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हवा की गुणवत्ता जांचने के लिए ग्रेटर नोएडा में बढ़ेंगे मॉनिटरिंग स्टेशन

ग्रेटर नोएडा। वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए ग्रेटर नोएडा में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शहर में सात नए कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (सीएएक्यूएमएस) स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। इन स्टेशनों के शुरू होने के बाद शहर में हवा की गुणवत्ता की रियल टाइम निगरानी और बेहतर तरीके से की जा सकेगी।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नए स्टेशनों को ग्रेप (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू होने से पहले चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। सर्दियों के मौसम में बढ़ने वाले प्रदूषण को देखते हुए इन स्टेशनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अभी ग्रेटर नोएडा में केवल दो एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन संचालित हैं। शहर में तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और वाहनों की संख्या को देखते हुए यह संख्या पर्याप्त नहीं मानी जा रही थी। नए सात स्टेशन स्थापित होने के बाद प्रदूषण के स्तर की निगरानी का दायरा बढ़ जाएगा और अलग-अलग क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता का सटीक आंकलन किया जा सकेगा।
नए प्रस्तावित एयर क्वालिटी स्टेशन डीएमआईसी, गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय, नवोदय विद्यालय दादरी, शिव नादर यूनिवर्सिटी दादरी, गौड़ यमुना सिटी दनकौर सहित अन्य स्थानों पर लगाए जाएंगे। सातवें स्टेशन के लिए अभी जमीन की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानों का चयन इस तरह किया गया है, ताकि शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण के स्तर को सही तरीके से मापा जा सके।
इसके अलावा यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी प्रदूषण निगरानी को लेकर कदम उठाए गए हैं। यमुना प्राधिकरण ने अपने कार्यालय परिसर के पास दो एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक स्टेशन स्थापित किया है। हालांकि अभी इन स्टेशनों को सीएक्यूएम नेटवर्क से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसके लिए यमुना प्राधिकरण की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखने के लिए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में पूरे एनसीआर क्षेत्र में 84 सीएएक्यूएमएस संचालित हैं। अब इसमें 27 नए स्टेशन और जोड़े जाएंगे। इससे प्रदूषण के आंकड़े जुटाने और प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
नए स्टेशनों के जुड़ने से उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था और मजबूत होगी। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में 18 स्टेशन काम कर रहे हैं। इनमें ग्रेटर नोएडा के सात नए स्टेशन शामिल होंगे। इसके अलावा दिल्ली में छह, हरियाणा में सात और राजस्थान में चार नए स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण के लिए सबसे जरूरी है कि हवा की गुणवत्ता से जुड़े सही और समय पर आंकड़े उपलब्ध हों। रियल टाइम मॉनिटरिंग से प्रदूषण बढ़ने वाले क्षेत्रों की पहचान आसानी से हो सकेगी और प्रशासन समय रहते कदम उठा सकेगा। खासकर सर्दियों में जब पराली, धूल, वाहन प्रदूषण और मौसम की स्थिति के कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है, तब यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित होगी।
ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक क्षेत्र, निर्माण गतिविधियां और बढ़ता ट्रैफिक वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में नए एयर क्वालिटी स्टेशन प्रशासन को प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने और नियंत्रण उपाय लागू करने में मदद करेंगे।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग का लक्ष्य है कि एक नवंबर से शुरू होने वाले ग्रेप से पहले सभी नए स्टेशन पूरी तरह तैयार हो जाएं। इससे आने वाले प्रदूषण के मौसम में शहर की हवा पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और लोगों को बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।





