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किसानों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, मक्का-बाजरा के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने किसानों के हित में महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए खरीफ विपणन वर्ष के लिए मोटे अनाज की खरीद नीति को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में मक्का, बाजरा और ज्वार की सरकारी खरीद से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इसके तहत मक्का और बाजरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने मोटे अनाज की खरीद के लिए प्रदेश में 455 क्रय केंद्र खोलने का निर्णय लिया है। इन केंद्रों पर 31 दिसंबर तक खरीद की जाएगी। इसके अलावा, धान बेचने वाले किसानों को 48 घंटे के भीतर भुगतान करने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का निर्धारित समर्थन मूल्य उपलब्ध कराना और सरकारी खरीद व्यवस्था को सुचारू बनाना है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद मोटे अनाज की खरीद से संबंधित तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रदेश में मक्का, बाजरा और ज्वार की खेती करने वाले किसानों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मक्का का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2410 रुपये किया
योगी सरकार ने मक्का के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मक्का का समर्थन मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में 10 रुपये बढ़ाकर 2410 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
इससे पहले मक्का का समर्थन मूल्य 2400 रुपये प्रति क्विंटल था। अब सरकारी खरीद के दौरान निर्धारित मानकों के अनुरूप मक्का बेचने वाले किसानों को 2410 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा।
मक्का उत्तर प्रदेश में उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण फसलों में शामिल है। इसका उपयोग खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पशु आहार और विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों में भी किया जाता है। ऐसे में मक्का की सरकारी खरीद और समर्थन मूल्य से संबंधित निर्णय किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, मक्का की खरीद का जिलेवार लक्ष्य और प्रत्येक जिले में खोले जाने वाले केंद्रों की संख्या उपलब्ध जानकारी में नहीं बताई गई है।
बाजरा के एमएसपी में 125 रुपये की बढ़ोतरी
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, बाजरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 125 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। पहले बाजरा का समर्थन मूल्य 2775 रुपये प्रति क्विंटल था, जिसे बढ़ाकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
इस निर्णय से सरकारी खरीद केंद्रों पर बाजरा बेचने वाले किसानों को पहले की तुलना में अधिक निर्धारित मूल्य मिलेगा। बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
बाजरा मोटे अनाज की प्रमुख फसलों में शामिल है। इसकी खेती कई क्षेत्रों में की जाती है। सरकारी खरीद व्यवस्था के माध्यम से किसानों को निर्धारित मूल्य पर उपज बेचने का अवसर मिलता है।
मक्का के मुकाबले बाजरा के समर्थन मूल्य में अधिक बढ़ोतरी की गई है। मक्का के एमएसपी में 10 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है, जबकि बाजरा के समर्थन मूल्य में 125 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
ज्वार की खरीद को भी नीति में शामिल किया
राज्य सरकार ने मक्का और बाजरा के साथ ज्वार को भी मोटे अनाज की खरीद नीति में शामिल किया है। कैबिनेट ने इन फसलों की सरकारी खरीद से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में ज्वार के संशोधित न्यूनतम समर्थन मूल्य की सटीक राशि नहीं बताई गई है। इसलिए ज्वार की नई खरीद दर के संबंध में आधिकारिक आदेश से स्थिति स्पष्ट होगी।
मोटे अनाज की सरकारी खरीद नीति में तीनों फसलों को शामिल किए जाने से संबंधित किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए निर्धारित सरकारी व्यवस्था उपलब्ध होगी।
प्रदेश में खोले जाएंगे 455 क्रय केंद्र
किसानों की उपज खरीदने के लिए प्रदेश में कुल 455 क्रय केंद्र खोले जाएंगे। इन केंद्रों पर मक्का, बाजरा और ज्वार की खरीद की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार ने मोटे अनाज की खरीद के लिए 31 दिसंबर तक की समयसीमा निर्धारित की है। इस अवधि के दौरान किसान निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार अपनी उपज सरकारी क्रय केंद्रों पर बेच सकेंगे।
क्रय केंद्रों की व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को सरकारी खरीद प्रक्रिया से जोड़ना है। हालांकि, किन जिलों में कितने केंद्र स्थापित किए जाएंगे और किसानों को पंजीकरण के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
किसानों को अपनी फसल बेचने से पहले संबंधित क्रय केंद्र, खरीद की तारीख और निर्धारित प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी प्राप्त करनी होगी।
धान बेचने वाले किसानों को 48 घंटे में भुगतान
कैबिनेट बैठक से संबंधित जानकारी में धान बेचने वाले किसानों के भुगतान को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था बताई गई है। इसके अनुसार, किसानों को धान की बिक्री के 48 घंटे के भीतर भुगतान किया जाएगा।
किसानों के लिए समय पर भुगतान बेहद महत्वपूर्ण होता है। फसल बेचने के बाद मिलने वाली राशि का उपयोग वे खेती से जुड़े खर्चों और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में कर सकते हैं।
धान की खरीद के बाद 48 घंटे में भुगतान करने की व्यवस्था किसानों को समय पर उनकी उपज का पैसा उपलब्ध कराने से जुड़ी है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध जानकारी में 48 घंटे के भीतर भुगतान की बात विशेष रूप से धान की बिक्री के संदर्भ में कही गई है। मोटे अनाज की खरीद के लिए भुगतान की अलग समयसीमा का विवरण नहीं दिया गया है।
कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव को मिली मंजूरी
शुक्रवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में मोटे अनाज की क्रय नीति से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत मक्का और बाजरा की नई समर्थन मूल्य दरें तथा सरकारी खरीद केंद्रों की व्यवस्था निर्धारित की गई है।
सरकार ने मक्का का समर्थन मूल्य 2410 रुपये और बाजरा का 2900 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। साथ ही, ज्वार को भी खरीद नीति में शामिल किया गया है।
इस फैसले के बाद सरकारी खरीद से संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। किसानों तक खरीद केंद्रों की जानकारी पहुंचाना और निर्धारित अवधि में उपज की खरीद सुनिश्चित करना व्यवस्था का प्रमुख हिस्सा होगा।
31 दिसंबर तक होगी मोटे अनाज की खरीद
योगी आदित्यनाथ सरकार के फैसले के अनुसार, प्रदेश में 455 क्रय केंद्रों के माध्यम से 31 दिसंबर तक मोटे अनाज की खरीद की जाएगी। मक्का और बाजरा की बढ़ी हुई समर्थन मूल्य दरों से संबंधित किसानों को सरकारी खरीद में नई दरों का लाभ मिलेगा।
मक्का का समर्थन मूल्य 2410 रुपये प्रति क्विंटल और बाजरा का 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। वहीं, धान की बिक्री के बाद 48 घंटे के भीतर भुगतान की व्यवस्था भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, किसानों को सरकारी खरीद प्रक्रिया, केंद्रों की सूची और आवश्यक दस्तावेजों के संबंध में आधिकारिक दिशा-निर्देशों का इंतजार रहेगा। कैबिनेट की मंजूरी के साथ उत्तर प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष के लिए मोटे अनाज की सरकारी खरीद नीति को स्वीकृति मिल गई है।





