उत्तर प्रदेश

मछली पालन से आत्मनिर्भर बने मां-बेटे, बढ़ी लाखों की आय

Ashish verma
12 July 2026 7:42 PM IST
मछली पालन से आत्मनिर्भर बने मां-बेटे, बढ़ी लाखों की आय
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अमरोहा। मेहनत, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले तो सफलता की राह आसान हो जाती है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के ढ्योटी गांव की रहने वाली नन्ही और उनके बेटे जीशान ने इसे साबित कर दिखाया है। कभी गन्ने की खेती और मधुमक्खी पालन से सीमित आमदनी करने वाला यह परिवार अब मछली पालन के जरिए हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रहा है।

नन्ही और उनके बेटे जीशान ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर मछली पालन का व्यवसाय शुरू किया। योजना के तहत उन्हें ऋण और सब्सिडी का लाभ मिला, जिससे उन्होंने अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिली। शुरुआत में उन्होंने करीब 15 हजार मछलियों के साथ पालन शुरू किया था, लेकिन अपनी मेहनत और बेहतर प्रबंधन के दम पर आज वह 1.25 लाख से अधिक मछलियों का सफल पालन कर रहे हैं।

अमरोहा के मंडी धनौरा ब्लाक क्षेत्र के ढ्योटी गांव निवासी नन्ही बताती हैं कि मछली पालन शुरू करने से पहले उनका परिवार गन्ने की खेती और मधुमक्खी पालन करता था। उनके बेटे जीशान ने करीब 20 साल तक इन कामों में मेहनत की, लेकिन उम्मीद के अनुसार आर्थिक लाभ नहीं मिल सका। खेती में बढ़ती लागत और कम मुनाफे के कारण परिवार ने नए विकल्प की तलाश शुरू की।

वर्ष 2023-24 में गांव के कुछ लोगों से उन्हें मछली पालन के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। सरकारी योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आवेदन किया और जरूरी सहायता प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने तालाब तैयार कर मछली पालन शुरू किया।

नन्ही और जीशान ने शुरुआत छोटे स्तर से की, लेकिन धीरे-धीरे अपने अनुभव और मेहनत से उत्पादन बढ़ाते गए। मछलियों की देखभाल, समय पर दाना देना, पानी की गुणवत्ता बनाए रखना और वैज्ञानिक तरीके अपनाने से उन्हें बेहतर परिणाम मिलने लगे। आज उनका मछली पालन व्यवसाय एक सफल मॉडल बन गया है।

मछली पालन से उन्हें सालाना करीब 10 से 15 लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है। इस सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि गांव के अन्य लोगों को भी इस व्यवसाय के लिए प्रेरित किया है। नन्ही का कहना है कि अगर सही जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य देश में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देना, मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाना तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। नन्ही और जीशान की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर ग्रामीण परिवार अपनी आर्थिक स्थिति बदल सकते हैं।

आज नन्ही और जीशान का सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो पारंपरिक कामों से आगे बढ़कर नए व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। 15 हजार मछलियों से शुरू हुआ उनका सफर अब सवा लाख मछलियों तक पहुंच चुका है और उनकी सफलता ग्रामीण उद्यमिता की एक मिसाल बन गई है।

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