उत्तर प्रदेश

मायावती का अखिलेश यादव पर हमला बोलीं- ब्राह्मणों के बसपा से जुड़ने से घबरा गई सपा

Kavita2
8 Aug 2026 11:00 AM IST
मायावती का अखिलेश यादव पर हमला बोलीं- ब्राह्मणों के बसपा से जुड़ने से घबरा गई सपा
x

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए को लेकर दिए गए बयान पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए उसे ‘गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्राह्मण समाज के बड़ी संख्या में बसपा से जुड़ने की वजह से सपा घबरा गई है और इसी कारण पीडीए में ‘पी’ की व्याख्या बदलने की कोशिश की जा रही है।

मायावती के मुताबिक, सपा लंबे समय तक पीडीए में ‘पी’ का मतलब पिछड़ा बताकर अपनी राजनीति को आगे बढ़ाती रही, लेकिन अब जब उसे ब्राह्मण समाज के बसपा की ओर बढ़ते जुड़ाव का अहसास हो रहा है तो ‘पी’ को पंडित बताने की बात कही जा रही है। उन्होंने इसे सपा की राजनीतिक रणनीति में बदलाव बताते हुए पार्टी पर हमला किया।

पीडीए को लेकर बढ़ी सियासी बहस

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पीडीए लंबे समय से समाजवादी पार्टी के राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा रहा है। सपा की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ने के लिए पीडीए की अवधारणा को प्रमुखता दी गई है।

अब पीडीए में ‘पी’ के अर्थ को लेकर मायावती और अखिलेश यादव के बीच सियासी बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। मायावती का कहना है कि सपा पहले जिस ‘पी’ को पिछड़े वर्ग से जोड़कर पेश करती थी, अब उसे पंडित से जोड़ने की कोशिश कर रही है।

मायावती ने इस बदलाव को सपा की मजबूरी बताते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज का बसपा से जुड़ाव बढ़ रहा है और इसी कारण समाजवादी पार्टी परेशान नजर आ रही है।

सपा पर ‘गिरगिट’ वाली राजनीति का आरोप

बसपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए उसे ‘गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा चुनावी परिस्थितियों के अनुसार अपने राजनीतिक संदेश और सामाजिक समीकरण बदलती रहती है।

मायावती के बयान के मुताबिक, सपा अब ब्राह्मण समाज को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में पीडीए की व्याख्या में बदलाव कर रही है। उन्होंने इसे जनता को भ्रमित करने वाली राजनीति के तौर पर पेश किया।

बसपा प्रमुख ने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी ब्राह्मण समाज सहित विभिन्न सामाजिक वर्गों को अपने साथ जोड़ने के प्रयास में सक्रिय है।

ब्राह्मण समाज को लेकर बसपा की रणनीति

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। अलग-अलग राजनीतिक दल समय-समय पर इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की रणनीति अपनाते रहे हैं। बसपा भी ब्राह्मण समाज को अपने सामाजिक आधार में शामिल करने की कोशिश करती रही है।

मायावती का ताजा बयान इसी राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण समाज के लोग तेजी से बसपा के साथ जुड़ रहे हैं। उनके मुताबिक, इसी वजह से सपा के भीतर बेचैनी बढ़ी है।

बसपा प्रमुख का संदेश साफ तौर पर इस बात पर केंद्रित है कि पार्टी ब्राह्मण समाज समेत अन्य वर्गों को अपने साथ जोड़कर उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करना चाहती है।

अखिलेश के बयान पर पलटवार

मायावती का हमला सीधे तौर पर अखिलेश यादव के उस बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने पीडीए में ‘पी’ को पंडित से जोड़ने की बात कही थी। मायावती ने इस बयान को सपा की बदली हुई राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सपा अब ‘पी’ को पंडित के अर्थ में इस्तेमाल कर रही है तो पहले इसे पिछड़ा बताकर जिस राजनीतिक अभियान को आगे बढ़ाया गया, उसमें अचानक बदलाव क्यों किया जा रहा है।

मायावती का आरोप है कि यह बदलाव सामाजिक वर्गों को साधने की राजनीतिक कोशिश है। उन्होंने सपा पर अवसर के अनुसार अपनी राजनीतिक भाषा बदलने का आरोप लगाया।

यूपी में सामाजिक समीकरण पर जोर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी सफलता काफी हद तक सामाजिक समीकरणों पर निर्भर करती है। अलग-अलग दल जातीय और सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ने के लिए लगातार रणनीति तैयार करते हैं।

बसपा का पारंपरिक सामाजिक आधार दलित मतदाताओं के बीच मजबूत माना जाता है। पार्टी ने विभिन्न चुनावों में दलितों के साथ अन्य सामाजिक वर्गों को जोड़ने की रणनीति अपनाई है। मायावती का ताजा बयान भी इसी सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।

वहीं समाजवादी पार्टी पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को जोड़ने वाली पीडीए रणनीति को लगातार प्रमुखता देती रही है। ऐसे में ‘पी’ के अर्थ को लेकर दोनों दलों के बीच सियासी बयानबाजी महत्वपूर्ण हो गई है।

बसपा और सपा के बीच बढ़ सकता है टकराव

मायावती के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में बसपा और सपा के बीच सामाजिक समीकरणों को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। दोनों दल उत्तर प्रदेश में अपने-अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

बसपा प्रमुख लगातार पार्टी के संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच पहुंच बढ़ाने पर जोर देती रही हैं। वहीं सपा भी पीडीए के जरिए व्यापक सामाजिक गठबंधन तैयार करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

ऐसे में ब्राह्मण समाज को लेकर दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियां आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

मायावती के बयान के सियासी मायने

मायावती का ताजा बयान केवल अखिलेश यादव की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके व्यापक राजनीतिक मायने भी हैं। बसपा प्रमुख ने एक तरफ सपा की रणनीति पर सवाल उठाया है, वहीं दूसरी तरफ ब्राह्मण समाज के अपने साथ जुड़ने का दावा कर पार्टी के सामाजिक विस्तार का संदेश देने की कोशिश की है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बसपा अपने पारंपरिक दलित आधार के साथ अन्य सामाजिक वर्गों को जोड़ने की दिशा में सक्रिय है। उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति के लिहाज से यह रणनीति बसपा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

फिलहाल पीडीए में ‘पी’ को लेकर शुरू हुई बयानबाजी ने यूपी की सियासत में एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। मायावती के तीखे हमले के बाद अब निगाहें समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया पर हैं। दोनों दलों के बीच यह राजनीतिक बहस आगे किस दिशा में जाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

Next Story