उत्तर प्रदेश

Khatauli's जैन मंदिरों में गूंजे मंत्र, सिद्ध आराधना से आत्मशुद्धि का संदेश

Ratna Netam
22 July 2026 8:43 PM IST
Khataulis  जैन मंदिरों में गूंजे मंत्र, सिद्ध आराधना से आत्मशुद्धि का संदेश
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Khatauli खतौली : खतौली (मुजफ्फरनगर)। पवित्र अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर खतौली में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का दूसरा दिन बुधवार को धार्मिक आस्था और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। श्री पार्श्वनेमि दिगंबर जैन मंदिर (जक्की वाला) और श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर (नया खतौली) में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की।

कार्यक्रम का आयोजन वाणी भूषण पंडित सुमित प्रकाश जैन और प्रतिष्ठाचार्य पंडित अनिल कुमार जैन (भोपाल) के कुशल सानिध्य में संपन्न कराया गया। धार्मिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और विधान की विभिन्न क्रियाओं के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ अनुष्ठान में हिस्सा लिया और धर्म लाभ प्राप्त किया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए वाणी भूषण पंडित सुमित प्रकाश जैन ने सिद्ध परमेष्ठी की आराधना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सिद्ध भक्ति आत्मा की सर्वोच्च साधना है। सिद्ध भगवानों ने समस्त अष्ट कर्मों का क्षय कर अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन, अनंत सुख और अनंत वीर्य की प्राप्ति की है। उनकी आराधना करने से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

उन्होंने कहा कि सिद्ध भगवानों की भक्ति केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मा को उन्नति की ओर ले जाने वाली साधना है। इससे व्यक्ति के भीतर सम्यक श्रद्धा, संयम, वैराग्य और अच्छे आचरण की भावना विकसित होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने और आत्म कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

पंडित सुमित प्रकाश जैन ने सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के महत्व को समझाते हुए कहा कि जैन धर्म में इन तीनों को मोक्ष मार्ग का आधार माना गया है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में सत्य, संयम और अहिंसा के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, तभी आत्मिक शांति और उन्नति संभव है।

श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान मंदिरों में धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान की आराधना कर परिवार और समाज के कल्याण की कामना की। मंदिर प्रबंधन की ओर से आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए।

अष्टान्हिका महापर्व जैन समाज का एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व माना जाता है। इस अवसर पर विशेष पूजा, विधान और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान भी जैन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है, जिसमें सिद्ध भगवानों की आराधना कर आध्यात्मिक उन्नति की कामना की जाती है।

कार्यक्रम में जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मंदिर समिति के सदस्य और धर्म प्रेमी लोग मौजूद रहे। सभी ने श्रद्धा और भक्ति के साथ विधान में भाग लिया। आयोजकों ने बताया कि आने वाले दिनों में भी धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इसमें शामिल होंगे।

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