- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- 20 रुपये के नकली...
20 रुपये के नकली सिक्कों का बड़ा नेटवर्क पकड़ा पांच आरोपी गिरफ्तार

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने और उन्हें कई राज्यों के बाजारों में चलाने वाले एक कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने जीरकपुर निवासी कथित सरगना समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह हरियाणा के सोनीपत में मशीनें लगाकर नकली सिक्के तैयार करता था। इन्हें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाया जाता था।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार कथित सरगना की पहचान उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह के रूप में हुई है। वह जीरकपुर में रह रहा था और पहले पंजाब के मोहाली में सुनार का काम करता था। आरोप है कि वह लंबे समय से नकली सिक्कों से जुड़े नेटवर्क का संचालन कर रहा था। उसके साथ गिरफ्तार किए गए चार अन्य लोगों की भूमिकाओं की भी जांच की जा रही है।
मामले में सबसे बड़ा दावा बाजार में खपाए गए नकली सिक्कों की कीमत को लेकर किया गया है। प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर कहा जा रहा है कि गिरोह अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 20 रुपये के नकली सिक्के बाजार में चला चुका है। हालांकि यह आंकड़ा फिलहाल आरोपियों से मिली जानकारी और शुरुआती जांच पर आधारित दावा है। इसकी स्वतंत्र और दस्तावेजी पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस कार्रवाई के दौरान करीब 6,400 नकली सिक्के बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। सभी सिक्के 20 रुपये मूल्य के बताए गए हैं। पुलिस अब बरामद सिक्कों की जांच कराने के साथ यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन्हें तैयार करने में किन धातुओं, सांचों और मशीनों का इस्तेमाल किया गया। बरामद सिक्कों की कुल संख्या और कथित रूप से बाजार में चलाए गए सिक्कों के दावे में बड़ा अंतर है, इसलिए 70 करोड़ रुपये के आंकड़े को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
प्रारंभिक जांच में दावा किया गया है कि गिरोह ने सोनीपत में सिक्के तैयार करने के लिए मशीनें लगा रखी थीं। वहां धातु से 20 रुपये के सिक्के बनाए जाते और उन्हें असली सिक्कों जैसा रूप देने का प्रयास किया जाता था। तैयार होने के बाद सिक्कों को नेटवर्क से जुड़े लोगों के माध्यम से अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था। छोटे मूल्य के सिक्के होने के कारण सामान्य लेन-देन के दौरान उन पर लोगों का ध्यान कम जाता था।
पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने इसी स्थिति का फायदा उठाकर नकली सिक्कों को दुकानों, बाजारों और नकद भुगतान वाली दूसरी जगहों पर चलाया। एक साथ बड़ी मात्रा में सिक्के देने के बजाय उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में कम संख्या में पहुंचाया जाता होगा। हालांकि वितरण के इस तरीके और नेटवर्क से जुड़े लोगों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से रजिस्टर और मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। इनकी जांच के माध्यम से उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है, जो सिक्कों के निर्माण, परिवहन और बाजार में उन्हें चलाने से जुड़े हो सकते हैं। मोबाइल फोन में मौजूद संपर्क, बातचीत और अन्य डिजिटल विवरण कथित नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
बताया जा रहा है कि गिरोह 20 रुपये का एक नकली सिक्का तैयार करने पर करीब पांच से छह रुपये खर्च करता था। इसके बाद इसे कथित रूप से 12 से 15 रुपये में नेटवर्क से जुड़े लोगों को दिया जाता था। आगे यही सिक्का बाजार में उसकी अंकित कीमत यानी 20 रुपये के रूप में चलाया जाता था। ये सभी विवरण फिलहाल पुलिस के दावे और आरोपियों से पूछताछ में सामने आई जानकारी पर आधारित हैं।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि सोनीपत में मशीनें किस स्थान पर लगाई गई थीं, उन्हें किससे खरीदा गया और कच्चा माल कहां से मंगाया जाता था। सिक्कों पर डिजाइन और लिखावट तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए गए सांचों की जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी। यदि निर्माण इकाई से उपकरण बरामद हुए हैं तो उनकी तकनीकी जांच के आधार पर उत्पादन क्षमता का अनुमान लगाया जा सकता है।
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार तक नकली सिक्के पहुंचाने के दावे के बाद संबंधित राज्यों में फैले संपर्कों की पहचान करना जांच का अहम हिस्सा होगा। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विभिन्न शहरों में सिक्के किन लोगों को दिए जाते थे और वहां से वे बाजार तक कैसे पहुंचते थे। गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्ध लोगों की तलाश भी की जा सकती है।
इस मामले में गिरफ्तार सभी व्यक्ति अभी आरोपी हैं। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साबित होना बाकी हैं। बरामदगी, डिजिटल रिकॉर्ड, मशीनों और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही प्रत्येक आरोपी की भूमिका स्पष्ट होगी। इसलिए उन्हें दोषी घोषित करना कानूनी रूप से उचित नहीं होगा।
फिलहाल सहारनपुर पुलिस की कार्रवाई से 20 रुपये के नकली सिक्कों से जुड़े एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का मामला सामने आया है। पांच आरोपियों की गिरफ्तारी और हजारों सिक्कों की बरामदगी के बाद जांच का दायरा कई राज्यों तक पहुंच सकता है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कथित रूप से बाजार में चलाए गए 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्कों का दावा कितना सही है और इस नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल थे। इसका जवाब आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।





