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चुनाव लड़ने का ऐलान
महराजगंज: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल की राजनीति में बड़ी हलचल शुरू हो गई है। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी ने करीब दो दशक बाद सक्रिय चुनावी राजनीति में वापसी का संकेत देते हुए महराजगंज की फरेंदा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का एलान किया है। साथ ही उन्होंने अपने बेटे और पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी को नौतनवा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की है। हालांकि पिता-पुत्र किस राजनीतिक दल के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अमरमणि त्रिपाठी ने रविवार को आनंदनगर स्थित कृष्णा मैरिज हॉल में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान अपने चुनावी इरादे सार्वजनिक किए। लंबे समय बाद किसी बड़ी सार्वजनिक सभा में पहुंचे अमरमणि ने समर्थकों से संवाद किया और अपने पुराने राजनीतिक संबंधों का जिक्र करते हुए फरेंदा से चुनाव लड़ने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि उनका परिवार लंबे समय से क्षेत्र की जनता के बीच रहकर राजनीति करता आया है और आगे भी लोगों के सुख-दुख में साथ खड़ा रहेगा।
कार्यक्रम में अमनमणि त्रिपाठी भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने पिता के लिए लोगों से समर्थन मांगा। अमनमणि ने कहा कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से क्षेत्र की जनता की सेवा करता आया है। अमरमणि की घोषणा के बाद फरेंदा के साथ नौतनवा विधानसभा क्षेत्र का चुनावी समीकरण भी चर्चा में आ गया है। नौतनवा विधानसभा क्षेत्र को त्रिपाठी परिवार का पुराना राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है। अमनमणि त्रिपाठी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नौतनवा सीट जीती थी। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वह तीसरे स्थान पर रहे। मौजूदा समय में नौतनवा से निषाद पार्टी के ऋषि त्रिपाठी विधायक हैं, जिन्होंने भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी।
फरेंदा विधानसभा सीट पर वर्तमान में कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी विधायक हैं। ऐसे में अमरमणि के चुनावी मैदान में उतरने के एलान से यहां मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। हालांकि उनकी उम्मीदवारी के सामने एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल भी है। मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में अमरमणि त्रिपाठी को उम्रकैद की सजा हुई थी और वह अगस्त 2023 में समयपूर्व रिहा हुए थे। जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(3) के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा पाने वाले व्यक्ति की चुनाव लड़ने की पात्रता पर रिहाई के बाद भी निर्धारित अवधि तक प्रतिबंध रह सकता है। इस वजह से 2027 में उनके चुनाव लड़ने की कानूनी पात्रता पर सवाल उठ रहे हैं।
अमरमणि त्रिपाठी ने फिलहाल यह नहीं बताया है कि वह किसी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरेंगे या निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। यही कारण है कि उनके एलान के बाद राजनीतिक दलों में भी उनके अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। अमरमणि और अमनमणि की चुनावी सक्रियता से महराजगंज की फरेंदा और नौतनवा दोनों सीटें 2027 के विधानसभा चुनाव में हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में शामिल हो सकती हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पिता-पुत्र किस राजनीतिक मंच से मैदान में उतरते हैं और अमरमणि के सामने मौजूद कानूनी अड़चन का क्या नतीजा निकलता है।
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