु गुणवत्ता में सुधार आया है। जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य सरकार ने 12 दिसंबर को जारी एक बयान में कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 2025 में खेतों में आग लगाने की 5,114 घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2021 की तुलना में 93 प्रतिशत तक कम है।
पराली जलाने में भारी कमी
हरियाणा में इसके 662 मामले सामने आए, जो 91 प्रतिशत कम हैं। कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन ऐग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (CREAMS) प्रयोगशाला से प्राप्त उपग्रह आंकड़ों ने धान की पराली जलाने में भारी कमी का संकेत दिया है, जो 57 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। यहां 2023 में इसके कुल 42,962 मामले थे, जो 2024 में घटकर 18,457 हो गए। कई जिलों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
NCR की वायु गुणवत्ता में सुधार
बयान में कहा गया है कि संगरूर में पराली जलाने की घटनाओं में 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जहां 2025 में 693 मामले सामने आए, जबकि फिरोजपुर में 59 प्रतिशत और मुक्तसर में 55 प्रतिशत की कमी देखी गई। खेतों में आग लगाने की 685 और बठिंडा में 368 घटनाएं सामने आई। इन दोनों में भी पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। हरियाणा में सबसे ज्यादा मामले जींद (47), फतेहाबाद (28) और कैथल (27) से थे। खेतों में आग लगाने की घटनाओं में कमी आने से दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है।
AQI में आया सुधार
आंकड़ों के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 200 से नीचे रहने वाले दिनों की संख्या 2016 में 110 दिन थी जो 2025 में बढ़कर 200 दिन हो गई है। विशेषज्ञों के हवाले से बयान में कहा गया है कि यह सुधार सरकारी नीतियों, किसानों में जागरूकता, नयी कृषि पद्धतियों के उपयोग और निजी क्षेत्र की पहलों का परिणाम है। अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने वाली कंपनियां किसानों को फसलों के अवशेषों को खेतों में जलाने के बजाय नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लिए उनका उपयोग करने में मदद कर रही हैं।





