उत्तर प्रदेश

भाखड़ा बांध पर बढ़ा खतरा तटबंध टूटा

Kavita2
21 Sept 2026 2:10 PM IST
भाखड़ा बांध पर बढ़ा खतरा तटबंध टूटा
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बिलासपुर। ऐतिहासिक भाखड़ा नदी बांध को बचाने के लिए पिछले एक सप्ताह से जारी प्रशासन और नहर विभाग की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। नदी के तेज बहाव को रोकने और उसे दूसरी दिशा में मोड़ने के लिए बनाया गया अस्थाई तटबंध (काफर डैम) पानी के अत्यधिक दबाव को नहीं झेल सका और टूट गया।

तटबंध टूटने के बाद नदी का जलप्रवाह एक बार फिर बांध के मुख्य हिस्से की ओर मुड़ गया है। इससे पहले जिस रिसाव को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे थे, वह दोबारा तेज हो गया है। स्थिति को देखते हुए बांध की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, भाखड़ा नदी बांध में बढ़ते रिसाव को रोकने के लिए नहर विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम लगातार काम कर रही थी। अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिन-रात मेहनत कर नदी की धारा को मोड़ने के लिए काफर डैम तैयार किया था।

इस अस्थाई तटबंध का उद्देश्य नदी के पानी के दबाव को कम करना और जलप्रवाह को मुख्य बांध संरचना से दूर करना था। शुरुआत में इसके सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दिए थे और रिसाव पर कुछ हद तक नियंत्रण होने की उम्मीद जगी थी।

लेकिन नदी में पानी का दबाव लगातार बढ़ता गया। तेज बहाव के कारण काफर डैम की संरचना कमजोर पड़ने लगी और आखिरकार वह टूट गया। तटबंध टूटने के साथ ही नदी की धारा फिर से पुराने रास्ते पर लौट आई और बांध के मुख्य हिस्से की ओर बहने लगी।

इस घटनाक्रम के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों के सामने अब नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने और बांध की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

बांध क्षेत्र में स्थिति पर नजर रखने के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीमें सक्रिय हैं। तकनीकी विशेषज्ञ बांध की मौजूदा स्थिति का आकलन कर रहे हैं और आगे की रणनीति तैयार की जा रही है।

स्थानीय लोगों में भी चिंता का माहौल है। ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस बांध से आसपास के क्षेत्रों के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। लोग प्रशासन से जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नदी के तेज बहाव और लगातार जल दबाव के बीच किसी भी अस्थाई संरचना को लंबे समय तक टिकाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में स्थायी समाधान के लिए तकनीकी अध्ययन और मजबूत योजना की जरूरत होती है।

प्रशासन की ओर से पहले भी कई स्तरों पर बचाव कार्य किए गए हैं। भारी मशीनरी और संसाधनों की मदद से नदी की दिशा बदलने तथा रिसाव रोकने का प्रयास किया गया था।

काफर डैम टूटने के बाद अब नए सिरे से स्थिति का मूल्यांकन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बांध की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

इस घटना ने एक बार फिर पुराने जल ढांचों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। समय के साथ ऐसे बांधों की नियमित जांच और मजबूतीकरण जरूरी माना जाता है, ताकि आपात स्थिति से बचा जा सके।

फिलहाल भाखड़ा नदी बांध क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन और नहर विभाग की टीमें मौके पर मौजूद हैं और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं।

अब आगे की कार्रवाई विशेषज्ञों की रिपोर्ट और मौके की स्थिति के आधार पर तय की जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती नदी के बहाव को नियंत्रित करना और बांध के मुख्य हिस्से को सुरक्षित रखना है।

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