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उत्तर प्रदेश
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, गुलमोहर ग्रीन्स के 2 टॉवर टूटेंगे
Rajeshwari Nishad
28 Oct 2026 3:34 PM IST

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गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में अवैध निर्माण के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स आवासीय सोसाइटी में नियमों के विपरीत बनाए गए दो टावरों को पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश दिया है। इसके अलावा चार अन्य टावरों की अवैध रूप से निर्मित नौवीं और दसवीं मंजिल भी गिराई जाएगी। हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को दो महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, अदालत ने बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) के अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद सोसाइटी में अवैध निर्माण और फ्लैट खरीदारों के अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
टावर नंबर 27 और 28 होंगे पूरी तरह ध्वस्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने 27 अक्टूबर 2026 को यह महत्वपूर्ण आदेश दिया।अदालत ने गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी के टावर संख्या 27 और 28 को पूरी तरह गिराने का निर्देश दिया है।इसके अलावा टावर संख्या 16, 17, 18 और 19 की नौवीं और दसवीं मंजिल को भी अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ध्वस्तीकरण की पूरी कार्रवाई दो महीने के भीतर की जानी चाहिए।इस दौरान जिला प्रशासन और पुलिस को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की सहायता करने के निर्देश दिए गए हैं।ध्वस्तीकरण पर आने वाला पूरा खर्च बिल्डर से वसूला जाएगा। यदि बिल्डर राशि नहीं चुकाता है, तो इसे भू-राजस्व के बकाये की तरह वसूल किया जा सकेगा।
2006 में मिली थी 904 फ्लैट बनाने की अनुमति
गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में निर्माण से जुड़ा विवाद काफी पुराना है।अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2006 में इस आवासीय परियोजना के लिए 34 टावरों में कुल 904 फ्लैट बनाने की योजना प्रस्तुत की गई थी।हालांकि, बाद में बिल्डर ने मूल स्वीकृत योजना से अलग निर्माण कार्य किए।इसके बाद गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से कई बार शमन यानी कंपाउंडिंग की मंजूरी ली गई।18 दिसंबर 2024 को तीसरे शमन आदेश के माध्यम से अतिरिक्त निर्माण को नियमित करने की अनुमति दी गई थी।इसमें टावर 16 से 19 की नौवीं और दसवीं मंजिल पर 32 फ्लैट तथा टावर 27 और 28 में 80 फ्लैट शामिल थे।सोसाइटी के निवासियों ने इस मंजूरी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।सुनवाई के बाद अदालत ने तीसरे शमन आदेश को कानून के विपरीत पाते हुए निरस्त कर दिया।
बिना पूर्णता प्रमाणपत्र के खरीदारों को दे दिया कब्जा
सुनवाई के दौरान एक और गंभीर मामला सामने आया।अदालत ने पाया कि बिल्डर ने अनिवार्य पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त किए बिना ही कई फ्लैटों का कब्जा खरीदारों को सौंप दिया था।हाईकोर्ट ने इसे अपार्टमेंट खरीदारों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना।नियमों के अनुसार, किसी आवासीय परियोजना में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद संबंधित प्राधिकरण से आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त करना महत्वपूर्ण होता है।अदालत ने सवाल उठाया कि जब परियोजना में जरूरी स्वीकृतियों की कमी थी, तो खरीदारों को फ्लैटों का कब्जा कैसे दिया गया।कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी व्यक्त की।
बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना
हाईकोर्ट ने निर्माण से जुड़ी अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है।अदालत ने निर्देश दिया कि यह रकम एक महीने के भीतर गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के खाते में जमा कराई जाए।इसके अलावा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को आदेश दिया गया कि कानूनी लड़ाई लड़ने वाले 11 याचिकाकर्ताओं को 50-50 हजार रुपये का भुगतान किया जाए।यह भुगतान दो महीने के भीतर करना होगा।अदालत ने माना कि प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही के कारण निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा और उन्हें न्याय पाने के लिए अदालत जाना पड़ा।इस फैसले को फ्लैट खरीदारों के अधिकारों और बिल्डरों की जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है।
85 लोगों को बेच दिए सोसाइटी के साझा क्षेत्र
मामले की सुनवाई में बिल्डर द्वारा सोसाइटी के साझा क्षेत्रों की बिक्री का मुद्दा भी सामने आया।हाईकोर्ट के अनुसार, बिल्डर ने साझा उपयोग के लिए निर्धारित क्षेत्रों को कथित तौर पर 85 लोगों को बेच दिया था।अदालत ने इन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है।समिति गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में काम करेगी।जांच में जिन साझा क्षेत्रों पर अवैध निर्माण पाया जाएगा, उन्हें हटाकर संबंधित जमीन या स्थान सोसाइटी की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन को वापस सौंपा जाएगा।अदालत ने बिल्डर को संबंधित खरीदारों से प्राप्त रकम लौटाने के साथ निर्माण लागत और निर्धारित 10 प्रतिशत ब्याज देने का भी निर्देश दिया है।इस प्रक्रिया को छह महीने के भीतर पूरा किया जाना है।
बिल्डर के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले में केवल अवैध निर्माण गिराने का आदेश ही नहीं दिया, बल्कि आपराधिक कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं।अदालत ने संबंधित पुलिस थाने को दो सप्ताह के भीतर बिल्डर के प्रमोटर के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत जानकारी प्रस्तुत करने और अपार्टमेंट कानून के उल्लंघन से संबंधित एफआईआर दर्ज करने को कहा है।मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस आयुक्त से नीचे के स्तर के अधिकारी को नहीं सौंपी जाएगी।इसके साथ ही अदालत ने तत्कालीन गाजियाबाद विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।जांच में लापरवाही के मामले में निरीक्षक सुरेंद्र सिंह को निलंबित करने और उनके खिलाफ विभागीय जांच कराने का भी आदेश दिया गया है।
नोएडा के ट्विन टावर मामले की याद हुई ताजा
गाजियाबाद के गुलमोहर ग्रीन्स मामले में आए इस फैसले के बाद वर्ष 2022 में नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर ध्वस्तीकरण की याद ताजा हो गई है।उस समय भी निर्माण नियमों के उल्लंघन को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई के बाद टावर गिराए गए थे।अब गाजियाबाद में दो टावरों और चार अन्य टावरों की अतिरिक्त मंजिलें हटाने का आदेश दिया गया है।हालांकि, ध्वस्तीकरण की तकनीकी प्रक्रिया, आसपास की इमारतों की सुरक्षा और प्रभावित लोगों से जुड़ी व्यवस्थाएं संबंधित प्रशासन को सुनिश्चित करनी होंगी।
अदालत के आदेश के बाद गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सामने निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई पूरी करने की चुनौती है।यह फैसला स्पष्ट करता है कि आवासीय परियोजनाओं में स्वीकृत नक्शे और निर्माण नियमों का पालन करना अनिवार्य है। केवल बाद में शमन की अनुमति लेकर हर प्रकार के अवैध निर्माण को वैध नहीं बनाया जा सकता।
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