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दाऊजी मेले में पहली बार WFI के नियमों से होगा दंगल 100 से अधिक पहलवान दिखाएंगे दम

हाथरस। श्री दाऊजी महाराज के 115वें मेले में अखिल भारतीय कुश्ती दंगल का विशाल आयोजन किया जाएगा। दंगल को ऐतिहासिक और व्यवस्थित बनाने के लिए संयोजक विपुल गौड़ तथा आयोजन समिति तैयारियों में जुटी है। मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दंगल की रूपरेखा साझा की गई। आयोजकों के अनुसार, दंगल के पहले दिन हाथरस के दाऊजी मेले में पहली बार भारतीय कुश्ती महासंघ यानी डब्ल्यूएफआई के नियमों के तहत मुकाबले कराए जाएंगे।
प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग स्थानों से आने वाले 100 से अधिक पुरुष और महिला पहलवानों के भाग लेने की संभावना है। सभी पहलवान निर्धारित भार वर्गों में एक-दूसरे का सामना करेंगे। कुश्ती संघ के अधिकारियों के निर्देशन में मुकाबले कराए जाएंगे और प्रशिक्षित रेफरी परिणाम तय करेंगे। आयोजकों ने नियमों के पालन तथा निष्पक्ष निर्णय के लिए विशेष व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी है।
पुरुष पहलवानों के लिए 57 से 65 किलोग्राम, 65 से 85 किलोग्राम और 85 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में मुकाबले प्रस्तावित हैं। महिला पहलवानों के लिए 55 से 60 किलोग्राम और 65 से 70 किलोग्राम भार वर्ग बताया गया है। प्रत्येक वर्ग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पहलवानों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक देकर विजेता घोषित किया जाएगा।
हालांकि आयोजकों की ओर से बताए गए पुरुष वर्गों में 65 किलोग्राम की सीमा दोनों श्रेणियों में दिखाई दे रही है। महिला वर्ग में 60 से 65 किलोग्राम के बीच का वर्ग विवरण में शामिल नहीं है। प्रतियोगिता से पहले अंतिम आधिकारिक भार श्रेणी और पात्रता नियम स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता होगी, ताकि पंजीकरण कराने वाले पहलवानों के बीच भ्रम की स्थिति न बने।
दंगल के संयोजक विपुल गौड़ और समिति के सदस्य आयोजन को नया स्वरूप देने का प्रयास कर रहे हैं। पारंपरिक कुश्ती दंगल के साथ डब्ल्यूएफआई के नियमों को जोड़कर पहलवानों को प्रतियोगिता का औपचारिक अनुभव देने की योजना है। इससे स्थानीय अखाड़ों में अभ्यास करने वाले पहलवानों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, नियम और निर्णय प्रणाली को समझने का अवसर मिलेगा।
अखाड़ों में होने वाली पारंपरिक कुश्ती और नियमबद्ध प्रतियोगिताओं की प्रक्रिया में कुछ अंतर हो सकते हैं। भार वर्ग, मुकाबले की अवधि, रेफरी के संकेत, अंक व्यवस्था और परिणाम निर्धारित करने की प्रक्रिया को समझना पहलवानों के लिए जरूरी होता है। आयोजन समिति का कहना है कि संघ के नियमों के अनुसार मुकाबले होने से स्थानीय प्रतिभाओं को प्रतियोगी कुश्ती की जानकारी मिलेगी।
स्थानीय अखाड़ों से जुड़े पहलवानों के लिए यह आयोजन केवल अपनी ताकत दिखाने का मंच नहीं होगा, बल्कि आगे बढ़ने का अवसर भी बन सकता है। भार वर्ग के अनुसार मुकाबले होने से समान वजन वाले पहलवान एक-दूसरे के सामने उतरेंगे। इससे प्रतियोगिता को व्यवस्थित बनाने और प्रतिभागियों के प्रदर्शन का सही आकलन करने में सहायता मिलेगी।
दंगल में पुरुषों के साथ महिला पहलवानों को भी जगह दी गई है। दो भार वर्गों में महिला कुश्ती के मुकाबले आयोजित करने की तैयारी है। महिला खिलाड़ियों की भागीदारी से प्रतियोगिता का दायरा बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर कुश्ती का प्रशिक्षण ले रही लड़कियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा। महिला वर्ग के विजेताओं को भी स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक दिए जाएंगे।
दाऊजी महाराज का मेला हाथरस के प्रमुख आयोजनों में शामिल है और कुश्ती दंगल इसके मुख्य आकर्षणों में से एक रहता है। हर साल दंगल देखने के लिए बड़ी संख्या में कुश्ती प्रेमी पहुंचते हैं। इस बार नियमबद्ध मुकाबलों और पदक व्यवस्था के कारण खेल प्रेमियों में उत्सुकता बढ़ने की उम्मीद है। उपलब्ध आयोजन सूचना के अनुसार कुश्ती दंगल 17 से 22 सितंबर तक प्रस्तावित है, लेकिन मुकाबलों का विस्तृत दिनवार कार्यक्रम आयोजन समिति से सत्यापित किया जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि पहले दिन के मुकाबले कुश्ती संघ के अधिकारियों की निगरानी में होंगे। रेफरी नियमों के अनुसार प्रत्येक मुकाबले का संचालन करेंगे। पहलवानों को उनके निर्धारित भार वर्ग में उतारा जाएगा और प्रदर्शन के आधार पर पदक विजेताओं का चयन किया जाएगा। खिलाड़ियों के पंजीकरण, वजन जांच और मुकाबलों के समय की विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
आयोजकों का मानना है कि इस तरह की प्रतियोगिता स्थानीय कुश्ती प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगी। कई पहलवान अखाड़ों में नियमित अभ्यास करते हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक नियमों के तहत आयोजित प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के सीमित अवसर मिलते हैं। दाऊजी मेले का मंच उन्हें नए अनुभव और अपने प्रदर्शन को परखने का मौका देगा।
दंगल को सफल बनाने के लिए समिति आयोजन स्थल की व्यवस्था, पहलवानों की भागीदारी और मुकाबलों के संचालन पर ध्यान दे रही है। बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के आने की संभावना को देखते हुए सभी मुकाबलों को समयबद्ध तरीके से कराने की चुनौती भी रहेगी। संघ के अधिकारियों और रेफरी की मौजूदगी से प्रतियोगिता को अनुशासित तरीके से संपन्न कराने का प्रयास किया जाएगा।
फिलहाल श्री दाऊजी महाराज के 115वें मेले में होने वाला अखिल भारतीय कुश्ती दंगल चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सौ से अधिक पुरुष और महिला पहलवानों की संभावित भागीदारी तथा डब्ल्यूएफआई के नियमों के अनुसार प्रस्तावित मुकाबले इसे खास बनाएंगे। आयोजन सफल रहा तो स्थानीय पहलवानों को नियमबद्ध कुश्ती समझने और अपने करियर के लिए नए अवसर तलाशने का महत्वपूर्ण मंच मिल सकता है।





