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Ayodhya से शंकराचार्य का संदेश, गोरक्षा की गारंटी देने वालों को मिलेगा वोट

Ayodhya अयोध्या : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने देश में गोरक्षा कानून नहीं बनने और अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पर नाराजगी जताई है। शुक्रवार को अयोध्या में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हिंदू समाज उन राजनीतिक दलों को जवाब दे, जो गाय माता के नाम पर केवल राजनीति करते हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि गायों की रक्षा करना सनातन परंपरा और हिंदू समाज का महत्वपूर्ण कर्तव्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस देश में बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग रहते हैं, वहां आज भी गायों की सुरक्षा को लेकर कोई प्रभावी केंद्रीय कानून क्यों नहीं बनाया गया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आजादी से पहले सनातन समाज से यह वादा किया गया था कि स्वतंत्र भारत में गोरक्षा के लिए सख्त कानून बनाया जाएगा। लेकिन आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी देश में ऐसा कोई व्यापक कानून नहीं बन पाया है, जिससे पूरे देश में गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि गाय को भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था में विशेष स्थान दिया गया है। ऐसे में केवल चुनावों के दौरान गाय के नाम पर बातें करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दलों से मांग की कि वे इस विषय पर गंभीरता दिखाएं और गोरक्षा के लिए ठोस कदम उठाएं।
शंकराचार्य ने अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने मंदिर से जुड़े प्रशासनिक व्यवस्थाओं और संचालन को लेकर सवाल उठाए और कहा कि मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा विषय है। इसलिए इसकी व्यवस्था में पारदर्शिता और धार्मिक मर्यादाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के बाद देश और दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था अयोध्या से जुड़ी है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर सभी पक्षों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।
शंकराचार्य ने हिंदू समाज से भी अपील की कि वे अपने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर जागरूक रहें। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे लोगों और संस्थाओं का समर्थन करना चाहिए जो वास्तव में धर्म, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था से जुड़े विषयों पर केवल बयानबाजी नहीं बल्कि व्यवहारिक स्तर पर काम करने की आवश्यकता है। गोरक्षा जैसे मुद्दों पर समाज और सरकार दोनों को मिलकर प्रयास करने चाहिए।
शंकराचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई है। गोरक्षा कानून और राम मंदिर प्रबंधन को लेकर उनके सवालों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। वहीं, उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और समाज की भावनाओं को सामने रखा है।





