उत्तर प्रदेश

PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोटों का बड़ा खेल

Kavita2
2 Sept 2026 11:18 AM IST
PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोटों का बड़ा खेल
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सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये के कथित नकली नोट मिलने के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आने लगे हैं। सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट से जुड़े इस मामले में प्रारंभिक जांच के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से भेजे जाने वाले नए नोटों की कथित तौर पर फोटो कॉपी तैयार कर नकली करेंसी का खेल किया गया। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जालसाजी किस स्तर पर और किस तरीके से हुई।

मामले ने बैंकिंग व्यवस्था और करेंसी चेस्ट की सुरक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर चेस्ट में असली नोटों की जगह नकली नोट रखे गए तो यह काम किसने और कैसे किया। जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

नए नोटों की फोटो कॉपी का शक

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि RBI से करेंसी चेस्ट में पहुंचने वाले नए नोटों को आधार बनाकर उनकी फोटो कॉपी तैयार की गई हो सकती है। इसके बाद कथित नकली नोटों को असली नोटों के स्थान पर रखकर वास्तविक करेंसी को बाहर निकालने का खेल किया गया।

अगर जांच में यह आशंका सही साबित होती है तो यह बेहद गंभीर मामला होगा, क्योंकि करेंसी चेस्ट में बड़ी मात्रा में नकदी रखी जाती है और इसके संचालन के लिए निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था होती है।

फिलहाल यह जांच का विषय है कि नकली नोट किस तकनीक से तैयार किए गए और उन्हें करेंसी चेस्ट के भीतर पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही।

असली नोट कहां गए बड़ा सवाल

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल उन असली नोटों को लेकर है जिनकी जगह कथित तौर पर नकली करेंसी रखे जाने की आशंका है। यदि करीब 17 करोड़ रुपये की असली करेंसी बदली गई तो इतनी बड़ी रकम कहां गई और किसके पास पहुंची, इसका पता लगाना जांच का अहम हिस्सा होगा।

जांच में बैंक के रिकॉर्ड, करेंसी की आवाजाही और चेस्ट में जमा तथा निकासी से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल किए जाने की संभावना है।

इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि रकम में अंतर कब से शुरू हुआ और संदिग्ध लेनदेन किस अवधि के दौरान हुए।

बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल

करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने का मामला सामान्य जाली नोट बरामदगी से अलग माना जा रहा है। करेंसी चेस्ट बैंकिंग प्रणाली का संवेदनशील हिस्सा होता है, जहां बड़ी मात्रा में नकदी का प्रबंधन किया जाता है।

ऐसे में अगर जांच में यह साबित होता है कि असली नोटों को व्यवस्थित तरीके से निकालकर उनकी जगह नकली नोट रखे गए तो सुरक्षा और आंतरिक निगरानी व्यवस्था की भी जांच जरूरी होगी।

यह भी पता लगाया जाएगा कि करेंसी की गिनती, सत्यापन और रिकॉर्ड मिलान के दौरान कथित नकली नोटों का पता पहले क्यों नहीं चला।

अंदरूनी भूमिका की भी हो सकती है जांच

इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे, यह जांच का केंद्रीय सवाल है। करेंसी चेस्ट में प्रवेश और नकदी से जुड़े काम निर्धारित प्रक्रिया के तहत होते हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां उन सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल कर सकती हैं जिनका संबंधित अवधि में नकदी के प्रबंधन से सीधा संबंध रहा।

जांच में कर्मचारियों की ड्यूटी, नकदी प्राप्त करने और भेजने की प्रक्रिया तथा सत्यापन व्यवस्था से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

हालांकि किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका जांच पूरी होने से पहले तय नहीं की जा सकती। संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित होगी।

CCTV और दस्तावेज बन सकते हैं अहम सबूत

जांच में बैंक परिसर और करेंसी चेस्ट से जुड़े उपलब्ध CCTV फुटेज की भी समीक्षा महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि संदिग्ध अवधि के दौरान कौन-कौन लोग चेस्ट तक पहुंचे थे।

इसके अलावा नकदी के बंडलों, पैकेटों और उनसे संबंधित रिकॉर्ड का मिलान भी किया जा सकता है।

करेंसी चेस्ट में नकदी आने और वहां से दूसरे बैंक या शाखाओं तक भेजे जाने का विवरण दर्ज रहता है। ऐसे रिकॉर्ड के जरिए जांच एजेंसियां कथित गड़बड़ी की समयावधि निर्धारित करने की कोशिश कर सकती हैं।

17 करोड़ की रकम ने बढ़ाई मामले की गंभीरता

करीब 17 करोड़ रुपये के कथित नकली नोटों का मामला सामने आने के कारण इसकी गंभीरता काफी बढ़ गई है। इतनी बड़ी रकम की जाली करेंसी किसी करेंसी चेस्ट तक पहुंचना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

जांच का एक पहलू यह भी हो सकता है कि क्या पूरी रकम एक ही बार में बदली गई या लंबे समय तक धीरे-धीरे असली नोट निकालकर उनकी जगह कथित नकली नोट रखे जाते रहे।

यदि गड़बड़ी लंबे समय से चल रही थी तो नियमित ऑडिट और नकदी सत्यापन के दौरान इसका पता क्यों नहीं चला, यह भी महत्वपूर्ण सवाल होगा।

नकली नोटों की गुणवत्ता की जांच अहम

बरामद कथित नकली नोटों की गुणवत्ता और उनकी छपाई के तरीके की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि वे साधारण फोटो कॉपी थे या उन्हें असली नोट जैसा दिखाने के लिए किसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

नोटों के कागज, प्रिंटिंग, सुरक्षा फीचर और अन्य निशानों की जांच से जालसाजी के तरीके का पता लगाया जा सकता है।

अगर नए नोटों की फोटो कॉपी से नकली करेंसी तैयार किए जाने की प्रारंभिक आशंका की पुष्टि होती है तो जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि इन्हें कहां और किन उपकरणों से तैयार किया गया।

नेटवर्क की तलाश में जांच

इतनी बड़ी रकम से जुड़े मामले में किसी बड़े नेटवर्क की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। जांच में यह देखा जा सकता है कि कथित जाली नोट बनाने से लेकर उन्हें करेंसी चेस्ट तक पहुंचाने और असली रकम को बाहर निकालने तक अलग-अलग लोगों की भूमिका थी या नहीं।

असली नोटों को ठिकाने लगाने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया, इसका पता वित्तीय लेनदेन और संबंधित लोगों की गतिविधियों की जांच से लगाया जा सकता है।

अगर रकम अलग-अलग खातों या संपत्तियों में लगाई गई होगी तो वित्तीय जांच से महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना रहेगी।

RBI से भेजी करेंसी का होगा मिलान

मामले में RBI से करेंसी चेस्ट को भेजी गई नकदी के रिकॉर्ड का मिलान भी अहम हो सकता है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कितनी वास्तविक करेंसी चेस्ट में पहुंची और बाद में रिकॉर्ड में उसकी स्थिति क्या दिखाई गई।

नकदी की प्राप्ति से लेकर उसके भंडारण और वितरण तक की पूरी श्रृंखला की जांच से कथित हेरफेर का तरीका सामने आ सकता है।

इसके साथ ही करेंसी चेस्ट की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रक्रिया की समीक्षा भी इस मामले के बाद महत्वपूर्ण हो गई है।

जांच पूरी होने के बाद खुलेगा पूरा राज

फिलहाल करीब 17 करोड़ रुपये के कथित नकली नोटों के मामले में प्रारंभिक जांच के आधार पर कई आशंकाएं सामने आई हैं। नए नोटों की फोटो कॉपी तैयार करने और असली करेंसी की जगह नकली नोट रखने की आशंका इनमें सबसे महत्वपूर्ण है।

जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि नकली नोटों का वास्तविक स्रोत क्या था, असली रकम कहां गई और पूरे मामले में कितने लोग शामिल थे।

सहारनपुर के सोफिया मार्केट स्थित PNB करेंसी चेस्ट से जुड़ा यह मामला अब केवल नकली नोट मिलने तक सीमित नहीं है। जांच का केंद्र इस बात पर भी है कि इतनी बड़ी रकम से कथित हेरफेर सुरक्षा और सत्यापन की कई परतों के बावजूद कैसे संभव हुआ। मामले के खुलासे के बाद बैंकिंग व्यवस्था में नकदी प्रबंधन और करेंसी चेस्ट की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

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