उत्तर प्रदेश

यूपी चुनाव से पहले चिल्लूपार में बड़ा सियासी बदलाव BJP नेत्री ने बनाया नया प्लान

Ratna Netam
8 Aug 2026 8:41 PM IST
यूपी चुनाव से पहले चिल्लूपार में बड़ा सियासी बदलाव BJP नेत्री ने बनाया नया प्लान
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गोरखपुर : उत्तर प्रदेश की चिल्लूपार विधानसभा सीट पर आगामी चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। कभी पूर्व मंत्री और बाहुबली नेता पंडित हरिशंकर तिवारी के राजनीतिक प्रभाव के लिए पहचानी जाने वाली इस सीट पर अब भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रतिष्ठित चंद परिवार की बहू अस्मिता चंद के बसपा में जाने के ऐलान ने नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है। अस्मिता चंद ने अभी भारतीय जनता पार्टी से औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि आगे वह बहुजन समाज पार्टी के बैनर तले चिल्लूपार की जनता के बीच सक्रिय रहेंगी।
अस्मिता चंद के मुताबिक, वह 23 अगस्त को चिल्लूपार क्षेत्र के महुआपार में आयोजित होने वाली जनसभा के दौरान बसपा की विधिवत सदस्यता ग्रहण करेंगी। इस दौरान उनके राजनीतिक रूप से नई पारी शुरू करने की औपचारिक घोषणा भी किए जाने की संभावना है। उनके इस फैसले के बाद चिल्लूपार की राजनीति में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अस्मिता चंद ने शनिवार को अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि अब वह भाजपा के बजाय बसपा के बैनर तले चिल्लूपार की जनता की सेवा करेंगी। उन्होंने पिछले दिनों बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात भी की थी। इसके बाद से ही उनके बसपा में जाने की अटकलें तेज थीं। अब उन्होंने खुद 23 अगस्त को सदस्यता ग्रहण करने की बात कहकर इन चर्चाओं को लगभग स्पष्ट कर दिया है।
बताया जा रहा है कि अस्मिता चंद के परिवार की ओर से महुआपार में होने वाली जनसभा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस सभा में बड़ी संख्या में समर्थकों और कार्यकर्ताओं को जुटाने की तैयारी है। चर्चा है कि बसपा की ओर से आकाश आनंद या प्रदेश अध्यक्ष भी कार्यक्रम में पहुंच सकते हैं। हालांकि कार्यक्रम में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल होंगे, इसे लेकर अंतिम स्थिति की पुष्टि कार्यक्रम के समय ही स्पष्ट होगी।
अस्मिता चंद ने अपने निजी आवास के ड्राइंग रूम में बसपा सुप्रीमो मायावती की तस्वीर भी लगाई है। इसके साथ ही उन्होंने अपने फेसबुक वॉल से भाजपा से संबंधित कई जानकारियां और सामग्री हटा दी है। उनके इस कदम को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी ओर, भाजपा की ओर से फिलहाल इसे औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ने का मामला नहीं माना जा रहा है। भाजपा जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी ने कहा कि वर्तमान में अस्मिता चंद भाजपा की कार्यकर्ता हैं और पार्टी छोड़ने के संबंध में उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है। ऐसे में अब सबकी नजर 23 अगस्त को होने वाली जनसभा पर है।
चिल्लूपार में हरिशंकर तिवारी परिवार का रहा दबदबा
चिल्लूपार विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी अहम रहा है। पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी यहां से पांच बार विधायक रहे। उनके बाद उनके छोटे पुत्र विनय शंकर तिवारी भी इस सीट से विधायक चुने गए। वर्तमान में भाजपा के राजेश त्रिपाठी चिल्लूपार के विधायक हैं।
2022 के विधानसभा चुनाव में राजेश त्रिपाठी ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार और हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी को हराया था। इससे पहले 2017 के चुनाव में विनय शंकर तिवारी ने राजेश त्रिपाठी को शिकस्त दी थी। उस चुनाव में राजेश भाजपा के टिकट पर मैदान में थे, जबकि विनय शंकर तिवारी को बसपा ने उम्मीदवार बनाया था।
राजेश त्रिपाठी इससे पहले 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर चिल्लूपार से जीत हासिल कर चुके हैं। बाद में उन्होंने भाजपा का रुख किया। 2017 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, जबकि 2022 में भी उन्होंने भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की।
बसपा के लिए भी अहम मानी जाती है सीट
चिल्लूपार में बसपा का भी लंबे समय से प्रभाव रहा है। ऐसे में अस्मिता चंद का बसपा के साथ जुड़ना चुनावी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि आगामी चुनाव में टिकट और उम्मीदवारों को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।
अस्मिता चंद राजनीतिक रूप से एक प्रभावशाली परिवार से जुड़ी हैं। उनके पिता इंद्र प्रकाश राव दिग्विजयनाथ डिग्री कॉलेज में प्रवक्ता रहे हैं। उनके ससुर स्वर्गीय राजनारायण चंद ब्लॉक प्रमुख रहे थे। उनके जेठ रणविजय चंद जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन रह चुके हैं। वहीं, उनके ससुर के बड़े भाई मारकंडेय चंद प्रदेश सरकार में मंत्री रहे हैं।
अब 23 अगस्त को महुआपार में होने वाली जनसभा पर चिल्लूपार के राजनीतिक गलियारों की नजर है। अस्मिता चंद के बसपा में शामिल होने के बाद क्षेत्र में पार्टी की सक्रियता और संभावित चुनावी रणनीति किस दिशा में जाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल उनके इस राजनीतिक कदम ने चिल्लूपार में चुनाव से पहले नए समीकरणों की चर्चा जरूर तेज कर दी है।
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