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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में पद्मश्री डॉ. टीके लाहिड़ी के साथ कथित मारपीट का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। घटना की जांच के लिए बीएचयू और जिला प्रशासन की ओर से कमेटी गठित की गई थी, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. ओमशंकर ने एक वीडियो जारी कर मामले को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रोफेसर ओमशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि घटना के समय मौजूद एक चश्मदीद ने उन्हें पूरी जानकारी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि 29 अगस्त 2026 को सुबह करीब 11 बजे डॉ. अरविंद पांडे ने डॉ. टीके लाहिड़ी के साथ कथित रूप से मारपीट की।
डॉ. ओमशंकर के अनुसार, चश्मदीद ने उन्हें बताया कि डॉ. लाहिड़ी के साथ थप्पड़ और घूंसों से मारपीट की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार
बीएचयू और जिला प्रशासन ने घटना की जांच के लिए अलग-अलग स्तर पर कमेटी का गठन किया था। जांच का उद्देश्य घटना के वास्तविक कारणों और उससे जुड़े तथ्यों का पता लगाना था।
लेकिन अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इसी वजह से मामले को लेकर विश्वविद्यालय परिसर और चिकित्सा जगत में चर्चा बनी हुई है।
डॉ. ओमशंकर का दावा
प्रोफेसर डॉ. ओमशंकर ने अपने वीडियो और पोस्ट में कहा कि घटना के समय डॉ. टीके लाहिड़ी की स्थिति सामान्य थी। उन्होंने दावा किया कि डॉ. लाहिड़ी स्वस्थ महसूस कर रहे थे और घर जाने की इच्छा भी जता रहे थे।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने खुद डॉ. लाहिड़ी से मुलाकात की थी और उन्हें किसी तरह के मनोरोग संबंधी लक्षण दिखाई नहीं दिए।
डॉ. ओमशंकर ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
बीएचयू से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक हैं डॉ. टीके लाहिड़ी
डॉ. टीके लाहिड़ी चिकित्सा क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। वह बीएचयू के चिकित्सा क्षेत्र से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं।
उनसे जुड़ी घटना सामने आने के बाद विश्वविद्यालय और चिकित्सा समुदाय में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। कई लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
आरोपों पर स्थिति स्पष्ट नहीं
मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से दावे सामने आ रहे हैं। जहां डॉ. ओमशंकर ने चश्मदीद के हवाले से आरोप लगाए हैं, वहीं जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की वास्तविक स्थिति क्या थी।
प्रशासनिक स्तर पर जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो पाएगा। फिलहाल सभी की नजर बीएचयू और जिला प्रशासन की ओर से आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने चुनौती
बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह के आरोपों के सामने आने के बाद प्रशासन के सामने पारदर्शी जांच और तथ्यों को सामने रखने की चुनौती है।
विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि मामले में जल्द जांच रिपोर्ट जारी होनी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो और वास्तविक तथ्यों की जानकारी सामने आ सके।
फिलहाल डॉ. टीके लाहिड़ी से जुड़े कथित मारपीट मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। प्रोफेसर ओमशंकर के आरोपों के बाद मामले में नई बहस शुरू हो गई है। अब जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है।





