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उत्तर प्रदेश
स्कूल में बंद था भोजन योजना का काम खाते में पहुंचते रहे पैसे
Ratna Netam
28 Aug 2026 4:15 PM IST

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उत्तर प्रदेश : बलिया जिले में मिड-डे मील (MDM) योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस स्कूल में कथित तौर पर करीब दो साल से बच्चों के लिए खाना नहीं बनाया गया, वहां सरकारी रिकॉर्ड में लगातार भोजन बनने का दावा किया जाता रहा और करीब 14 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। मामले का खुलासा जिलाधिकारी (DM) के निर्देश पर हुई जांच के बाद हुआ।
यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। जांच में सामने आया कि कागजों पर मिड-डे मील योजना सुचारू रूप से चलती दिखाई गई, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही थी। बच्चों को मिलने वाले भोजन के नाम पर लंबे समय तक भुगतान होता रहा, जबकि स्कूल में भोजन व्यवस्था बंद पड़ी थी।
बच्चों की शिकायत से खुला बड़ा खेल
जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले का खुलासा बच्चों की जागरूकता के कारण हुआ। स्कूल के कुछ बच्चों ने समस्या को लेकर जिलाधिकारी को पत्र लिखा। बच्चों को DM का पता नहीं पता था, इसलिए उन्होंने इंटरनेट की मदद से जानकारी जुटाई और अपनी शिकायत प्रशासन तक पहुंचाई। बच्चों की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दिए।
जांच शुरू होने के बाद अधिकारियों की टीम ने स्कूल पहुंचकर रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच की। इस दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। रिकॉर्ड में जिस तरह से मिड-डे मील संचालन दिखाया गया था, वह वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खा रहा था।
कागजों में बनता रहा खाना
मिड-डे मील योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। इसके लिए सरकार की ओर से स्कूलों को खाद्यान्न और भोजन तैयार करने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन इस मामले में आरोप है कि योजना के नियमों को दरकिनार कर कागजों में भोजन बनता दिखाया गया और भुगतान जारी होता रहा।
बताया जा रहा है कि करीब दो वर्षों तक स्कूल में भोजन नहीं बनने के बावजूद रिकॉर्ड में नियमित रूप से भोजन वितरण दर्ज किया गया। इसके आधार पर करीब 14 लाख रुपये की राशि का भुगतान कर दिया गया।
जांच के बाद कार्रवाई की तैयारी
मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जो भी व्यक्ति इस अनियमितता में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच टीम स्कूल के दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड, उपस्थिति रजिस्टर और मिड-डे मील से जुड़े अन्य कागजातों की जांच कर रही है। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि भुगतान की प्रक्रिया में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही।
सरकारी योजना में भ्रष्टाचार पर सवाल
मिड-डे मील योजना देशभर में करोड़ों बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में अगर किसी स्कूल में लंबे समय तक भोजन नहीं बनता और फिर भी भुगतान जारी रहता है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण और सोशल ऑडिट जरूरी है। सिर्फ कागजी रिकॉर्ड के आधार पर योजनाओं का संचालन नहीं किया जा सकता।
बच्चों की सतर्कता बनी मिसाल
इस मामले में सबसे खास बात यह रही कि बच्चों ने अपनी समस्या को लेकर आवाज उठाई। उनकी शिकायत के बाद ही प्रशासन तक मामला पहुंचा और लाखों रुपये के कथित घोटाले का खुलासा हो सका।
बच्चों की पहल ने यह साबित किया कि जागरूकता और सही जानकारी के जरिए बड़े स्तर की अनियमितताओं को भी उजागर किया जा सकता है।
अब निगाह कार्रवाई पर
फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट आने के बाद तय होगी। 14 लाख रुपये के इस कथित MDM घोटाले ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखना होगा कि जांच में कौन-कौन लोग दोषी पाए जाते हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है या नहीं।
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