उत्तर प्रदेश

महराजगंज में साइबर ठगी का नया मामला, खातों में पहुंची रकम बनी मुसीबत

Saba Naaz
17 July 2026 5:14 PM IST
महराजगंज में साइबर ठगी का नया मामला, खातों में पहुंची रकम बनी मुसीबत
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महराजगंज। साइबर अपराधियों के नेटवर्क का एक नया मामला सामने आया है, जिसमें गुजरात और महाराष्ट्र में हुई साइबर ठगी की रकम उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले की तीन महिलाओं के बैंक खातों में पहुंच गई। जांच में सामने आया कि करीब 1.40 लाख रुपये की ठगी की रकम इन खातों में ट्रांसफर की गई थी और इसमें से कुछ धनराशि एटीएम के माध्यम से निकाली भी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तीनों महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस ने यह कार्रवाई साइबर अपराधों की निगरानी के लिए बनाए गए प्रतिबिंब पोर्टल पर मिले संदिग्ध मोबाइल नंबरों, एटीएम हॉटस्पॉट और साइबर शिकायतों के आधार पर की है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल जानबूझकर किया गया या फिर खाताधारक किसी बड़े साइबर गिरोह के जाल में फंसे हुए हैं।

मामले की शुरुआत गुजरात के गांधीनगर जिले के थाना कालोल क्षेत्र निवासी भवेश भाई की शिकायत से हुई। उन्होंने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के दौरान साइबर पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम में से 50 हजार रुपये और 41,800 रुपये की धनराशि जियो पेमेंट बैंक के दो अलग-अलग खातों में भेजी गई थी।

बैंक रिकॉर्ड और केवाईसी जांच में सामने आया कि ये दोनों खाते महराजगंज जिले के घुघली थाना क्षेत्र के रामपुर महुअवा निवासी सुनीता और मीरा के नाम पर हैं। पुलिस के अनुसार, इन खातों से धनराशि की निकासी भी की गई है। सुनीता के खाते से 50 हजार रुपये और मीरा के खाते से 32,800 रुपये एटीएम के माध्यम से निकाले गए। इन निकासी की लोकेशन प्रतिबिंब पोर्टल पर संदिग्ध एटीएम हॉटस्पॉट के रूप में दर्ज मिली।

वहीं, महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के थाना वालूंग क्षेत्र के शिवाजीनगर निवासी मंगेश परमेश्वर हेंडरे की साइबर ठगी शिकायत की जांच में भी महराजगंज कनेक्शन सामने आया। जांच में पता चला कि ठगी के 50 हजार रुपये जियो पेमेंट बैंक के एक खाते में जमा हुए थे। इस खाते से 40 हजार रुपये एटीएम के जरिए निकाले गए। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार यह खाता घुघली क्षेत्र के आंबेडकर नगर वार्ड नंबर-3 निवासी मंजू के नाम पर है।

साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, तीनों खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में किया गया है। हालांकि पुलिस अभी यह जांच कर रही है कि खाताधारकों की भूमिका क्या थी। क्या उन्होंने जानबूझकर अपने खाते उपलब्ध कराए या फिर किसी बहाने से उनके खाते का इस्तेमाल साइबर अपराधियों ने किया, इसकी पड़ताल की जा रही है।

साइबर क्राइम थाना प्रभारी सजनू यादव ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों और एटीएम हॉटस्पॉट की लगातार निगरानी की जा रही है। जांच के दौरान इन खातों में साइबर ठगी की रकम पहुंचने और निकासी के प्रमाण मिले हैं। इसी आधार पर तीनों महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस अब साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि रकम किस व्यक्ति ने जमा कराई, एटीएम से पैसा निकालने वाला कौन था और इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल हैं। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधों में अक्सर अपराधी दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें मनी ट्रांसफर के लिए किराये पर लिया जाता है। ऐसे मामलों में खाताधारकों की भूमिका की जांच बेहद जरूरी होती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग से जुड़ी जानकारी उपलब्ध न कराएं, क्योंकि इसका इस्तेमाल साइबर अपराध में किया जा सकता है।

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