उत्तर प्रदेश

बाढ़ में बहे अपने स्टील प्लेटों में दर्ज हुई पहचान की उम्मीद

nidhi
2 Sept 2026 10:42 AM IST
बाढ़ में बहे अपने स्टील प्लेटों में दर्ज हुई पहचान की उम्मीद
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त्रिशूली की बाढ़

काठमांडू: नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसका अंत अभी नजर नहीं आ रहा। बाढ़ के बाद अलग-अलग इलाकों और नदी किनारों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं, लेकिन इनमें से कई की पहचान नहीं हो सकी है। कई शव इतनी खराब स्थिति में मिले कि चेहरे या शारीरिक बनावट के आधार पर उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। ऐसे में प्रशासन डीएनए और अन्य फोरेंसिक रिकॉर्ड के सहारे भविष्य में पहचान की उम्मीद बचाए रखने की कोशिश कर रहा है। सबसे मार्मिक तस्वीर उन स्थानों से सामने आ रही है, जहां अज्ञात शवों का अंतिम प्रबंधन किया जा रहा है। शवों से डीएनए नमूने लेने और जरूरी फोरेंसिक विवरण दर्ज करने के बाद उन्हें निर्धारित स्थानों पर दफनाया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक दफनाए गए शवों की जगह पर स्टील की प्लेट लगाई जा रही है। इन प्लेटों पर पहचान से जुड़ा कोड दर्ज किया जाता है, ताकि भविष्य में डीएनए मिलान होने पर संबंधित शव तक पहुंचा जा सके। इस तरह मिट्टी के नीचे भी परिजनों की अपने बिछड़ों से मिलने की आखिरी उम्मीद सुरक्षित रखने की कोशिश है।

अज्ञात शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूनों और संबंधित रिकॉर्ड को 12 साल तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य यह है कि अगर आने वाले वर्षों में कोई परिवार अपने लापता सदस्य की तलाश में डीएनए नमूना देता है तो उपलब्ध रिकॉर्ड से उसका मिलान किया जा सके। पहचान स्थापित होने पर परिवार अपने प्रियजन के बारे में अंतिम जानकारी हासिल कर सकेगा।
नेपाल पुलिस ने अज्ञात शवों की तस्वीरें और उनके मिलने के स्थान से संबंधित विवरण भी ऑनलाइन उपलब्ध कराए हैं। पुलिस की सूची में शव मिलने की तारीख, स्थान और उसे कहां रखा गया है जैसी जानकारियां दर्ज हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर तस्वीरों के डिस्प्ले बोर्ड लगाकर भी परिजनों को पहचान में मदद दी जा रही है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 30 अगस्त तक भोटेकोशी और त्रिशूली बाढ़ के बाद बरामद 669 शवों में केवल 20 की पहचान रिश्तेदारों द्वारा हो सकी थी। कई शव बाढ़ के केंद्र से दर्जनों किलोमीटर दूर तक बहकर पहुंच गए, जबकि कुछ क्षत-विक्षत अवस्था में मिले। अस्पतालों के मुर्दाघर भरने और शवों के खराब होने के कारण डीएनए तथा अन्य फोरेंसिक रिकॉर्ड लेने के बाद अज्ञात शवों के अंतिम प्रबंधन की प्रक्रिया तेज करनी पड़ी।
चितवन में भी बड़े स्तर पर यह प्रक्रिया जारी है। एक सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 280 शवों का फोरेंसिक परीक्षण और डीएनए नमूना संग्रह करने के बाद देवघाट स्थित स्थल पर उनका सुरक्षित प्रबंधन किया जा चुका था। बाढ़ में लापता लोगों के परिवारों के लिए सबसे कठिन स्थिति अनिश्चितता की है। किसी को कपड़ों से अपनों की पहचान करनी पड़ रही है तो कोई गहने, स्कूल टाई या शरीर पर मौजूद निशानों के सहारे तलाश में जुटा है। जहां ये निशान भी पर्याप्त नहीं हैं, वहां डीएनए ही अंतिम उम्मीद बन गया है। स्टील की प्लेटों के नीचे दफन ये अज्ञात शव अब उन परिवारों की प्रतीक्षा का प्रतीक हैं, जिन्हें शायद अपने प्रियजन की पहचान के लिए वर्षों इंतजार करना पड़े।
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